अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
भूर्भुवः स्वस्तरुस्तारः सविता प्रपितामहः |
११७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
भूर्वाय़ुर्ज्योतिरापश्च वाग्वुद्धिस्त्वं मतिर्मनः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
भूलिङ्गशकुनाश्चान्ये समुद्रं सर्वतोऽभवन् ||
९ ग
सभा पर्व
अध्याय
४१
शिशुपाल उवाच
भूलिङ्गशकुनिर्नाम पार्श्वे हिमवतः परे |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
भूव्योमतोय़ानलवाय़वो हि; सदा शरीरं परिपालय़न्ति |
४७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
भूशय़ो भूषणो भूतिर्विशोकः शोकनाशनः ||
८० ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
भूषणानां च शुभ्राणां कवचानां च सर्वशः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
भूषणानां च सर्वेषां कर्ता शिल्पवतां वरः |
२८ क
विराट पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
भूषणानि च मुख्यानि यानानि शय़नानि च ||
३७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
भूषणान्यथ मुख्यानि कम्वलान्यजिनानि च |
३२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
भूषणान्युत्तरीय़ाणि वेष्टनान्यवमुच्य च |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
भूषणेषु च सोऽस्माभिर्वालो युधि पुरस्कृतः ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय
१८
द्रौपद्यु उवाच
भूषितं तमलङ्कारैः कुण्डलैः परिहाटकैः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
भूषितः सर्वगात्रेषु देवगर्भः श्रिय़ा ज्वलन् ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
भूषिता भूषणैश्चित्रैः शतसङ्ख्या विनिर्ययुः ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
भूय़ एनमपश्याम सिंहं मृगगणा इव ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६८
युधिष्ठिर उवाच
भूय़ एव कुरुश्रेष्ठ दानानां विधिमुत्तमम् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
वसिष्ठ उवाच
भूय़ एव च माहात्म्यं सुवर्णस्य निवोध मे |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ एव तदा वीर्यं जिज्ञासुः सव्यसाचिनः |
४४ ख
वन पर्व
अध्याय
१२५
लोमश उवाच
भूय़ एव तु ते वीर्यं प्रकाशेदिति भार्गव ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९४
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ एव तु भीष्मश्च द्रोणो विदुर एव च |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
भूय़ एव तु मद्रेश यत्ते वक्ष्यामि तच्छृणु |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१८३
मार्कण्डेय़ उवाच
भूय़ एव तु माहात्म्यं व्राह्मणानां निवोध मे |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
धृतराष्ट्र उवाच
भूय़ एव तु मे शंस यथा युद्धमवर्तत |
१२ क
स्त्री पर्व
अध्याय
७
धृतराष्ट्र उवाच
भूय़ एव तु मे हर्षः श्रोतुं वागमृतं तव ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३४
शुक उवाच
भूय़ एव तु लोकेऽस्मिन्सद्वृत्तिं वृत्तिहैतुकीम् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
भूय़ एव तु विंशत्या साय़कानां समाचिनोत् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
भूय़ एव तु संरव्धास्तेऽर्जुनं सहकेशवम् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
भूय़ एव ननादोग्रः क्रोधसंरक्तलोचनः |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ एव महाराज यदि ते श्रवणे मतिः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
भूय़ एव महावाहो प्रय़यौ हय़संमतः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
श्रीभगवानु उवाच
भूय़ एव महावाहो शृणु मे परमं वचः |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१०५
लोमश उवाच
भूय़ एव महीं कृत्स्नां विचेतुमुपचक्रमुः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ एव व्राह्मणमहाभाग्यं वक्तुमर्हसीत्यव्रवीत्पाण्डवेय़ो मार्कण्डेय़म् ||
१ क
वन पर्व
अध्याय
७३
केशिन्यु उवाच
भूय़ एव सुगन्धीनि हृषितानि भवन्ति च |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ एव हतास्तत्र प्राणिनः खाण्डवालय़ाः ||
५० ख
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
भूय़ एवाकरोद्यत्नं तपस्यमितविक्रम ||
२३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
४
विदुर उवाच
भूय़ एवात्मनात्मानं वध्यमानमुपेक्षते ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
३८
सूत उवाच
भूय़ एवाभवद्राजा शोकसन्तप्तमानसः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
भूय़ एवाभवन्मूढं सुभृशं चाप्यकम्पत ||
७४ ख
वन पर्व
अध्याय
२३०
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ एवाभ्यवर्तन्त शतशोऽथ सहस्रशः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
भूय़ एवाभ्यवर्षच्च समरे कृष्णपाण्डवौ ||
२४ ग
वन पर्व
अध्याय
९८
युधिष्ठिर उवाच
भूय़ एवाहमिच्छामि महर्षेस्तस्य धीमतः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
अर्जुन उवाच
भूय़ः कथय़ तृप्तिर्हि शृण्वतो नास्ति मेऽमृतम् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
भूय़ः क्रोधसमाविष्टा इरावन्तमथाद्रवन् ||
३७ ख
सभा पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ः क्रोधाभिताम्रान्ते रक्ते नेत्रे वभूवतुः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५०
नारद उवाच
भूय़ः पद्माय़ुतं तात मृगैः सह चचार सा ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ः प्रतीच्यभिमुखी सुस्राव सरितां वरा ||
५२ ख
आदि पर्व
अध्याय
३८
सूत उवाच
भूय़ः प्रसादं भगवान्करोत्विति ममेति वै ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ः शोकसमाविष्टाः पाण्डवाः समुपाविशन् ||
५ ख