स्त्री पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
सह पाञ्चालय़ोषिद्भिर्यास्तत्रासन्समागताः ||
४ ख
विराट पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
सह पुत्रेण मत्स्यस्य प्रहृष्टो भरतर्षभः ||
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२२
धृतराष्ट्र उवाच
सह पुत्रैः पाण्डवार्थे च शश्व; द्युधिष्ठिरं भक्त इति श्रुतं मे ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९४
कर्ण उवाच
सह पुत्रैर्महावीर्यैस्तावदेवाशु विक्रम ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
११६
वैशम्पाय़न उवाच
सह पुत्रैस्ततः कुन्ती माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
२८०
मार्कण्डेय़ उवाच
सह भर्त्रा हसन्तीव हृदय़ेन विदूय़ता ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
सह भीष्मेण सर्वेषां प्रापतन्हृदय़ानि नः ||
८३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
सह भुक्त्वा च पीत्वा च प्रतिय़ान्तु यथागृहम् ||
३५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
सह भूतगणान्भुङ्क्ते भूतभव्यभवत्प्रभुः ||
४५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
सह भ्रातृभिरासीनं पर्यपृच्छदनामय़म् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
सह मत्स्यैर्महावीर्यैस्तदद्भुतमिवाभवत् ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४१
वैशम्पाय़न उवाच
सह मात्रा तु ददृशुर्हिडिम्वामग्रतः स्थिताम् ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
सह मात्रा प्रदग्धुं तान्वालकान्वारणावते |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४५
भीष्म उवाच
सह मात्रा महाराज प्रसाद्य तमृषिं तदा |
३५ क
विराट पर्व
अध्याय
४४
कृप उवाच
सह युध्यामहे पार्थमागतं युद्धदुर्मदम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
सह राजर्षिभिः सर्वैः स्तुवानो वृषकेतनम् ||
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
सह वृद्धैस्तु संमन्त्र्य क्षिप्रं योजय़ वाहिनीम् ||
२१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
सह वृष्ण्यन्धकव्याघ्रैरुपासां चक्रिरे तदा ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
सह वृष्ण्यन्धकैः सर्वैर्भोजैश्च शतशस्तथा ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३६
वैशम्पाय़न उवाच
सह सर्वैः सुतै राजंस्तस्मिन्नेव निवेशने |
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
सह सर्वैर्महीपालैः प्रत्यव्यूहत पाण्डवान् ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
सह सर्वैर्महीपालैरिदं वचनमव्रवीत् ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
सह सर्वैस्तथा म्लेच्छैः सागरानूपवासिभिः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
सह सात्यकिना कृष्णः समास्थाय़ान्वय़ात्कुरून् ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
सह सात्यकिना शौरिरर्जुनस्य निवेशनम् |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
सह स्त्रीभिर्निववृते दासीदाससमावृता ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
सह स्त्रीभिर्महाराज पश्यतो मेऽद्भुतोपमम् ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९१
भीष्म उवाच
सहः कृतिर्विपाप्मा च पुण्यकृत्पावनस्तथा |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
सहः शस्त्रनिपातानामग्निस्पर्शस्य चानघ |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५४
भीष्म उवाच
सहकारान्प्रफुल्लांश्च केतकोद्दालकान्धवान् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
सहजं कर्म कौन्तेय़ सदोषमपि न त्यजेत् |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
सहजं कवचं चैव मोहितो देवमाय़या ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०४
वैशम्पाय़न उवाच
सहजं कवचं विभ्रत्कुण्डलोद्द्योतिताननः |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
सहजं कवचं विभ्रत्कुण्डलोद्द्योतिताननः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
सहजं कवचं विभ्रत्कुण्डलोद्द्योतिताननः ||
८२ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
सहजं कार्त्तिकेय़स्य वह्नेस्तेजः परं मतम् ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
सहजं चिरकारित्वं चिरप्राज्ञतय़ा तव |
५३ क
वन पर्व
अध्याय
२९४
वैशम्पाय़न उवाच
सहजं वर्म मे विप्र कुण्डले चामृतोद्भवे |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
७२
भीमसेन उवाच
सहजश्चेदिमत्स्यानां प्रचेतानां वृहद्वलः |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय
३
युधिष्ठिर उवाच
सहदेव कथं तस्य समीपे विहरिष्यसि |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवं च दुर्धर्ष सर्वान्नस्त्रातुमर्हसि ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
सहदेवं च निर्जित्य शरैः संनतपर्वभिः |
७० क
उद्योग पर्व
अध्याय
७८
नकुल उवाच
सहदेवं च मां चैव त्वां च रामं च केशव ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
सहदेवं च सप्तत्या परीप्सन्पितरं रणे ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
सहदेवं ततः क्रुद्धं दहन्तं तव वाहिनीम् |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
सहदेवं तथा दृष्ट्वा भीमसेनः प्रतापवान् |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
सहदेवं तथा यान्तं कृपः शारद्वतोऽभ्ययात् |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
सहदेवं तथा यान्तं यत्तं भीष्मरथं प्रति |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
सहदेवं तथाय़ान्तं दुर्मुखः शत्रुकर्शनः |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवं तदा सद्यो मन्त्रिणं कुरुसत्तमः ||
३९ ख