शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
श्रीभगवानु उवाच
भूतभव्यभविष्याणां छिन्नसर्वार्थसंशय़ः |
४९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३७
व्रह्मो उवाच
भूतभव्यभविष्याणां भावानां भुवि भावनाः |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३५
वासुदेव उवाच
भूतभव्यभविष्यादिधर्मकामार्थनिश्चय़म् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३००
याज्ञवल्क्य उवाच
भूतभव्यमनुष्याणां स्रष्टारमनघं तथा ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
भूतभव्यार्थमेवेह धर्मप्रवचनं कृतम् ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
अर्जुन उवाच
भूतभावन भूतेश देवदेव जगत्पते ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३०
श्रीभगवानु उवाच
भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसञ्ज्ञितः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३१
श्रीभगवानु उवाच
भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
भूतमेतत्परं लोके व्राह्मणा नाम भारत ||
२२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
भूतमेव व्यवस्यन्तो न स्म प्रव्याहरन्भय़ात् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६२
गन्धर्व उवाच
भूतलाद्भूमिपालेशं पितेव पतितं सुतम् |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
भूतले पातय़ामास वाक्यं चेदमुवाच ह ||
६५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
भूतवर्मा क्षेमशर्मा करकर्षश्च वीर्यवान् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४७
भीष्म उवाच
भूतविषक्ताश्चाक्षरसृष्टाः; पुत्र न नित्यं तदिह वदन्ति ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
भूतसंमोहनं भीमं मेरोः पर्यसनं यथा ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
११६
वैशम्पाय़न उवाच
भूतसंमोहने राजा सभार्यो व्यचरद्वनम् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१९
वैशम्पाय़न उवाच
भूतसङ्घसहस्राश्च दीनाश्चक्रुर्महास्वनम् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
भूतसङ्घानुचरितं रक्षोगणनिषेवितम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९१
वसिष्ठ उवाच
भूतसर्गमहङ्कारात्तृतीय़ं विद्धि पार्थिव |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
भूतसर्गमिमं कृत्वा सर्वलोकपितामहः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
भूतस्थानानि सर्वाणि रहस्यं त्रिविधं च यत् |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
भूतात्मा जीव इत्येव नामभिः प्रोच्यतेऽष्टभिः ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
भूतात्मा यः प्रभुश्चैव व्रह्म यच्च परं पदम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९४
युधिष्ठिर उवाच
भूतात्मा वा कथं ज्ञेय़स्तन्मे व्रूहि पितामह ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
भूतात्मा विसृजन्सर्वं यत्किञ्चिज्जङ्गमागमम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४७
भीष्म उवाच
भूतानां गुणसङ्ख्यानं भूय़ः पुत्र निशामय़ |
१ क
वन पर्व
अध्याय
२१२
मार्कण्डेय़ उवाच
भूतानां चापि सर्वेषां यं प्राहुः पावकं पतिम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२९
व्यास उवाच
भूतानां जन्म सर्वेषां विविधानां चतुर्विधम् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
भूतानां तु विपर्यासं मन्यते गतवानिति |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
भूतानां त्रासजननं चक्रातेऽस्त्रविशारदौ ||
३८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
भूतानां निधनं निष्ठा स्रोतसामिव सागरः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९७
भीष्म उवाच
भूतानां प्रतिकूलेभ्यो निवर्तस्व यतेन्द्रिय़ः ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६
द्रुपद उवाच
भूतानां प्राणिनः श्रेष्ठाः प्राणिनां वुद्धिजीविनः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
भूतानां सत्त्वजिज्ञासां साध्वसाधु च सर्वदा ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
भूतानां हि यथा धर्मे रक्षणं च परा दय़ा ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२४
विनतो उवाच
भूतानामग्रभुग्विप्रो वर्णश्रेष्ठः पिता गुरुः ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
भूतानामथ पञ्चानां यथैषामीश्वरं मनः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१०
गुरुरु उवाच
भूतानामनुकम्पार्थं जगाद जगतो हितम् ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५९
द्युमत्सेन उवाच
भूतानामनुकम्पार्थं मनुः स्वाय़म्भुवोऽव्रवीत् ||
३५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१६
व्राह्मण उवाच
भूतानामनुकम्पार्थं यन्मोहच्छेदनं प्रभो ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
नारद उवाच
भूतानामपरः कश्चिद्धिंसाय़ां सततोत्थितः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२००
मार्कण्डेय़ उवाच
भूतानामपरः कश्चिद्धिंसाय़ां सततोत्थितः |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
भूतानामात्मभावो यो ध्रुवोऽसौ संविजानताम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८६
पराशर उवाच
भूतानामिन्द्रिय़ाणां च गुणानां च समागमम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१८
शक्र उवाच
भूतानामिह वै यस्त्वा मय़ा विनिहितां सतीम् |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
भूतानामिह सर्वेषां दुःखोपहतचेतसाम् |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
२०८
मार्कण्डेय़ उवाच
भूतानामेव सर्वेषां यस्यां रागस्तदाभवत् |
४ क
वन पर्व
अध्याय
४१
अर्जुन उवाच
भूतानि च पिशाचांश्च गन्धर्वानथ पन्नगान् ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
भूतानि च पिशाचाश्च नासत्यावश्विनावपि |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
भूतानि च महाराज नानारूपधराण्यथ |
१३ क