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विराट पर्व
अध्याय ६६
अर्जुन उवाच
एष क्रोधवशान्हत्वा पर्वते गन्धमादने |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७२
वैशम्पाय़न उवाच
एष गच्छति कौन्तेय़स्तुरगश्चैव दीप्तिमान् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
एष गच्छति सौभद्रः पार्थानामग्रतो युवा |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
एष गच्छत्यनीकानि द्वितीय़ इव फल्गुनः ||
३८ ख
मौसल पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
एष गच्छामि पदवीं सत्येन च तथा शपे |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
एष गच्छामि सङ्ग्रामं त्वत्कृते कुरुनन्दन ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
एष गच्छामि सुक्षिप्रं यत्र भीमो व्यवस्थितः ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९६
नारद उवाच
एष गाण्डीमय़श्चापो लोकसंहारसम्भृतः |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२७
धृतराष्ट्र उवाच
एष गान्धारि पुत्रस्ते दुरात्मा शासनातिगः |
७ क
विराट पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
एष घोषः सजलदो रोरवीति च वानरः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १४
सूत उवाच
एष च त्वां सुतो मातर्दास्यत्वान्मोक्षय़िष्यति ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
एष च भ्रातृभिः सार्धं सुशर्माह्वय़ते रणे |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
महेश्वर उवाच
एष चक्रचरैर्देवि देवलोकचरैर्द्विजैः |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
एष चाक्षिपते काले काले विसृजते पुनः |
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
एष चापि नरव्याघ्रो मत्कृते जीवितं त्यजेत् |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
एष चापि रणे भीष्मो दहते वै महाचमूम् |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
एष चापीदृशः पार्थः प्रसह्य हृतवानिति ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६४
भीष्म उवाच
एष चारिषु विक्रान्तः कर्म सत्पुरुषोचितम् |
३२ क
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
एष चार्थो महावाहो पूर्वमेव मय़ा श्रुतः |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
एष चास्तं गिरिश्रेष्ठं भानुमान्प्रतिपद्यते |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
एष चास्त्रप्रतीघातं वासुदेवः प्रय़ुक्तवान् |
२८ क
वन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
एष चास्मान्वय़ं चैनं युध्यमानाः परन्तप |
२४ क
वन पर्व
अध्याय २१३
मार्कण्डेय़ उवाच
एष चेज्जनय़ेद्गर्भं सोऽस्या देव्याः पतिर्भवेत् ||
३३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
एष चेदिपतिः शूरः सह पुत्रेण भारत |
९ क
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
एष चेदिपतिः शूरो धृष्टकेतुर्महारथः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय १५०
नारद उवाच
एष चेष्टय़ते सम्यक्प्राणिनः सम्यगाय़तः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय १४६
व्राह्मण्यु उवाच
एष चैव गुरुर्धर्मो यं प्रवक्षाम्यहं तव |
६ क
विराट पर्व
अध्याय ४३
कर्ण उवाच
एष चैव महेष्वासस्त्रिषु लोकेषु विश्रुतः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
एष चैव श्मशानेषु देवो वसति नित्यशः |
७६ क
वन पर्व
अध्याय २८८
कुन्त्यु उवाच
एष चैव स्वभावो मे पूजय़ेय़ं द्विजानिति |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
कुन्त्यु उवाच
एष जेष्यति सङ्ग्रामे कुरून्सर्वान्समागतान् |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९६
नारद उवाच
एष तं शीलवृत्तेन शौचेन च विशिष्यते ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४८
नाग उवाच
एष तत्रैव गच्छामि यत्र तिष्ठत्यसौ द्विजः |
२० क
स्त्री पर्व
अध्याय २३
गान्धार्यु उवाच
एष तप्त्वा रणे शत्रूञ्शस्त्रतापेन वीर्यवान् |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
एष तस्मात्पुरोधाय़ कञ्चिदन्यं ममाग्रतः |
८१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०७
सुपर्ण उवाच
एष तस्यापि ते मार्गः परितापस्य गालव |
२१ क
वन पर्व
अध्याय १२८
लोमश उवाच
एष तस्याश्रमः पुण्यो य एषोऽग्रे विराजते |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय १४०
वैशम्पाय़न उवाच
एष तानद्य वै सर्वान्हनिष्यामि त्वय़ा सह ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
एष तालेन दीप्तेन भीष्मस्तिष्ठति पालय़न् |
१०४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
एष तावत्समासेन तव सङ्कीर्तितो मय़ा |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय २१२
वैशम्पाय़न उवाच
एष तावदभिप्राय़माख्यातु स्वं महामतिः |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
एष तिष्ठति कौन्तेय़ः संस्पृशन्गाण्डिवं धनुः |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
एष तिष्ठति गोविन्दः पूजितोऽस्माभिरच्युतः |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
एष तिष्ठति वै राजा पाण्डुपुत्रो युधिष्ठिरः |
२ क
विराट पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
एष तिष्ठन्रथश्रेष्ठो रथे रथवरप्रणुत् |
५ क
वन पर्व
अध्याय २७०
मार्कण्डेय़ उवाच
एष तीर्त्वार्णवं रामः सेतुना हरिभिः सह |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
एष तूद्देशतः प्रोक्तो विभूतेर्विस्तरो मय़ा ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
एष ते कथितः पार्थ नाराय़णजय़ो मृधे |
६७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
एष ते कथितः पूर्वं सम्भवोऽस्मद्गुरोर्नृप |
५८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एष ते कथितो धर्मः सात्वतो यदुवान्धव |
७८ क