chevron_left  ऐरावतगतंarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
ऐरावतगतं शक्रं सहामरगणैरहम् |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६४
भीष्म उवाच
ऐरावतगतो राजा देवानामिव वासवः ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय ३३
सूत उवाच
ऐरावतप्रभृतिभिर्ये स्म धर्मपराय़णाः ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५७
उत्तङ्क उवाच
ऐरावतसुतेनेह तवानीते हि कुण्डले ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय ३१
सूत उवाच
ऐरावतस्तक्षकश्च कर्कोटकधनञ्जय़ौ ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
ऐरावतस्थेन यथा देवराजेन दानवाः ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
ऐरावतस्थो मघवान्वारिधारा इवानघ ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय २२०
मार्कण्डेय़ उवाच
ऐरावतस्य घण्टे द्वे वैजय़न्त्याविति श्रुते |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
ऐरावताः सौरभेय़ा वैशालेय़ाश्च भोगिनः |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
ऐरावतेन सा दत्ता अनपत्या महात्मना |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९७
नारद उवाच
ऐरावतो नागराजो वामनः कुमुदोऽञ्जनः |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९७
नारद उवाच
ऐरावतोऽस्मात्सलिलं गृहीत्वा जगतो हितः |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
ऐल इत्यभिविख्यातः स्वर्गं प्राप्तो महीपतिः ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७४
भीष्म उवाच
ऐलकश्यपसंवादं तं निवोध युधिष्ठिर ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
ऐलवंश्यास्तु ये राजंस्तथैवेक्ष्वाकवो नृपाः |
५ क
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
ऐलस्येक्ष्वाकुवंशस्य प्रकृतिं परिचक्षते |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
ऐलो नलश्च राजर्षिर्मनुश्चैव प्रजापतिः ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
ऐश्वरेण प्रय़ोगेण द्वितीय़ां तनुमास्थितः ||
४३ ग
शल्य पर्व
अध्याय ६०
दुर्योधन उवाच
ऐश्वर्यं चोत्तमं प्राप्तं को नु स्वन्ततरो मय़ा ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७०
वृत्र उवाच
ऐश्वर्यं तपसा प्राप्तं भ्रष्टं तच्च स्वकर्मभिः |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७७
भीष्म उवाच
ऐश्वर्यं तेऽभिजाय़न्ते जाय़मानाः पुनः पुनः ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
ऐश्वर्यं प्रति सङ्घर्षस्त्रैलोक्ये सचराचरे ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय ४
धौम्य उवाच
ऐश्वर्यं प्राप्य दुष्प्रापं प्रिय़ं प्राप्य च राजतः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
ऐश्वर्यं प्रिय़संवासो गृध्येदेषु न पण्डितः ||
४५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३०७
युधिष्ठिर उवाच
ऐश्वर्यं वा महत्प्राप्य धनं वा भरतर्षभ |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३७
व्रह्मो उवाच
ऐश्वर्यं विग्रहः सन्धिर्हेतुवादोऽरतिः क्षमा ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७०
वृत्र उवाच
ऐश्वर्यं वै महद्व्रह्मन्कस्मिन्वर्णे प्रतिष्ठितम् |
३१ क
सभा पर्व
अध्याय ४५
धृतराष्ट्र उवाच
ऐश्वर्यं हि महत्पुत्र त्वय़ि सर्वं समर्पितम् |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६७
गान्धार्यु उवाच
ऐश्वर्यकाम दुष्टात्मन्वृद्धानां शासनातिग |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६७
गान्धार्यु उवाच
ऐश्वर्यजीविते हित्वा पितरं मां च वालिश ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
ऐश्वर्यधनरत्नानां प्रत्यमित्रेऽपि तिष्ठताम् |
१७२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ऐश्वर्यभूतः प्राणानामुत्सर्गे निय़तो ह्यहम् |
९८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
ऐश्वर्यमतुलं श्रेष्ठं पुमान्स्त्री वाभिजाय़ते ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
ऐश्वर्यमदपापिष्ठा मदाः पानमदादय़ः |
५१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७२
भीमसेन उवाच
ऐश्वर्यमदमत्तश्च कृतवैरश्च पाण्डवैः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
नारद उवाच
ऐश्वर्यमदमत्तांश्च मत्तान्मद्यमदेन च |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
ऐश्वर्यमदमत्तो हि नापतित्वा विवुध्यते ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय १७७
सर्प उवाच
ऐश्वर्यमदमत्तोऽहमवमन्य ततो द्विजान् |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३८
विदुर उवाच
ऐश्वर्यमदसंमूढं वलिं लोकत्रय़ादिव ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७७
वासुदेव उवाच
ऐश्वर्यमदसंमूढो नैष दुःखमुपेय़िवान् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
ऐश्वर्यमिच्छता नित्यं पुरुषेण वुभूषता ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२७
धृतराष्ट्र उवाच
ऐश्वर्यलोभादैश्वर्यं जीवितं च प्रहास्यति ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
ऐश्वर्याच्चैव कामानामीश्वरः पुनरुच्यते |
७४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
ऐश्वर्याच्चैव कामानामीश्वरः पुनरुच्यते ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
ऐश्वर्याच्च्याविताञ्ज्ञात्वा कालेन महता नृप ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
ऐश्वर्याणि च तत्रस्थो ददावीशः पृथक्पृथक् |
९० क
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
ऐश्वर्याणि हि सर्वाणि देवगन्धर्वरक्षसाम् |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
ऐश्वर्याद्भ्रंशिताश्चापि सम्वभूवुः क्षिताविह ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
ऐश्वर्ये वरुणो राजा ता मां पान्तु युगन्धराः ||
३० ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
ऐश्वर्ये वर्तता चैव साङ्ख्ययोगविदा तथा |
३३ क