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कर्ण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तो महातेजास्ततो दुर्योधनो नृपः |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तो महादेवो देवांस्तानिदमव्रवीत् ||
३५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तो महाप्राज्ञः कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तो महाराज द्रोणपुत्रः स्मय़न्निव |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तो महाराज पिता देवव्रतस्तव |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तो महावाहुः केशवः सव्यसाचिना |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तो महावाहुः केशवः सव्यसाचिना |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तो महावाहुः पार्थः कृष्णमथाव्रवीत् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय १४८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तो महावाहुर्भीमसेनः प्रतापवान् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तो महावाहुर्वासुदेवेन पाण्डवः |
५७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तो मुनिस्तत्त्वं कवीन्द्रो राजसत्तम |
१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तो मय़ा द्रौणिर्मामिदं प्रत्युवाच ह |
३५ क
वन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
एवमुक्तो यदि मय़ा गृह्णीय़ाद्वचनं मम |
११ क
आदि पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तो यय़ातिस्तु शुक्रं कृत्वा प्रदक्षिणम् |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तो यय़ौ पार्थान्पुत्रेण तव सौवलः |
६४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तो यय़ौ शीघ्रं पुत्रेण तव सौवलः |
८९ क
वन पर्व
अध्याय १९०
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमुक्तो वामदेवेन राज; न्नन्तःपुरे राजपुत्रं जघान |
७४ क
भीष्म पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय १६१
गन्धर्व उवाच
एवमुक्तोऽथ नृपतिर्वाचा मधुरय़ा तदा |
५ क
वन पर्व
अध्याय ६८
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तोऽर्चय़ित्वा तामाशीर्वादैः सुमङ्गलैः |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तोऽर्जुनो राज्ञा प्राञ्जलिर्नृपमव्रवीत् |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तोऽवहत्पार्थं कृष्णो द्रोणात्मजान्तिकम् |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तोऽव्रवीत्पार्थं केशवो राजसत्तम |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तोऽव्रवीत्सूतो राजानं जनमेजय़ |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तोऽव्रवीद्द्रौणी राजानं युद्धदुर्मदम् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तोऽस्मि पार्थेन प्रतिवक्तुं स्म नोत्सहे |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय २१५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तौ तमव्रूतां ततस्तौ कृष्णपाण्डवौ |
३ क
वन पर्व
अध्याय ५५
वृहदश्व उवाच
एवमुक्त्वा कलिं देवा द्वापरं च दिवं यय़ुः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा किरन्वाणान्द्रुपदस्य सुतो वली |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ११७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा कुरून्सर्वान्कुरूणामेव पश्यताम् |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा कुरून्सर्वान्भीष्मः शान्तनवस्तदा |
१ क
वन पर्व
अध्याय २७८
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमुक्त्वा खमुत्पत्य नारदस्त्रिदिवं गतः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय १३५
लोमश उवाच
एवमुक्त्वा गतः शक्रो यवक्रीरपि भारत |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा गता तु श्रीस्ते च सर्वे युधिष्ठिर |
६१ क
वन पर्व
अध्याय २१३
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमुक्त्वा गदां केशी चिक्षेपेन्द्रवधाय़ वै |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १८३
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमुक्त्वा जगामाशु वैन्ययज्ञं महातपाः |
१० क
सभा पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा जरासन्धः सहदेवाभिषेचनम् |
२९ क
सभा पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा जरासन्धो भीमसेनमरिन्दमः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा जहासोच्चैः केशवः परवीरहा |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा ततः कुन्ती विरराम महाद्युते |
४० क
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा ततः कृष्णमभ्यभाषत भारत |
२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा ततः कृष्णा पाण्डवं प्रत्युपाविशत् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय १४५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा ततः कृष्णामुवाह स घटोत्कचः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा ततः कृष्णो रथाद्भूमिमपातय़त् |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा ततः पार्थं विसृज्य च महावलः |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा ततः पार्थः पुत्रं दुर्योधनं तव |
११ क
वन पर्व
अध्याय २९६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा ततः पार्थः शरैरस्त्रानुमन्त्रितैः |
२८ क
वन पर्व
अध्याय २३३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा ततः पार्थः सव्यसाची धनञ्जय़ः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा ततः पार्थो ध्याय़न्नास्ते महामनाः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४९
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा ततः प्राय़ात्कर्णं प्रति जनेश्वर |
३६ क