अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
वसिष्ठ उवाच
ऐश्वर्ये वारुणे राम रुद्रस्येशस्य वै प्रभो ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
ऐषीकं पर्व निर्दिष्टमत ऊर्ध्वं सुदारुणम् |
६१ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
ऐहलौकिकमीहन्ते मांसशोणितवर्धनम् ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
ऐहलौकिकमीहन्ते मांसशोणितवर्धनम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१८१
वैशम्पाय़न उवाच
ऐहलौकिकमेवैतदुताहो पारलौकिकम् |
८ क