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आदि पर्व
अध्याय १०७
वैशम्पाय़न उवाच
क्रव्यादाः प्राणदन्घोराः शिवाश्चाशिवशंसिनः ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
क्रव्यादानां नरव्याघ्र नर्दतां तत्र तत्र ह |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
क्रव्यादानां प्रमोदार्थं यमराष्ट्रविवृद्धय़े ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
क्रव्यादान्पक्षिणश्चैव गोमाय़ूनपरान्मृगान् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
क्रव्यादान्राक्षसान्विद्धि जिह्मानृतपराय़णान् ||
२७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
क्रव्यादाश्च प्रमुदिता घोरा प्राप्ता च शर्वरी ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
क्रव्यादेषु च भूतेषु गजेषु च मृगेषु च ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
क्रव्यादैः कृमिभिश्चान्यैर्न भुज्यन्ते हि तादृशाः ||
२५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
क्रव्यादैः कृष्यमाणानामपरेषां महात्मनाम् |
३९ क
वन पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
क्रव्यादैः कृष्यमाणानि भक्ष्यमाणानि चासकृत् ||
३४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
क्रव्यादैर्भक्ष्यमाणान्वै गोमाय़ुवडवाय़सैः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१३
भीष्म उवाच
क्रव्याद्भ्य इव भूतानामदान्तेभ्यः सदा भय़म् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
क्राथ इत्यभिविख्यातः सोऽभवन्मनुजाधिपः ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४
द्रुपद उवाच
क्राथपुत्रश्च दुर्धर्षः पार्वतीय़ाश्च ये नृपाः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय २६७
मार्कण्डेय़ उवाच
क्रान्तुं तोय़निधिं वीरा नैषा वो नैष्ठिकी मतिः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३१
व्यास उवाच
क्रान्ते विष्णुर्वले शक्रः कोष्ठेऽग्निर्भुक्तमर्छति |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२
वृहस्पतिरु उवाच
क्रिय़तां तत्सुरश्रेष्ठा न हि दास्याम्यहं शचीम् ||
२३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़तां तावदाहारस्ततो गच्छाश्रमं प्रति ||
२२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़तां तावदाहारस्ततो वेत्स्यामहे वय़म् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़तां दर्शने यत्नो देवस्य परमेष्ठिनः |
४४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
क्रिय़तां निखिलेनैतन्मा विचारय़ पार्थिव ||
३७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
क्रिय़तां पाण्डवैः सार्धं शमो भरतसत्तम |
३१ क
सभा पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़तां पुत्र तत्सर्वमेतन्मन्ये हितं तव ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
क्रिय़तां प्रतिसंहारः सर्वदेवेश्वर त्वय़ा ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
व्यास उवाच
क्रिय़तां मद्वचः शिष्याः सेव्यतां हरिरीश्वरः |
९८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११४
नारद उवाच
क्रिय़तां मम संहारो गुर्वर्थं द्विजसत्तम |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़तां मूर्ध्नि वो न्यस्तं मय़ेदं सकलं पदम् ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय १३५
यवक्रीरु उवाच
क्रिय़तां यद्भवेच्छक्यं मय़ा सुरगणेश्वर |
४० क
विराट पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़तां साधु सञ्चिन्त्य वासश्चैषां प्रचिन्त्यताम् ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०१
कण्व उवाच
क्रिय़तामत्र यत्नो हि प्रीतिमानस्म्यनेन वै |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५०
पितामह उवाच
क्रिय़तामनवद्याङ्गि यथोक्तं मद्वचोऽनघे ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़तामर्हणं राज्ञां यथार्हमिति भारत ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय १८१
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़तामवहारोऽस्माद्युद्धाद्व्राह्मणसंय़ुतात् |
३१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९०
भार्यो उवाच
क्रिय़तामस्य नृपते विधिवद्दारसङ्ग्रहः |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
क्रिय़तामात्मनः श्रेय़ः प्रीतिर्हि परमा त्वय़ि ||
५० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०२
नारद उवाच
क्रिय़तामार्यक क्षिप्रं वुद्धिः कन्याप्रतिग्रहे ||
७ ख
विराट पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
क्रिय़तामाशु राजेन्द्र सम्प्राप्तो हि धनञ्जय़ः ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़तामिति तत्कृष्णो नास्य चक्रे वचस्तदा ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय १९४
मार्कण्डेय़ उवाच
क्रिय़तामिति राजर्षिर्जगाम वनमुत्तमम् ||
५ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६४
व्राह्मणा ऊचुः
क्रिय़तामुपहारोऽद्य त्र्यम्वकस्य महात्मनः |
१ क
वन पर्व
अध्याय २७८
सावित्र्यु उवाच
क्रिय़ते कर्मणा पश्चात्प्रमाणं मे मनस्ततः ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३९
श्रीभगवानु उवाच
क्रिय़ते तदिह प्रोक्तं राजसं चलमध्रुवम् ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय २४५
व्यास उवाच
क्रिय़ते न स कर्तारं त्राय़ते महतो भय़ात् ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
श्रीभगवानु उवाच
क्रिय़ते वहुलाय़ासं तद्राजसमुदाहृतम् ||
२४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़न्तां पथि चाप्यद्य वेश्मानि विविधानि च ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़माणं भवेत्कृष्ण क्षत्रस्य च सुखावहम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८४
पराशर उवाच
क्रिय़माणं यदा कर्म नाशं गच्छति मानुषम् |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़माणे भवेच्छ्रेय़स्तत्सर्वं शृणुतानघाः ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय १०२
वैशम्पाय़न उवाच
क्रिय़माणेषु कृत्येषु कुमाराणां महात्मनाम् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
क्रिय़माणेऽपवर्गे तु यो द्विजो भरतर्षभ |
३४ क