द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
कौरवांश्च महावाहुः कुन्त्यै दद्यात्स मेदिनीम् ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
कौरवाः सिंहनादेन नानावाद्यस्वनेन च |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
कौरवाग्र्यैः परिवृतः शक्रो देवगणैरिव |
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
कौरवाचार्यमुख्यस्य भारद्वाजस्य धीमतः ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
कौरवाणां कुले जातः पाण्डोः पुत्रो विशेषतः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
कौरवाणां च दीनानां द्रोणे युधि निपातिते ||
९३ ख
विराट पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
कौरवाणां च सर्वेषां कर्णस्य च महात्मनः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
कौरवाणां च सर्वेषामाचार्यस्य च संनिधौ ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
कौरवाणां चमूं घोरां भृशं दुद्रुवतू रणे ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
२३२
वैशम्पाय़न उवाच
कौरवाणां तदा राजन्पुनः प्रत्यागतं मनः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४७
सञ्जय़ उवाच
कौरवाणां प्रकाशेन दृश्यन्ते तु द्रुताः परे ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७१
भगवानु उवाच
कौरवाणां प्रवृत्तिं च गत्वा युद्धाधिकारिकाम् |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
कौरवानभ्ययुस्तूर्णं हस्त्यश्वरथपत्तिभिः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
कौरवानभ्यवर्तन्त जिगीषन्तो महावलाः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
कौरवान्कारणं कृत्वा कालेनाद्भुतकर्मणा ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
कौरवान्द्रवतो ह्येष कर्णो धारय़तेऽर्जुन |
४ क
वन पर्व
अध्याय
२३२
युधिष्ठिर उवाच
कौरवान्विषमप्राप्तान्कथं व्रूय़ास्त्वमीदृशम् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
कौरवान्समरे तूर्णं वारय़ामास साय़कैः ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
कौरवान्समरे राजन्नभिय़ुध्यस्व भारत |
६० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
कौरवान्सहितान्सर्वान्गोग्रहार्थे समागतान् |
३८ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
कौरवार्थे पराक्रान्ताः सङ्ग्रामे निधनं गताः ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
कौरवाश्च यथा हृष्टा विनदन्ति मुहुर्मुहुः ||
३८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
कौरवास्तु ततो राजन्प्रय़युः शिविरं स्वकम् |
७३ क
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
कौरवेन्द्रं रणे हत्वा गदय़ातिकृतश्रमम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
सञ्जय़ उवाच
कौरवेषु च भग्नेषु कुन्तीपुत्रो धनञ्जय़ः ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
कौरवेषु च यातेषु तदा राजन्दिनक्षय़े |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
कौरवेषु निवृत्तेषु पाण्डवा जितकाशिनः |
७१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
कौरवेषु प्रशान्तेषु त्वय़ा नाथेन माधव ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
कौरवेय़ न सन्त्रासो विद्यते मम संय़ुगे ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
कौरवेय़ांस्ततः पार्थः सहसा समुपाद्रवत् |
५७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७२
सञ्जय़ उवाच
कौरवेय़ांस्त्रिधाभूतान्पाण्डवाः समुपाद्रवन् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६
द्रुपद उवाच
कौरवेय़ान्प्रय़ात्वाशु कौन्तेय़स्यार्थसिद्धय़े ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
कौरवेय़ो विशेषेण कुले जन्म च संस्मर ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
कौरवैः शममिच्छामस्तत्र युद्धमनन्तरम् ||
१५ ख
विराट पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
कौरवैः सह सङ्गम्य त्रिगर्तैश्च विशां पते |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
कौरवो द्रोणपुत्रश्च सहितावभ्यधावताम् ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
कौरवो भवता सार्धं द्वन्द्वय़ुद्धं करिष्यति ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
२५१
द्रौपद्यु उवाच
कौरव्यः कुशली राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
कौरव्यः कौरवेय़ाणां देवानामिव वासवः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७७
धृष्टद्युम्न उवाच
कौरव्यः सोमदत्तश्च पुत्राश्चास्य महारथाः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
५२
सूत उवाच
कौरव्यकुलजान्नागाञ्शृणु मे द्विजसत्तम ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
कौरव्यपत्नी वार्ष्णेय़ी पद्ममालेव शुष्यती ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
कौरव्यवध्यत चमूः पाण्डुपुत्रैर्महारथैः ||
६२ ग
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
कौरव्यसीदत्पृतना मृगीवाग्निसमाकुला ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
कौरव्यस्य महासेनां जघ्नतुस्तौ महारथौ ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय
२०६
वैशम्पाय़न उवाच
कौरव्यस्याथ नागस्य भवने परमार्चिते ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
कौरव्या मृत्युसाद्भूताः सहिताः सर्वराजभिः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
नारद उवाच
कौरव्यो धृतराष्ट्रश्च कुमारः कुशकस्तथा ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
३१
सूत उवाच
कौरव्यो धृतराष्ट्रश्च पुष्करः शल्यकस्तथा ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३३
भीष्म उवाच
कौलाः सर्पा माहिषकास्तास्ताः क्षत्रिय़जातय़ः ||
२० ख