भीष्म पर्व
अध्याय
३९
श्रीभगवानु उवाच
ओं तत्सदिति निर्देशो व्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
ओघमेघस्वनः काले प्रगृह्य विपुलं भुजम् ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३८
धृतराष्ट्र उवाच
ओघमेघस्वनः काले यत्कृष्णः कर्णमव्रवीत् |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
ओघमेघस्वनो वाग्मी काले वचनमव्रवीत् ||
२५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
ओघवत्यपि राजेन्द्र वसिष्ठेन महात्मना |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
ओघवांश्च महाराज वृहन्तः सहितो रणे |
४१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४४
व्रह्मो उवाच
ओङ्कारः सर्ववेदानां वचसां प्राण एव च |
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५३
वासुदेव उवाच
ओङ्कारप्रभवान्वेदान्विद्धि मां त्वं भृगूद्वह |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
ओङ्कारमादितः कृत्वा मम देवी सरस्वती ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
ओङ्कारमुद्गिरन्वक्त्रात्सावित्रीं च तदन्वय़ाम् ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
ओङ्कारश्च मुखे राजन्नतिशोभाकरोऽभवत् ||
८२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
वसिष्ठ उवाच
ओङ्कारश्चावसन्नेत्रे निग्रहप्रग्रहौ तथा ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
ओङ्कारस्त्वथ संस्कारो विद्युज्जिह्वा च निर्मिता ||
४७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०६
सुपर्ण उवाच
ओङ्कारस्यात्र जाय़न्ते सूतय़ो दशतीर्दश |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
ओङ्कारेण यथान्याय़ं सम्यगुच्चारितेन च |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय
७८
शर्मिष्ठो उवाच
ओजसा तेजसा चैव दीप्यमानं रविं यथा |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१४
सूत उवाच
ओजसा तेजसा चैव विक्रमेणाधिकौ सुतौ ||
८ ग
वन पर्व
अध्याय
१८५
मार्कण्डेय़ उवाच
ओजसा तेजसा लक्ष्म्या तपसा च विशेषतः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
ओजस्तेजो द्युतिधरः प्रकाशात्मा प्रतापनः |
४३ क
वन पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
ओजस्तेजोद्युतिहरं प्रस्वापनमरातिहन् ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६५
मान्धातो उवाच
ओड्राः पुलिन्दा रमठाः काचा म्लेच्छाश्च सर्वशः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
स्यूमरश्मिरु उवाच
ओमिति व्रह्मणो योनिर्नमः स्वाहा स्वधा वषट् |
३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२६
व्राह्मण उवाच
ओमित्येकाक्षरं व्रह्म ते श्रुत्वा प्राद्रवन्दिशः ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३०
श्रीभगवानु उवाच
ओमित्येकाक्षरं व्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
ओमित्येवं वसिष्ठोऽपि भारतान्प्रत्यपद्यत ||
३८ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
ओषधान्यगदादीनी नानाविद्याश्च सर्वशः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६१
स्यूमरश्मिरु उवाच
ओषधिभ्यो वहिर्यस्मात्प्राणी कश्चिन्न विद्यते |
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
ओषधीं वीर्यसम्पन्नां विशल्यश्चाभवत्तदा ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
ओषधीः क्षीरसम्पन्ना नगान्पुष्पफलान्वितान् |
६९ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
ओषधीनां क्षय़े जाते प्राणिनामपि सङ्क्षय़ः |
५९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
ओषधीनां पतिः सोमो विष्णुर्वलवतां वरः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५५
तुलाधार उवाच
ओषधीभिस्तथा व्रह्मन्यजेरंस्ते नतादृशाः |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
ओषधीर्दीप्यमानाश्च जगृहातेऽश्विनावपि |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
ओषधीर्विविधास्तत्र नानापुष्पफलोद्गमाः ||
७० ग
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
ओषध्यः परिवर्तेरन्यथैव सततं प्रजाः ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
स्यूमरश्मिरु उवाच
ओषध्यः पशवो वृक्षा वीरुदाज्यं पय़ो दधि |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११४
भीष्म उवाच
ओषध्यः पादपा गुल्मा न ते यान्ति पराभवम् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
ओषध्यः षड्रसा मेध्यास्तदन्नं प्राणिनां भुवि ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३८
वासुदेव उवाच
ओषध्यः सर्ववीजानि सर्वरत्नानि वीरुधः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
वसुहोम उवाच
ओषध्यस्तेजसस्तस्मादोषधिभ्यश्च पर्वताः |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२७
भीष्म उवाच
ओषध्यो ज्वलमानाश्च द्योतय़न्ति स्म तद्वनम् ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
ओषध्यो रक्तपुष्पाश्च कटुकाः कण्टकान्विताः |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
ओषध्यो वहुवीर्याश्च वहुरूपास्तथैव च ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
ओषध्यो वीरुधश्चापि पशवो मृगपक्षिणः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
ओषध्यो ह्यमृतं सर्वं विषं तेजोऽग्निसम्भवम् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
ओष्ट्राः पुण्ड्राः ससैरन्ध्राः पार्वतीय़ाश्च मारिष |
५६ क