chevron_left  एवमाश्वासिताarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाश्वासिता कुन्ती प्रत्युवाच जनार्दनम् |
९९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
एवमाश्वासितो राजन्पुत्रेण तव सैन्धवः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
एवमाश्वासितो राजन्भारद्वाजेन सैन्धवः |
३३ क
वन पर्व
अध्याय २७६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाश्वासितो राजा मार्कण्डेय़ेन धीमता |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाश्वासितो राजा शल्येन भरतर्षभ |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
एवमाश्वासितो विद्वान्मार्जारेण स मूषकः |
८१ क
आदि पर्व
अध्याय २२५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाश्वास्य पुत्रान्स भार्यां चादाय़ भारत |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
एवमाश्वास्य भगिनीं द्रौपदीमपि चोत्तराम् |
३९ क
वन पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाश्वास्य राजानं नारदो भगवानृषिः |
११३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाश्वासय़ित्वैनां कुन्ती यदुकुलोद्वह |
३६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमासीत्तदा वीरे शरवर्षाभिसंवृते |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
एवमासीदमर्यादं युद्धं भरतसत्तम |
८८ क
आदि पर्व
अध्याय १६३
गन्धर्व उवाच
एवमासीन्महाभागा तपती नाम पौर्विकी |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६४
भीष्म उवाच
एवमाह महाभागः शाण्डिल्यो भगवानृषिः ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय ५३
युधिष्ठिर उवाच
एवमाहाय़मसितो देवलो मुनिसत्तमः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
भीष्म उवाच
एवमाहुः समाहारं क्षेत्रमध्यात्मचिन्तकाः |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय ६३
भीष्म उवाच
एवमाहुर्हृषीकेशं मुनय़ो वै नराधिप ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाय़ुष्मतीभिस्तु प्रजाभिर्भरतर्षभ |
१६ क
वन पर्व
अध्याय १७१
अर्जुन उवाच
एवमिन्द्रस्य भवने पञ्च वर्षाणि भारत |
९ क
वन पर्व
अध्याय २४०
दानवा ऊचुः
एवमीश्वरसंय़ुक्तस्तव देहो नृपोत्तम |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
पुत्र उवाच
एवमीहासुखासक्तं कृतान्तः कुरुते वशे ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
एवमुक्तः परं सान्त्वं मार्जारेण स मूषकः |
१२८ क
सभा पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः पाण्डवेन नारदः प्रत्युवाच तम् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः पाण्डवेन भगवान्केशवस्तदा |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय १७२
गन्धर्व उवाच
एवमुक्तः पुलस्त्येन वसिष्ठेन च धीमता |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४७
भीष्म उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच तं मुनिं जनमेजय़ः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच ततो गाधिः प्रजास्तदा |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच धर्मराजं जनार्दनः |
७९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच धार्तराष्ट्रं जनार्दनः |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच धार्तराष्ट्रो जनार्दनम् |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच धृष्टद्युम्नः प्रतापवान् |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच नकुलं सूतनन्दनः |
५२ क
वन पर्व
अध्याय २५१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच पश्यामो द्रौपदीमिति |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच पूरुः पितरमञ्जसा |
२७ क
वन पर्व
अध्याय १०३
लोमश उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच भगवान्मुनिपुङ्गवः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच भीमसेनं स माधवः |
७० क
वन पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच मार्कण्डेय़ो महातपाः |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२२
भीष्म उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच मैत्रेय़ः कर्मपूजकः |
१ क
वन पर्व
अध्याय १०७
लोमश उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच राजा हैमवतीं तदा |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच वासुदेवं धनञ्जय़ः |
४६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच विजय़ो भरतर्षभ |
१८ क
वन पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच वृत्रहा पाण्डुनन्दनम् |
४२ क
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच सर्वांस्ताञ्शशलक्षणः |
६२ क
वन पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच सहस्राक्षं धनञ्जय़ः |
३७ क
वन पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच सहस्राक्षं धनञ्जय़ः |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९
भीष्म उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच सृगालो वानरं तदा |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
स्त्र्यु उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच स्त्रीभूतो राजसत्तमः |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः प्रत्युवाच स्मय़मानो जनार्दनः |
६५ क
आदि पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रवव्राज कृतास्त्रोऽहं धनेप्सय़ा |
३१ क
सभा पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः प्रातिकामी स सूतः; प्राय़ाच्छीघ्रं राजवचो निशम्य |
३ क