भीष्म पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्ता महेष्वासास्ते वीराः क्षिप्रकारिणः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ता वरं वव्रे गात्रसौगन्ध्यमुत्तमम् |
६५ क
वन पर्व
अध्याय
१२३
लोमश उवाच
एवमुक्ता सुकन्या तु सुरौ ताविदमव्रवीत् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
एवमुक्ताः कश्यपेन वालखिल्यास्तपोधनाः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ताः क्षणं चक्रुः पाण्डवाः सह तैर्द्विजैः |
४९ क
वन पर्व
अध्याय
२४४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ताः पाण्डवेन कौन्तेय़ेन यशस्विना |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ताः प्रय़ातास्ते पाण्डवा जनमेजय़ |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
११५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ताव्रवीन्माद्रीं सकृच्चिन्तय़ दैवतम् |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
एवमुक्तास्ततः कृष्ण सुरास्ते शूलपाणिना |
१७२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तास्ततः सर्वे धार्तराष्ट्रस्य सैनिकाः |
३६ क
सभा पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्ततः सर्वे भ्रातरो विपुलौजसः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१७०
गन्धर्व उवाच
एवमुक्तास्ततः सर्वे राजानस्ते तमूरुजम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१०२
लोमश उवाच
एवमुक्तास्ततस्तेन देवास्तं मुनिमव्रुवन् ||
१६ ग
आदि पर्व
अध्याय
२०
सूत उवाच
एवमुक्तास्ततो गत्वा गरुडं वाग्भिरस्तुवन् |
९ क
वन पर्व
अध्याय
९८
लोमश उवाच
एवमुक्तास्ततो देवा अनुज्ञाप्य पितामहम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१०५
लोमश उवाच
एवमुक्तास्ततो देवा लोकाश्च मनुजेश्वर |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तास्तथा चक्रुः सर्वे राज्ञः प्रिय़ैषिणः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
२३३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्तु गन्धर्वाः पाण्डवेन यशस्विना |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
२२९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्तु गन्धर्वाः प्रहसन्तो विशां पते |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
२२९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्तु गन्धर्वै राज्ञः सेनाग्रय़ाय़िनः |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८१
भीष्म उवाच
एवमुक्तास्तु ता गावः शुभाः करुणवत्सलाः |
२२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्तु ते तेन पौरजानपदा जनाः |
१ क
सभा पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्तु ते तेन राज्ञा राजीवलोचन |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१८८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्तु ते पार्था यमौ च पुरुषर्षभौ |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तास्तु ते राजन्नुदक्रोशन्मुहुर्मुहुः |
३० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्तु ते राज्ञा सर्व एव महर्षय़ः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तास्तु ते राज्ञा सात्वतीपुत्रमभ्ययुः |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तास्तु ते राज्ञा सौवलस्य पदानुगाः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२४१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्तु ते सर्वे तथेत्यूचुर्नराधिपम् |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
१३१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्तु ते सर्वे पाण्डुपुत्रेण कौरवाः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६९
द्रोण उवाच
एवमुक्तास्तु ते सर्वे प्रत्यूचुस्तं दिवौकसः |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तास्तु ते सर्वे शस्त्रवृष्टिमपातय़न् |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
एवमुक्तास्तु देवेन ऋषय़स्त्रिदशास्तथा |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
६७
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तास्त्वगच्छंस्ते व्राह्मणाः सर्वतोदिशम् |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
९
सूत उवाच
एवमुक्ते ततः कन्या सोदतिष्ठत्प्रमद्वरा |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्ते ततः कर्णः शल्यं पुनरभाषत |
२६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ते ततः कुन्तीं प्रत्यगृह्णाज्जनार्दनः |
२९ क
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ते ततः कृष्णो मृदुपूर्वमिदं वचः |
५ क
वन पर्व
अध्याय
२१९
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमुक्ते ततः शक्रं किं कार्यमिति सोऽव्रवीत् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
एवमुक्ते ततस्त्विन्द्रः प्रीतो वाक्यमुवाच ह |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्ते ततो द्रोणे जय़ेत्यूचुर्नराधिपाः |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
एवमुक्ते ततो वाक्ये च्यवनो भार्गवस्तदा |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
७५
दमय़न्त्यु उवाच
एवमुक्ते ततो वाय़ुरन्तरिक्षादभाषत |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
एवमुक्ते तदा तेन दम्पती तौ जहर्षतुः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
५५
वृहदश्व उवाच
एवमुक्ते तु कलिना प्रत्यूचुस्ते दिवौकसः |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्ते तु काकेन प्रहस्यैको विहङ्गमः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्ते तु कृष्णेन यथोद्दिष्टा महारथाः |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्ते तु कृष्णेन सम्प्रहृष्यन्नरोत्तमाः |
४७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४७
वासुदेव उवाच
एवमुक्ते तु गान्धार्या धृतराष्ट्रो जनेश्वरः |
१ क
वन पर्व
अध्याय
२३७
दुर्योधन उवाच
एवमुक्ते तु धर्मात्मा ज्येष्ठः पाण्डुसुतस्तदा |
८ क