विराट पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
नदीकुञ्जेषु तीर्थेषु ग्रामेषु नगरेषु च |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
नदीगतमदीनात्मा प्राप्तो विनशनं तदा ||
५३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
नदीजलप्रतिच्छन्नः पर्वतैश्चाभ्रसंनिभैः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
नदीजालसमाकीर्णान्नानापक्षिरुताकुलान् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
२०४
नारद उवाच
नदीतीरेषु जातान्सा कर्णिकारान्विचिन्वती |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
नदीतीरेषु रम्येषु सरत्सु च विशां पते |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
नदीद्वीपप्रदेशेषु वैडूर्यसिकतासु च |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
नदीनदान्भूरिजलो महार्णवो; यथा तथा तान्समरेऽर्जुनोऽग्रसत् ||
५३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६
धृतराष्ट्र उवाच
नदीनां पर्वतानां च नामधेय़ानि सञ्जय़ |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२७
व्राह्मण उवाच
नदीनां सङ्गमस्तत्र वैतानः समुपह्वरे |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
नदीनां सङ्गमे ग्रामाददूरे स किलावसत् ||
४१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
नदीपर्वतजालैश्च सर्वतः परिभूषितम् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
नदीपुलिनशाय़ी च नदीतीररतिश्च यः ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
नदीमाश्रमसंश्लिष्टां पुण्यतोय़ां ददर्श सः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
नदीमाश्रमसम्वद्धां दृष्ट्वाश्रमपदं तथा |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९२
अग्निरु उवाच
नदीमासाद्य कुर्वीत पितॄणां पिण्डतर्पणम् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
नदीमुत्तीर्य वेगेन कुरून्विद्राव्य पाण्डवः ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०६
मुनिरु उवाच
नदीवन्धविरोधांश्च वलवद्भिर्विरुध्यताम् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
नदीविषय़पर्यन्ते पर्वतस्य समीपतः |
३५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
नदीवेगादिवारुग्णस्तीरजः पादपो महान् ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
नदीशतानां पञ्चानां मध्ये चक्रे समाप्लवम् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
नदीशैवलदिग्धाङ्गं हरिश्मश्रुजटाधरम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
नदीश्च वहुलावर्ता नीलवैडूर्यसंनिभाः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
नदीषु मार्गेषु सदा सङ्क्रमानवसादय़ेत् |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय
१०२
वैशम्पाय़न उवाच
नदीषु वनखण्डेषु वापीपल्वलसानुषु |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११
भीष्म उवाच
नदीषु हंसस्वननादितासु; क्रौञ्चावघुष्टस्वरशोभितासु ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
नदीष्वपातय़द्राजन्मघवा लोकपूजितः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
नदीष्वापो यथा युक्ता यथा सूर्ये मरीचय़ः |
४० क
आदि पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
नदूरे नगरं मन्ये वनादस्मादहं प्रभो |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
नद्यः पुण्यजलास्तत्र गङ्गा च वहुधागतिः ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
नद्यः शैलाः समुद्राश्च तीर्थानि विविधानि च ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
भीष्म उवाच
नद्यः सङ्क्षिप्ततोय़ौघाः क्वचिदन्तर्गताभवन् ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२७
व्राह्मण उवाच
नद्यश्च सरितो वारि वहन्त्यो व्रह्मसम्भवम् ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
नद्यश्च सुमहावेगाः प्रतिस्रोतोवहाभवन् ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
नद्यां यथा चेह काष्ठमुह्यमानं यदृच्छय़ा |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
नद्याः पुलिनमासाद्य सूक्ष्मकाञ्चनवालुकम् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
नद्यास्तीरे हिरण्वत्याः समास्तिस्रोऽभवद्रणः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५३
भीष्म उवाच
नद्युपस्पर्शनरतः साय़ं प्रातर्महातपाः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
नद्यो नदा द्रुमाश्चैव तथैवाप्सरसां गणाः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
नद्यो नदास्तडागाश्च सर्वप्रस्रवणानि च ||
१६८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
नद्यो वीथ्यः सभा वापी दीर्घिकाश्चैव सर्वशः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
१०६
वैशम्पाय़न उवाच
ननन्द माता कौसल्या तमप्रतिमतेजसम् |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
ननन्दतुः शय़नगतौ वपुर्धरौ; श्रिय़ा युतौ द्विजवरदत्तय़ा तय़ा ||
६८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
ननर्त चैवातिवलो महात्मा; वृत्रं निहत्येव सहस्रनेत्रः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५५
सञ्जय़ उवाच
ननर्त हर्षसंवीतो वातोद्धूत इव द्रुमः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
ननर्तेव रथोपस्थे विधुन्वानो महद्धनुः ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
ननर्द वहुधा राजन्हृष्टश्चासीत्परन्तपः |
८८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
ननाद च महानादं तर्जय़न्पाण्डवं रणे ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४६
सञ्जय़ उवाच
ननाद च महानादं पूरय़न्वसुधातलम् ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
ननाद च महानादं प्रवरः सर्वधन्विनाम् ||
२३ ग