शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
सहस्रं परिवृत्तं तद्व्राह्मं दिवसमुच्यते ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रं प्रददौ कृष्णो गवामय़ुतमेव च ||
४१ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रं यत्र पद्मानां कण्वाय़ भरतो ददौ ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०१
भीष्म उवाच
सहस्रं यश्च दिव्यानां युगानां पर्युपासिता ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
कृप उवाच
सहस्रं रथसिंहानां द्विसाहस्रं च दन्तिनाम् |
१०२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९४
भीष्म उवाच
सहस्रं रथिनामेकमेष भागो मतो मम ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
११५
अकृतव्रण उवाच
सहस्रं वाजिनां शुल्कमिति विद्धि द्विजोत्तम ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
११५
अकृतव्रण उवाच
सहस्रं वाजिनामेकं शुल्कार्थं मे प्रदीय़ताम् ||
१५ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
सहस्रं वातवेगानां भिक्षे त्वां देवसत्तम ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रं वारणान्हैमान्दक्षिणामत्यकालय़त् ||
६६ ख
सभा पर्व
अध्याय
६१
कश्यप उवाच
सहस्रं वारुणान्पाशानात्मनि प्रतिमुञ्चति ||
६७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
सहस्रं वासुदेवस्य नाम्नामेतत्प्रकीर्तय़ेत् ||
१२५ ख
वन पर्व
अध्याय
१७७
सर्प उवाच
सहस्रं हि द्विजातीनामुवाह शिविकां मम ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९
भीष्म उवाच
सहस्रकिरणस्येव सवितुर्धरणीतले ||
२० ख
विराट पर्व
अध्याय
३८
उत्तर उवाच
सहस्रकोटि सौवर्णाः कस्यैतद्धनुरुत्तमम् ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७५
भगवानु उवाच
सहस्रगुणमप्येतत्त्वय़ि सम्भावय़ाम्यहम् ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
भीष्म उवाच
सहस्रगुणमाप्नोति गुणार्हाय़ प्रदाय़कः ||
३७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
सहस्रचन्द्रं विपुलं गृहीत्वा चर्म संय़ुगे |
४९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रचित्य इत्युक्तः शतय़ूपपितामहः ||
६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रचित्यो धर्मात्मा प्रविवेश वनं नृपः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
सहस्रजिच्च राजर्षिः प्राणानिष्टान्महाय़शाः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
सहस्रदक्षिणानां च या गतिस्तामवाप्नुहि ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
सहस्रधा वधूं दृष्ट्वा रुदतीं शोककर्शिताम् ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रनिष्कमेकैकं वाचय़ामास पाण्डवः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
सहस्रनेत्रपादाय़ नमोऽसङ्ख्येय़कर्मणे ||
५७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
सहस्रनेत्रप्रतिमप्रभावं; दिवीव सूर्यं जलदव्यपाय़े ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
सहस्रनेत्रप्रतिमानकर्मणः; सहस्रपत्रप्रतिमाननं शुभम् |
३७ क
वन पर्व
अध्याय
२६
मार्कण्डेय़ उवाच
सहस्रनेत्रप्रतिमो महात्मा; मय़स्य जेत नमुचेश्च हन्ता |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
सहस्रनेत्राशनितुल्यतेजसं; समानक्रव्यादमिवातिदुःसहम् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
सहस्रनय़नः श्रीमाञ्शतशीर्षः सहस्रपात् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
सहस्रनय़नश्चापि वज्री शम्वरपाकहा |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रपत्रमर्काभं दिव्यं पद्ममुदावहत् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
सहस्रपत्रे द्युतिमानुपविष्टः सनातनः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
सहस्रपरिवेष्टारस्तथैव च सहस्रदाः |
९४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
सहस्रपादं प्रासादं स्वप्नान्ते स्म युधिष्ठिरः |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
सहस्रभुजजिह्वाक्षमुद्गिरन्तमिवानलम् ||
१२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
सहस्रभुजभृच्छ्रीमान्कार्तवीर्योऽभवत्प्रभुः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
सहस्रमश्वा एकैकं हस्तिनं पृष्ठतोऽन्वय़ुः |
६० क
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
सहस्रमश्वांश्च पुनश्च सादी; नष्टौ सहस्राणि च पत्तिवीरान् ||
३० ग
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
सहस्रमिव सूर्याणां दीप्यमानं स्वतेजसा |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
सहस्रमिव सूर्याणां सर्वमावृत्य तिष्ठति ||
१११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
सहस्रमूर्धा देवेन्द्रः सर्वदेवमय़ो गुरुः |
१२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
सहस्रमूर्धा विश्वात्मा सहस्राक्षः सहस्रपात् ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
सहस्रमृषय़श्चासन्ये वै तत्र समागताः |
३९ ख
विराट पर्व
अध्याय
१७
द्रौपद्यु उवाच
सहस्रमृषय़ो यस्य नित्यमासन्सभासदः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
सहस्रमेकं वर्षाणां ततः कलिय़ुगं स्मृतम् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
सहस्रमेकं श्लोकानां पञ्च श्लोकशतानि च |
२१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
सहस्ररश्मिप्रतिमः परेषां भय़मादधत् |
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
सहस्ररश्मिर्दिनसङ्क्षय़े यथा; तथापतत्तस्य शिरो वसुन्धराम् ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
सहस्रवाहवे चैव सहस्रचरणाय़ च ||
२८ ख