शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
औजसं नाम तत्तीर्थं यत्र पूर्वमपां पतिः |
९२ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
औजसं वरुणं तीर्थं दीप्यते स्वेन तेजसा |
१४३ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
औजसस्य तु पूर्वेण कुरुतीर्थं कुरूद्वह |
१४४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
औड्रश्च दण्डधारश्च वृहत्सेनश्च वीर्यवान् |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
औतथ्यो वेदमत्रैव षडङ्गं प्रत्यधीय़त ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
औत्तङ्कीं गुरुवृत्तिं वै प्राप्नुय़ामिति भारत ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०
भीम उवाच
औदकाः सृष्टय़श्चैव जन्तवः सिद्धिमाप्नुय़ुः |
२७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
औदकानि च सत्त्वानि श्वापदानि वय़ांसि च ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
औदकानि च सर्वाणि प्रवक्ष्याम्यनुपूर्वशः ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
औदुम्वरा दुर्विभागाः पारदा वाह्लिकैः सह ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
औदुम्वरे समासीनमासने क्षौमसंवृतम् |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
औद्दालकं महाराज तीर्थं मुनिनिषेवितम् |
१४० क
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
औद्दालकेन यजता पूर्वं ध्याता सरस्वती ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
औद्दालकेस्तथा यज्ञे यजतस्तत्र भारत |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३४
भीष्म उवाच
औद्भिज्जा जन्तवः केचिद्युक्तवाचो यथा तथा |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
औद्भिदं प्रथमं वर्षं द्वितीय़ं वेणुमण्डलम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
औद्भिदाः स्वेदजाश्चैव अण्डजाश्च जराय़ुजाः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
औपकाश्च कलिङ्गाश्च किरातानां च जातय़ः ||
६७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
औपपत्तिकमाहारं प्रय़च्छस्वेति भारत ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६३
नारद उवाच
औरभ्रमुत्तराय़ोगे यस्तु मांसं प्रय़च्छति |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११३
वृहस्पतिरु उवाच
औरसेन वलेनान्नमर्जय़ित्वाविहिंसकः |
१८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
६
युधिष्ठिर उवाच
औरसो भवतः पुत्रो युय़ुत्सुर्नृपसत्तम |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०४
भीष्म उवाच
और्जस्थ्यं विजय़ेदेवं सङ्गृह्णन्साधुसंमतान् |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
और्णं च राङ्कवं चैव कीटजं पट्टजं तथा ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
और्ध्वदेहिकधर्माणामासीद्युक्तो विचिन्तने ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७०
गन्धर्व उवाच
और्व दृष्टः प्रभावस्ते तपसोग्रस्य पुत्रक |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
५०
आस्तीक उवाच
और्वत्रिताभ्यामसि तुल्यतेजा; दुष्प्रेक्षणीय़ोऽसि भगीरथो वा ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
और्वस्तस्यां समभवदूरुं भित्त्वा महाय़शाः |
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
और्वस्यासीत्पुत्रशतं जमदग्निपुरोगमम् |
४८ क
वन पर्व
अध्याय
२९९
वैशम्पाय़न उवाच
और्वेण वसता छन्नमूरौ व्रह्मर्षिणा तदा |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५६
च्यवन उवाच
और्वो नाम महातेजा ज्वलनार्कसमद्युतिः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०१
भीष्म उवाच
औशिजश्चैव कक्षीवान्नलश्चाङ्गिरसः सुताः ||
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
औशीनरः पुण्डरीकः शर्यातिः शरभः शुचिः |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
औशीनर्यामजनय़त्काक्षीवादीन्सुतानृषिः ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
औषधं जगतः सेतुः सत्यधर्मपराक्रमः ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय
५८
वृहदश्व उवाच
औषधं सर्वदुःखेषु सत्यमेतद्व्रवीमि ते ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
औषधानि च सर्वाणि मूलानि च फलानि च |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५५
भीष्म उवाच
औषधान्यगदादीनि तिस्रो विद्याश्च संस्कृताः |
४ क
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
औषधैर्वा तथा युक्तैरुत वा माय़या यय़ा |
६ क
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
औष्णीषाननिवासांश्च वाहुकान्पुरुषादकान् ||
१५ ख