वन पर्व
अध्याय
२७२
मार्कण्डेय़ उवाच
इत्युक्तः स तथेत्युक्त्वा रथमास्थाय़ दंशितः |
८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तथेत्येव प्राह धर्मात्मजो नृपम् |
३६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
व्राह्मण उवाच
इत्युक्तः स तदा कृष्ण मय़ा शिष्यो महातपाः |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स तदा तूष्णीमभूद्वाय़ुस्ततोऽव्रवीत् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स तदा तूष्णीमभूद्वाय़ुस्ततोऽव्रवीत् |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३८
वाय़ुरु उवाच
इत्युक्तः स तदा तूष्णीमभूद्वाय़ुस्तमव्रवीत् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स तदा तेन तुलाधारेण धीमता |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भृगुरु उवाच
इत्युक्तः स तदा तेन सर्पो भूत्वा पपात ह |
२३ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तदा दूतः पाण्डुपुत्रेण धीमता |
५३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स तदा देवैरगस्त्यः कुपितोऽभवत् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स तदा देव्या विप्रः प्रोवाच धर्मवित् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०४
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स तदा राजन्व्रह्मस्वार्थे परन्तप |
२८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तदा राजा व्यासेनाद्भुतकर्मणा |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३२
व्राह्मण उवाच
इत्युक्तः स तदा राजा व्राह्मणेन यशस्विना |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तदा राज्ञा क्षमं वुद्धिमता हितम् |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
वासुदेव उवाच
इत्युक्तः स तदा शिष्यो गुरुणा धर्ममुत्तमम् |
४२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३०
व्राह्मण उवाच
इत्युक्तः स तपो घोरं जामदग्न्यः पितामहैः |
३१ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तु कौन्तेय़ः कालः काल इति व्रुवन् |
४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तु गान्धार्या कुन्तीमिदमुवाच ह |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११८
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स तु तं प्राह कुतः कीट सुखं तव |
१४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तु तं प्राह व्यासो धर्मभृतां वरः |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८६
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तु तच्चक्रे भीमो नृपतिशासनम् |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तु तेजस्वी व्यासेनामिततेजसा |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स तु देवेशः प्रतिपूज्य गिरेः सुताम् |
५६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तु धर्मात्मा कुरुराजो युधिष्ठिरः |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८२
अर्जुन उवाच
इत्युक्तः स तु पुत्रेण तदा वानरकेतनः |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९४
मन्त्रिणः ऊचुः
इत्युक्तः स तु भृत्यैस्तैर्वृषादर्भिश्चुकोप ह |
३८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स तु राजेन्द्र कृष्णद्वैपाय़नोऽव्रवीत् |
१४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
इत्युक्तः स तु विप्रर्षिरनुज्ञातो महात्मना |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
नकुल उवाच
इत्युक्तः स तय़ा सक्तून्प्रगृह्येदं वचोऽव्रवीत् |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स द्विजः प्राह तथास्त्विति नराधिपम् |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
इत्युक्तः स द्विजश्रेष्ठो व्यासशिष्यः प्रतापवान् |
३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स नृपो देव्या पाञ्चाल्या भरतर्षभ |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२०४
मार्कण्डेय़ उवाच
इत्युक्तः स प्रविश्याथ ददर्श परमार्चितम् |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
इत्युक्तः स महातेजाः शुकः पित्रा महात्मना |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९६
इन्द्र उवाच
इत्युक्तः स महेन्द्रेण तपस्वी कोपनो भृशम् |
५० क
वन पर्व
अध्याय
१८८
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स मुनिश्रेष्ठः पुनरेवाभ्यभाषत |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३५
वासुदेव उवाच
इत्युक्तः स मुनिश्रेष्ठैर्यदाह प्रपितामहः |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स मुनिस्तेन राज्ञा हृष्टेन तद्वचः |
२८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
व्राह्मण उवाच
इत्युक्तः स मय़ा शिष्यो मेधावी मधुसूदन |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
इत्युक्तः स मय़ा श्रीमान्देवदेवो महाद्युतिः |
१२९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
व्यास उवाच
इत्युक्तः स वचस्तस्य चक्रे कारन्धमात्मजः |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स वसिष्ठेन जामदग्न्यः प्रतापवान् |
६८ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तः स सरस्वत्याः कुञ्जे वै जनमेजय़ |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
इत्युक्तः स सुरेन्द्रेण ततो देवपुरोहितः |
५१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८९
युधिष्ठिर उवाच
इत्युक्तः स हृषीकेशो ध्यात्वा सुमहदन्तरम् |
६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४५
नारद उवाच
इत्युक्तः सञ्जय़ेनेदं पुनराह स पार्थिवः |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
इत्युक्तः समनुज्ञातो राजर्षिरभिवाद्य तम् |
६४ क
आदि पर्व
अध्याय
१६३
गन्धर्व उवाच
इत्युक्तः सविता तेन ददानीत्येव निश्चितः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५४
भीष्म उवाच
इत्युक्तः सहभार्यस्तमभ्यगच्छन्महामुनिम् |
३१ क