अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
मुहूर्तमुपतिष्ठन्ति ततो यान्ति पराङ्मुखाः |
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमेव तद्युद्धमासीन्मधुरदर्शनम् |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
मुहूर्तमेव राजेन्द्र समेन स पथागमत् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
मुहूर्तमेवमभवद्वज्रवेगप्रमाथिनोः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्ताज्जितवान्सङ्ख्ये तदद्भुतमिवाभवत् ||
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१११
नारद उवाच
मुहूर्तात्प्रतिवुद्धस्तु सुपर्णो गमनेप्सय़ा |
४ क
सभा पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तात्प्राप्तकालं च दृष्ट्वा लोकचरं मुनिम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
मुहूर्तादथ मे दृष्टिः प्रादुर्भूता पुनर्नवा |
११८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तादिव चाचष्ट युक्तमित्येव दारुकः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
मुहूर्तादिव चापश्यत्पुरुषं पीतवाससम् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तादिव तं द्रोणस्तथैव समभाषत |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तादिव राजेन्द्र छादय़ामास साय़कैः |
६१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
मुहूर्तादिव राजेन्द्र मां च भीराविशत्तदा ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तादिव संवृत्तं नीरजस्कं समन्ततः |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
२६२
मार्कण्डेय़ उवाच
मुहूर्ताद्द्रक्ष्यसे राममागतं तं शुचिस्मिते ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्ताद्भास्करस्येव राजँल्लोकं गभस्तय़ः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तान्निपतन्त्यन्ये वारणा वसुधातले ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
मुहूर्ताल्लव्धसञ्ज्ञस्तु स पक्षी पक्षिघातकम् |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
मुहूर्ताश्च निमेषाश्च तथैव युगपर्ययाः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तास्तमिते सूर्ये चक्रुर्युद्धं सुदारुणम् |
५६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तो यज्ञिय़ः प्राप्तश्चोदय़न्ति च याजकाः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तोदित आदित्ये सर्वे धर्मपुरस्कृताः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तय़ाते तस्मिंस्तु कण्वोऽप्याश्रममागमत् |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४१
भीष्म उवाच
मुहूर्तय़ाते शक्रे तु देवशर्मा महातपाः |
२८ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
२
कृप उवाच
मुह्यता तु मनुष्येण प्रष्टव्याः सुहृदो वुधाः |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
मुह्यते तत्र तत्रैव समदेव वराङ्गना ||
३३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
मुह्यते प्राणिनां ज्ञात्वा गतिं चागतिमेव च ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
मुह्यते मे मनस्तात कथा तावन्निवर्त्यताम् |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
मुह्यते मे मनस्तात गात्रे स्वेदश्च जाय़ते ||
५५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
मुह्यन्तं चानुमुह्यामि दुर्योधनमचेतनम् ||
९८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२७५
समङ्ग उवाच
मुह्यन्ति शोचन्ति यदेन्द्रिय़ाणि; प्रज्ञालाभो नास्ति मूढेन्द्रिय़स्य ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१८९
मार्कण्डेय़ उवाच
मुह्यन्ति हि प्रजास्तात कालेनाभिप्रचोदिताः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
मुह्यन्तीव हि मे सर्वा धनञ्जय़दिदृक्षय़ा |
६२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
मुह्यन्त्यनुचिता नार्यो विदेहानि शिरांसि च ||
५० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
मुह्यमानाः सुवहुशो मुञ्चन्त्यो वारि नेत्रजम् ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
मुह्यमानोऽव्रवीच्चापि मुहूर्तं तिष्ठ सञ्जय़ |
१०८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
युधिष्ठिर उवाच
मुह्यामीव निशम्याद्य चिन्तय़ानः पुनः पुनः |
१ क
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
मूकं नाम दितेः पुत्रं ददर्शाद्भुतदर्शनम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
मूकस्य गात्रे विस्तीर्णे शैलसंहनने तदा ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
मूढं चैनं समालक्ष्य सारथिस्त्वरितो रथम् |
४५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३९
श्रीभगवानु उवाच
मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडय़ा क्रिय़ते तपः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९४
वामदेव उवाच
मूढमैन्द्रिय़कं लुव्धमनार्यचरितं शठम् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७५
समङ्ग उवाच
मूढस्य दर्पः स पुनर्मोह एव; मूढस्य नाय़ं न परोऽस्ति लोकः |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
मूढांस्तु सर्वथा मन्ये धार्तराष्ट्रान्सुवालिशान् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११
शकुनिरु उवाच
मूढानामर्थहीनानां तेषामेनस्तु विद्यते ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
मूढानामवलिप्तानामसारं भाषितं भवेत् |
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
मूढानामवलिप्तानामसारं भाषितं वहु |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
मूढाश्च ते तमेवाजौ विनदन्तः समाद्रवन् |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
मूढास्त्वेतानि भाषन्ते यानीमान्यात्थ भारत |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
मूढास्त्वेतौ न जानन्ति नरनाराय़णावृषी ||
१२ ख