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शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
भगवान्यदि मे प्रीतस्तीर्थं स्यादिदमुत्तमम् |
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४५
जनमेजय़ उवाच
भगवान्वा हृषीकेशस्त्रैलोक्यस्य परो गुरुः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
भगवान्वासुदेवश्च कीर्त्यतेऽत्र सनातनः |
१९३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
नारद उवाच
भगवान्विश्वदृक्सिंहः सर्वमूर्तिर्महाप्रभुः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय २१२
मार्कण्डेय़ उवाच
भगवान्स महातेजा नित्यं चरति पावकः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय ११८
वैशम्पाय़न उवाच
भगस्य चन्द्रस्य दिवाकरस्य; पतेरपां साध्यगणस्य चैव |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
भगस्य नय़ने क्रुद्धः प्रहारेण व्यशातय़त् ||
१७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १८
वासुदेव उवाच
भगस्य नय़ने चैव वाहू च सवितुस्तथा |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
भगस्याक्षिनिहन्ता च कालो व्रह्मविदां वरः ||
७३ ख
आदि पर्व
अध्याय १४१
वैशम्पाय़न उवाच
भगिनी तव दुर्वुद्धे राक्षसानां यशोहर ||
४ ग
वन पर्व
अध्याय २१३
कन्यो उवाच
भगिनी दैत्यसेना मे सा पूर्वं केशिना हृता ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय ७२
कच उवाच
भगिनी धर्मतो मे त्वं मैवं वोचः शुभानने |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ४९
सूत उवाच
भगिनी नागराजस्य जरत्कारुरविक्लवा ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४२
भीष्म उवाच
भगिनीं चोदय़ामास पुष्पार्थे चारुलोचना ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
भगिनीं पुण्डरीकाक्ष इदं वचनमव्रवीत् ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
भगिनीं पुत्रशोकार्तामाश्वासय़त दुःखिताम् ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय १४१
वैशम्पाय़न उवाच
भगिनीं प्रति सङ्क्रुद्धमिदं वचनमव्रवीत् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ६६
वृहदश्व उवाच
भगिन्या दुहिता मेऽसि पिप्लुनानेन सूचिता |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४२
भीष्म उवाच
भगिन्या भाषितं सर्वमृषिस्तच्चाभ्यनन्दत ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय २०१
नारद उवाच
भगिन्यो मातरो भार्यास्तय़ोः परिजनस्तथा ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
भगिन्यौ मम ये नीते अम्विकाम्वालिके नृप |
१३ क
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
भगीरथ इति ख्यातः सत्यवागनसूय़कः ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
भगीरथं च राजानं मृतं शुश्रुम सृञ्जय़ |
५६ क
वन पर्व
अध्याय १०७
लोमश उवाच
भगीरथमिदं वाक्यं सुप्रीता समभाषत ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६४
भीष्म उवाच
भगीरथरथाक्रान्तान्देशान्गङ्गानिषेवितान् |
४ क
वन पर्व
अध्याय १०८
लोमश उवाच
भगीरथवचः श्रुत्वा प्रिय़ार्थं च दिवौकसाम् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भीष्म उवाच
भगीरथस्य संवादं व्रह्मणश्च महात्मनः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय ९२
लोमश उवाच
भगीरथो वसुमना गय़ः पूरुः पुरूरवाः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय १७७
धृष्टद्युम्न उवाच
भगीरथो वृहत्क्षत्रः सैन्धवश्च जय़द्रथः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
भगो विवस्वान्पूषा च सविता दशमस्तथा ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय ७
नारद उवाच
भगो विश्वे च साध्याश्च शुक्रो मन्थी च भारत ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
भगोंऽशश्चार्यमा चैव मित्रोऽथ वरुणस्तथा |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
भग्नं तु स्ववलं दृष्ट्वा भगदत्तेन धीमता |
५५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
भग्नचक्राक्षनीडाश्च निपातितमहाध्वजाः |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
भग्नचक्रान्रथान्केचिदवहंस्तुरगा रणे |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
भग्नचक्रै रथैः केचिच्छिन्नध्वजपताकिभिः |
१०१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
भग्नचक्रै रथैश्चापि पातितैश्च महाध्वजैः |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
भग्नदंष्ट्रा हतविषाः पदाक्रान्ता इवोरगाः ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
भग्नदन्तान्भग्नकटान्भग्नसक्थांश्च वारणान् |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
भग्नदर्पं हृतधनं तथा च वशमागतम् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
सञ्जय़ उवाच
भग्ननीडैराकुलाश्वैरारुह्यान्ये विचेतसः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
भग्नपृष्ठान्भग्नकुम्भान्निहतान्पर्वतोपमान् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
भग्नमाज्ञाय़ निस्त्रिंशमवप्लुत्य पदानि षट् |
६८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९६
भीष्म उवाच
भग्नशस्त्रो विपन्नाश्वश्छिन्नज्यो हतवाहनः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
भग्नसक्थो नृपो राजन्पांसुना सोऽवगुण्ठितः |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
भग्नसक्थो महाराज शेते पांसुषु रूषितः ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
भग्ना इत्येव भज्यन्ते विद्वांसोऽपि नकारणम् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५८
वासुदेव उवाच
भग्नाः पलाय़न्त दिशः पर्याप्तं तन्निदर्शनम् ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
भग्नाक्षकूवरान्कांश्चिच्छिन्नचक्रांश्च मारिष |
१११ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
भग्नाक्षोपस्करान्कांश्चिद्भग्नचक्रांश्च सर्वशः |
१९ क