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शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
एवं स गौतमः पुत्रं प्रीतिहर्षसमन्वितः |
६३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
एवं स गौतमस्तस्य प्रीतः पुत्रस्य भारत |
६९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स चिन्तय़ित्वा तु भगवान्मधुसूदनः |
३५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स तपसा राजा धृतराष्ट्रो महामनाः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय १६०
गन्धर्व उवाच
एवं स तर्कय़ामास रूपद्रविणसम्पदा |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
एवं स तान्यनीकानि कलिङ्गानां पुनः पुनः |
७५ क
आदि पर्व
अध्याय १४४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स तान्समाश्वास्य व्यासः पार्थानरिन्दमान् |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११२
नारद उवाच
एवं स तु धनं विद्वान्दानेनैव व्यशोधय़त् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स तुर्वसुं शप्त्वा यय़ातिः सुतमात्मनः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
एवं स दुःखितो राजन्महर्षिर्गौतमस्तदा |
५६ क
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स धार्तराष्ट्राणां स्पर्धमानो वृकोदरः |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
एवं स नाराचगणप्रतापी; शरार्चिरुच्चावचतिग्मतेजाः |
६२ क
आदि पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स नाहुषो राजा यय़ातिः पुत्रमीप्सितम् |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
नारद उवाच
एवं स निधनं प्राप्तः कुरुराजो महामनाः |
३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स निधनं प्राप्तो दौहित्रस्तव माधव |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स निश्चय़ं पापः कृत्वा दुर्योधनस्तदा |
२८ क
वन पर्व
अध्याय १९५
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं स निहतस्तेन कुवलाश्वेन सत्तम |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स नृपशार्दूल नृपः शान्तनवस्तदा |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
एवं स पाण्डवः क्रुद्ध आत्तमात्तं पुनः पुनः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय २८३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स पाण्डवस्तेन अनुनीतो महात्मना |
१६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स पुत्रपौत्राणां पितॄणामात्मनस्तथा |
१४ क
वन पर्व
अध्याय २२
वासुदेव उवाच
एवं स पुरुषव्याघ्र शाल्वो राज्ञां महारिपुः |
१ क
सभा पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स पुरुषव्याघ्रो विजिग्ये दिशमुत्तराम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
एवं स भगवांस्तत्र पूज्यमानः सुरर्षिभिः |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स भगवांस्तस्मिंस्तीर्थे दैत्यकुलान्तकः |
९१ क
कर्ण पर्व
अध्याय २५
दुर्योधन उवाच
एवं स भगवान्देवः सर्वलोकपितामहः |
१ क
वन पर्व
अध्याय ३१
द्रौपद्यु उवाच
एवं स भगवान्देवः स्वय़म्भूः प्रपितामहः |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
एवं स भगवान्देवो विश्वमूर्तिधरोऽव्ययः |
९८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७५
भीष्म उवाच
एवं स भगवान्पृष्टो भरद्वाजेन संशय़म् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय १५०
कुन्त्यु उवाच
एवं स भगवान्व्यासः पुरा कौरवनन्दन |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स भगवान्व्यासो गुरुर्मम विशां पते |
५९ क
वन पर्व
अध्याय ५४
वृहदश्व उवाच
एवं स यजमानश्च विहरंश्च नराधिपः |
३८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स राजा कुरुवृद्धवर्यः; समागतस्तैर्नरदेवपुत्रैः |
१७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स राजा कौरव्यश्चक्रे दानमहोत्सवम् |
१६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स राजा धर्मात्मा परीत्याश्रममण्डलम् |
१५ क
विराट पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स राजा मत्स्यानां विराटोऽक्षौहिणीपतिः |
१३ क
विराट पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स लव्ध्वा तु वरं समागमं; विराटराजेन नरर्षभस्तदा |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स ववृते यज्ञो धर्मराजस्य धीमतः ||
११ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ५
विदुर उवाच
एवं स वसते तत्र क्षिप्तः संसारसागरे |
२२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स वसुधाराभिर्वर्षमाणो नृपाम्वुदः |
१० क
सभा पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स वहुशः सर्वानुक्तवांस्तान्सभासदः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
एवं स वहुशस्तस्य शूद्रस्य भरतर्षभ |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
एवं स वहुशो राजन्पुरोधसमुपाहसत् ||
३७ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
एवं स वहुशो हृष्टः प्रशशंस जनार्दनम् |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स वित्तं प्रददौ महात्मा; सरस्वतीतीर्थवरेषु भूरि |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
एवं स वै महामाय़ो माय़या लाघवेन च |
९७ क
वन पर्व
अध्याय ९४
लोमश उवाच
एवं स व्राह्मणान्राजन्भोजय़ित्वा पुनः पुनः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स शप्तवान्राजन्वसूनष्टौ तपोधनः |
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स शिरसा तेन चोद्यमानः पुनः पुनः |
३३ क
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स शोकसन्तप्तः पार्थिवो हतवान्धवः |
४८ क