chevron_left  एवमुक्तस्तुarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु शर्वेण सिन्धुराजो जय़द्रथः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११४
नारद उवाच
एवमुक्तस्तु स मुनिः कन्यया गालवस्तदा |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
एवमुक्तस्तु स मुनिर्भार्यां वचनमव्रवीत् |
३७ क
वन पर्व
अध्याय २१
वासुदेव उवाच
एवमुक्तस्तु स मय़ा विस्तरेणेदमव्रवीत् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु सङ्क्रुद्धः शरवर्षेण पाण्डवम् |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु समरे पुत्रो दुःशासनस्तव |
७ क
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
एवमुक्तस्तु सव्रीडं तूष्णीं किञ्चिदवाङ्मुखः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु सहितैस्त्रिदशैर्मघवांस्तदा |
३ क
विराट पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु सुश्रोण्या तय़ा सख्या परन्तपः |
८ क
वन पर्व
अध्याय १५०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु हनुमान्भीमसेनमभाषत |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तुलाधारो व्राह्मणेन यशस्विना |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्त्ववाक्षीर्षो विमनाः स सुय़ोधनः |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
व्यास उवाच
एवमुक्तस्त्वाङ्गिरसेन शक्रः; समादिदेश स्वय़मेव देवान् |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय १४६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तय़ा भर्ता तां समालिङ्ग्य भारत |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तय़ा भीष्मः कन्यया विप्रसंसदि |
५० क
वन पर्व
अध्याय ६५
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तस्तय़ा राजन्सुदेवो द्विजसत्तमः |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय ११३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तय़ा राजा तां देवीं पुनरव्रवीत् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ६६
शकुन्तलो उवाच
एवमुक्तस्तय़ा शक्रः सन्दिदेश सदागतिम् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तय़ा सम्यग्वृहत्तेजा वृहस्पतिः |
११ क
आदि पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्य कर्णस्य व्रीडावनतमाननम् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय ७२
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तस्य केशिन्या नलस्य कुरुनन्दन |
२३ क
वन पर्व
अध्याय ६९
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तस्य कौन्तेय़ तेन राज्ञा नलस्य ह |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
एवमुक्तस्य चैवाथ महादेवेन मे विभो |
१७७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्य दूतेन द्रुपदस्य तदा नृप |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्य मात्रा च स्वय़ं पित्रा च भानुना |
३ क
वन पर्व
अध्याय १२५
लोमश उवाच
एवमुक्तस्य शक्रेण च्यवनस्य महात्मनः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
एवमुक्ता जरत्कारुर्भर्त्रा हृदय़कम्पनम् |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ११३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता ततः कुन्ती पाण्डुं परपुरञ्जय़म् |
३१ क
सभा पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
एवमुक्ता ततः कृष्णमव्रवीद्यदुनन्दनम् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता ततः शक्रमाजुहाव यशस्विनी |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता ततः शार्ङ्गी पुत्रानुत्सृज्य खाण्डवे |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २२०
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमुक्ता ततः स्वाहा तुष्टा स्कन्देन पूजिता |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता तदा कन्या तेन राज्ञा तदाश्रमे |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ९७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता तु पुत्रेण भूरिद्रविणतेजसा |
१९ क
वन पर्व
अध्याय ७४
वृहदश्व उवाच
एवमुक्ता तु वैदर्भ्या सा देवी भीममव्रवीत् |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
एवमुक्ता तु सा तेन शाल्वेनादीर्घदर्शिना |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय ११२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता तु सा देवी तथा चक्रे पतिव्रता |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३
शल्य उवाच
एवमुक्ता तु सा देवी नहुषेण पतिव्रता |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४९
नारद उवाच
एवमुक्ता तु सा देवी मृत्युः कमलमालिनी |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
भीष्म उवाच
एवमुक्ता तु सा विप्रं प्रत्युवाचाथ नारदम् |
५ क
वन पर्व
अध्याय ५०
वृहदश्व उवाच
एवमुक्ता तु हंसेन दमय़न्ती विशां पते |
३० क
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
एवमुक्ता नरेन्द्रेण सचिवास्ते नराधिप |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता नारदेन भीष्ममीय़ुर्नराधिपाः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६४
भीष्म उवाच
एवमुक्ता निवृत्ता सा प्रविष्टा यज्ञपावकम् |
११ क
विराट पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता प्रत्युवाच राजपुत्रं वृहन्नडा |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
एवमुक्ता भगवता मुनय़स्ते समभ्ययुः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय २०४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता महात्मानो नारदेन महर्षिणा |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय ११२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता महाराज कुन्ती पाण्डुमभाषत |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५०
नारद उवाच
एवमुक्ता महावाहो मृत्युः परपुरञ्जय़ |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्ता महीपाला भीष्मेण भरतर्षभ |
१२ क