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उद्योग पर्व
अध्याय ५
वासुदेव उवाच
कृते विवाहे मुदिता गमिष्यामो गृहान्प्रति ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय २८१
यम उवाच
कृतेन कामेन नराधिपात्मजे; निवर्त दूरं हि पथस्त्वमागता ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय २८१
यम उवाच
कृतेन कामेन मय़ा नृपात्मजे; निवर्त गच्छस्व न ते श्रमो भवेत् ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय १८५
वैशम्पाय़न उवाच
कृतेन सज्येन हि कार्मुकेण; विद्धेन लक्ष्येण च संनिसृष्टा |
२४ क
वन पर्व
अध्याय ७६
नल उवाच
कृतेऽपि च न मे कोपः क्षन्तव्यं हि मय़ा तव ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
कृतेऽपि यत्ने महति तत्र वोद्धव्यमात्मना ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
कृतेऽवहारे तैर्वीरैः सैनिकाः सर्व एव ते |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
कृतेऽवहारे सैन्यानां प्रथमे भरतर्षभ |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय २२
धृतराष्ट्र उवाच
कृतेऽवहारे सैन्यानां प्रवृत्ते च रणे पुनः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
कृतेय़ं हि विजिज्ञासा मुक्तो नेति त्वय़ा मम |
७० ख
सभा पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
कृतैरावसथैर्दिव्यैर्विमानप्रतिमैस्तथा |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
कृतैरावसथैर्नित्यं सप्रेष्यैः सपरिच्छदैः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
कृतैरावसथैर्हृद्यैः सप्रेष्यैः सपरिच्छदैः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
कृतो देवैश्च राजेन्द्र पुनरुत्थापितस्तदा |
८२ क
वन पर्व
अध्याय २६८
मार्कण्डेय़ उवाच
कृतो निर्वानरो भूय़ः प्राकारो भीमदर्शनैः ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय १२३
लोमश उवाच
कृतो भवद्भ्यां वृद्धः सन्भार्यां च प्राप्तवानिमाम् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
कृतो महान्महाराज पुत्राणां ते जनक्षय़ः ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय ४०
अर्जुन उवाच
कृतो मय़ा यदज्ञानाद्विमर्दोऽय़ं त्वय़ा सह |
६० क
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
कृतो यत्नो महांस्तत्र शमः स्यादिति भारत |
४१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८९
भीष्म उवाच
कृतो यत्नो मय़ा देवि पुत्रार्थे तपसा महान् |
७ क
सभा पर्व
अध्याय ४३
दुर्योधन उवाच
कृतो यत्नो मय़ा पूर्वं विनाशे तस्य सौवल |
३३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५२
वासुदेव उवाच
कृतो यत्नो मय़ा व्रह्मन्सौभ्रात्रे कौरवान्प्रति |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय ६९
वैशम्पाय़न उवाच
कृतो लोकपरोक्षोऽय़ं सम्वन्धो वै त्वय़ा सह |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
कृतो ह्यनार्यैरस्माभी राज्यार्थे लघुवुद्धिभिः ||
४७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
कृतोदकं तु राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम् |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
कृतोदकं तु राजानं धृतराष्ट्रं युधिष्ठिरः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ११८
वैशम्पाय़न उवाच
कृतोदकांस्तानादाय़ पाण्डवाञ्शोककर्शितान् |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
कृतोदकार्यजप्यः स हुताग्निः समलङ्कृतः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
कृतोदकास्ते सुहृदां सर्वेषां पाण्डुनन्दनाः |
१ क
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
कृतोद्देशश्च वीभत्सुः पञ्चमीमभितः समाम् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १०५
वैशम्पाय़न उवाच
कृतोद्वाहस्ततः पाण्डुर्वलोत्साहसमन्वितः |
७ क
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
कृतोपकारं मां नूनमवमन्याल्पय़ा धिय़ा ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
कृतोपकारभूय़िष्ठं यशस्वि च मनस्वि च ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१३
जनक उवाच
कृतोपनय़नस्तात भवेद्वेदपराय़णः ||
१४ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
कृतोपवासाः कौरव्य प्रय़युः प्राङ्मुखास्ततः ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय ३२
व्रह्मो उवाच
कृतोऽत्र परिहारश्च पूर्वमेव भुजङ्गम |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६
व्यास उवाच
कृतोऽभिसन्धिर्यज्ञाय़ भवतो वचनाद्गुरो ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
कृतोऽवभेदेन ममोरुमेत्य; प्रविश्य कीटस्य तनुं विरूपाम् |
५ क
विराट पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
कृतोऽस्माभिः परो यत्नस्तेषामन्वेषणे सदा |
९ क
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
कृतोऽय़ं कुलसङ्कल्पः क्षत्रिय़ैर्वसुधाधिप |
३ क
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
कृत्तिकाभ्युपपत्तेश्च कार्त्तिकेय़ इति स्मृतः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
कृत्तिकामघय़ोश्चैव तीर्थमासाद्य भारत |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
कृत्तिकाश्चास्य नक्षत्रमसेरग्निश्च दैवतम् |
८० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
कृत्तिकाश्चोदय़ामासुरपत्यभरणाय़ वै ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
कृत्तिकासु ग्रहस्तीव्रो नक्षत्रे प्रथमे ज्वलन् |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६३
नारद उवाच
कृत्तिकासु महाभागे पाय़सेन ससर्पिषा |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
कृत्तिकाय़ोगय़ुक्तेन पौर्णमास्यामिवेन्दुना ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
कृत्तिवासाः स्तुतः कृष्ण तण्डिना शुद्धवुद्धिना ||
१६३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
कृत्तोत्तमाङ्गास्ते राजन्भल्लैः शतसहस्रशः |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
कृत्यं मृगय़से कर्तुं सुखोपाय़मसंशय़म् ||
१४१ ख