कर्ण पर्व
अध्याय
२२
धृतराष्ट्र उवाच
कथं वैकर्तनः कर्णस्तत्राय़ुध्यत सञ्जय़ |
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
जनमेजय़ उवाच
कथं वैकारिको गच्छेत्पुरुषः पुरुषोत्तमम् |
७४ क
आदि पर्व
अध्याय
५६
जनमेजय़ उवाच
कथं व्यतिक्रमन्द्यूते पार्थौ माद्रीसुतौ तथा |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१०
युधिष्ठिर उवाच
कथं व्यासस्य धर्मात्मा शुको जज्ञे महातपाः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
युधिष्ठिर उवाच
कथं व्रह्मर्षिवंशे च क्षत्रधर्मा व्यजाय़त ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८५
जनक उवाच
कथं व्राह्मणतो जातो विशेषग्रहणं गतः ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८३
वैशम्पाय़न उवाच
कथं वय़ं वासुदेव त्वय़ेह; गूढा वसन्तो विदिताः स्म सर्वे ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
भीष्म उवाच
कथं शक्यामहे व्रह्मन्दानवैरुपमर्दनम् ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
कथं शक्यो मय़ा कर्णो युद्धे क्षपय़ितुं भवेत् ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
कथं शक्यो रणे जेतुं भवेदेष वलार्णवः ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४६
व्राह्मण्यु उवाच
कथं शक्ष्यामि वालेऽस्मिन्गुणानाधातुमीप्षितान् |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
कथं शत्रुं शरीरस्थमात्मानं नाववुध्यसे ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५८
युधिष्ठिर उवाच
कथं शप्तोऽसि भगवन्नगस्त्येन महात्मना |
४९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
काश्यप उवाच
कथं शरीरं च्यवते कथं चैवोपपद्यते |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
कथं शान्तनवं तात पाण्डुपुत्रा न्यपातय़न् ||
६३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
कथं शान्तनवं दृष्ट्वा पाण्डवानामनीकिनी |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
कथं शान्तनवं युद्धे पाण्डवाः प्रत्यवारय़न् ||
८ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
धृतराष्ट्र उवाच
कथं शान्तनवो भीष्मः स तस्मिन्दशमेऽहनि |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
धृतराष्ट्र उवाच
कथं शान्तनवो भीष्मो दशमेऽहनि सञ्जय़ |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८९
दुर्योधन उवाच
कथं शिखण्डी गाङ्गेय़ कन्या भूत्वा सती तदा |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
धृतराष्ट्र उवाच
कथं शिखण्डी गाङ्गेय़मभ्यधावत्पितामहम् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
धृतराष्ट्र उवाच
कथं शिखण्डी गाङ्गेय़मभ्यवर्तत संय़ुगे |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
कथं शुक्रस्य नप्तारं देवय़ान्याः सुतं प्रभो |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
काश्यप उवाच
कथं शुभाशुभे चाय़ं कर्मणी स्वकृते नरः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
युधिष्ठिर उवाच
कथं स न विजानीय़ात्प्रभावममितौजसः ||
१०३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
कथं स पुरुषः पार्थ कं घातय़ति हन्ति कम् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
३९
जनमेजय़ उवाच
कथं स पुरुषव्याघ्रो दीर्घवाहुर्धनञ्जय़ः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९६
युधिष्ठिर उवाच
कथं स प्रतिय़ोद्धव्यस्तन्मे व्रूहि पितामह ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
जनमेजय़ उवाच
कथं स भगवान्देवो यज्ञेष्वग्रहरः प्रभुः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
युधिष्ठिर उवाच
कथं स वै विपन्नश्च कथं वै पातितो भुवि |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
७१
जनमेजय़ उवाच
कथं स शुक्रतनय़ां लेभे परमदुर्लभाम् ||
१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
४
धृतराष्ट्र उवाच
कथं संसारगहनं विज्ञेय़ं वदतां वर |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१८१
वैशम्पाय़न उवाच
कथं संय़ुज्यते प्रेत्य इह वा द्विजसत्तम ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
श्वशुर उवाच
कथं सक्तून्ग्रहीष्यामि भूत्वा धर्मोपघातकः |
४७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९
शल्य उवाच
कथं सज्जेत भोगेषु न च तप्येन्महत्तपः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
कथं सञ्जय़ दुर्धर्षमनाधृष्ययशोवलम् ||
३५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
धृतराष्ट्र उवाच
कथं सञ्जय़ राधेय़ः प्रत्यव्यूहत पाण्डवान् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१४
युधिष्ठिर उवाच
कथं सदोपवासी स्याद्व्रह्मचारी कथं भवेत् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९३
युधिष्ठिर उवाच
कथं सदोपवासी स्याद्व्रह्मचारी च पार्थिव |
९ क
सभा पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
कथं सद्धर्मचारित्रवृत्तस्थितिविभूषितान् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
कथं सन्धारय़िष्यामि विवत्सामिव धेनुकाम् ||
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय
४६
जनमेजय़ उवाच
कथं समभवद्द्यूतं भ्रातॄणां तन्महात्ययम् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
५४
सूत उवाच
कथं समभवद्भेदस्तेषामक्लिष्टकर्मणाम् |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
धृतराष्ट्र उवाच
कथं समीय़तुर्युद्धे भारद्वाजधनञ्जय़ौ ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१०४
युधिष्ठिर उवाच
कथं समुद्रः पूर्णश्च भगीरथपरिश्रमात् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४३
धृतराष्ट्र उवाच
कथं समृद्धमप्यृद्धं तपो भवति केवलम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय
५९
नल उवाच
कथं समृद्धो गत्वाहं तव हर्षविवर्धनः |
२ क
वन पर्व
अध्याय
२००
व्राह्मण उवाच
कथं सम्भवते योनौ कथं वा पुण्यपापय़ोः |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
कथं सम्वन्धिना सार्धं न मे स्याद्विग्रहो महान् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७६
भरद्वाज उवाच
कथं सलिलमुत्पन्नं कथं चैवाग्निमारुतौ |
५ क