शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः फल्गुनस्तु कृष्णं वचनमव्रवीत् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
२२८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः शकुनिना धृतराष्ट्रो जनेश्वरः |
२२ क
सभा पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः शकुनिना राजा दुर्योधनस्तदा |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
एवमुक्तः शिखण्डी तु स्थूणय़क्षेण भारत |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः श्वसन्क्रोधान्महेष्वासतमो नृप |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३
शल्य उवाच
एवमुक्तः स इन्द्राण्या नहुषः प्रीतिमानभूत् ||
५ ग
सभा पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स कृष्णेन पाण्डवः परवीरहा |
२२ क
सभा पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स कृष्णेन युद्धं वव्रे महाद्युतिः |
३ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स कृष्णेन सर्वं सत्यं जनाधिप |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५
व्यास उवाच
एवमुक्तः स कौरव्य देवराज्ञा वृहस्पतिः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स गन्धर्वः कुन्तीपुत्रं धनञ्जय़म् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स च मुनिर्धर्मराजेन नारदः |
२ क
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमुक्तः स जग्राह तस्याः पाणिं यथाविधि |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
एवमुक्तः स तेजस्वी तं तथेत्युक्तवानृषिः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
१४८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स तेजस्वी प्रहस्य हरिरव्रवीत् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
३७
सूत उवाच
एवमुक्तः स तेजस्वी शृङ्गी कोपसमन्वितः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४८
ऋषय़ ऊचुः
एवमुक्तः स तैर्विप्रैर्भगवाँल्लोकभावनः |
२९ क
विराट पर्व
अध्याय
२०
द्रौपद्यु उवाच
एवमुक्तः स दुष्टात्मा कीचकः प्रत्युवाच ह |
२० क
विराट पर्व
अध्याय
२०
द्रौपद्यु उवाच
एवमुक्तः स दुष्टात्मा प्रहस्य स्वनवत्तदा |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
५२
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तः स देवैस्तैर्नैषधः पुनरव्रवीत् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
एवमुक्तः स धर्मात्मा जगाम मिथिलां मुनिः |
१२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स धर्मात्मा भ्रातृभिः सहितो वशी |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स धर्मात्मा युधिष्ठिरसहाय़वान् |
५० क
आदि पर्व
अध्याय
३९
सूत उवाच
एवमुक्तः स नागेन्द्रः काश्यपेन महात्मना |
४ क
विराट पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स पार्थेन रथात्प्रस्कन्द्य कुण्डली |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
एवमुक्तः स पितृभिः पितॄन्रामोऽव्रवीदिदम् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स पुत्रेण शन्तनुः प्रत्यभाषत |
५६ क
आदि पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
एवमुक्तः स भगवाञ्जरत्कारुर्महातपाः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५
शल्य उवाच
एवमुक्तः स भगवाञ्शच्या पुनरथाव्रवीत् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२७
उमो उवाच
एवमुक्तः स भगवाञ्शैलपुत्र्या पिनाकधृक् |
५० क
आदि पर्व
अध्याय
२१५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स भगवानव्रवीत्तावुभौ ततः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स भगवान्दाशार्हेणार्जुनेन च |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
१८२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स भगवान्मार्कण्डेय़ो महातपाः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२३
भीष्म उवाच
एवमुक्तः स भगवान्मैत्रेय़ं प्रत्यभाषत |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
एवमुक्तः स भगवान्वारिपूर्णेन पाणिना |
१०९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
एवमुक्तः स मां प्राह भगवाँल्लोकपूजितः |
१९० क
वन पर्व
अध्याय
९५
लोमश उवाच
एवमुक्तः स मुनिना महीपालो विचेतनः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२६
वासुदेव उवाच
एवमुक्तः स मुनिभिर्नारदो भगवानृषिः |
५० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स राजर्षिर्धर्मराजेन धीमता |
४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स राजर्षिर्धर्मराज्ञा महात्मना |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय
४७
सूत उवाच
एवमुक्तः स राजर्षिर्मेने सर्पं हि तक्षकम् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स राजर्षिस्तपोवीर्यसमाश्रय़ात् |
४२ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स राजर्षिस्तव पूर्वपितामहः |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स राजा तु पुनः पप्रच्छ तान्द्विजान् |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स राजा तु भगदत्तात्मजस्तदा |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
एवमुक्तः स राजेन्द्र रामः प्रहरतां वरः |
२५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स राजेन्द्रो व्यासेनामितवुद्धिना |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः स राज्ञा तु राक्षसस्तीव्रविक्रमः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स राज्ञा तु सञ्जय़ो वाक्यमव्रवीत् |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः स वार्ष्णेय़ः कौन्तेय़ेनामितौजसा |
४४ क