chevron_left  कथय़न्तोऽद्भुतंarrow_drop_down
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
कथय़न्तोऽद्भुतं युद्धं सुतय़ोस्तव भारत ||
५८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
कथय़न्तौ रणे वृत्तं प्रय़ातौ रथमास्थितौ ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १८७
द्रुपद उवाच
कथय़न्त्वितिकर्तव्यं श्वः काले करवामहे ||
३१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़न्नेव तु तदा वासुदेवः प्रतापवान् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ५
शौनक उवाच
कथय़स्व कथामेतां कल्याः स्म श्रवणे तव ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १०७
जनमेजय़ उवाच
कथय़स्व न मे तृप्तिः कथ्यमानेषु वन्धुषु ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़स्व नरेन्द्राणां येषां त्वं कुलवर्धनः |
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३५
वासुदेव उवाच
कथय़स्व प्रवक्ष्यामि यत्र ते संशय़ो द्विज ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
कथय़स्व भय़ं त्यक्त्वा याथातथ्यमिदं मम ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
युधिष्ठिर उवाच
कथय़स्व महाप्राज्ञ भूमिदानं विशेषतः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ५३
शौनक उवाच
कथय़स्व सतां श्रेष्ठ न हि तृप्यामि सूतज ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय १८५
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़स्वेह चरितं मनोर्वैवस्वतस्य मे ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७
संवर्त उवाच
कथय़स्वैतदेकं मे क्व नु सम्प्रति नारदः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
जनमेजय़ उवाच
कथय़स्वोत्तममते जन्म नाराय़णोद्भवम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
जनमेजय़ उवाच
कथय़स्वोत्तममते महापुरुषनिर्मितम् |
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १३१
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ां चक्रिरे रम्यं नगरं वारणावतम् ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
कथय़ामास कर्णस्य निधनं यदुनन्दनः ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास तं कृष्णः पृष्टः पित्रा महाहवम् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय १७७
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास तत्सर्वं ग्रहणादि विचेष्टितम् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास तत्सर्वं द्रौपदीसम्भवं तदा ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय १७८
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास तत्सर्वं धर्मराजो युधिष्ठिरः ||
४७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास तत्सर्वं यथा शप्तः स सूतजः ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास तत्सर्वमृषीणां भावितात्मनाम् ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास तत्सर्वमृषीणां भावितात्मनाम् ||
१९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास दुर्धर्षस्तथा चैतन्न संशय़ः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
कथय़ामास दुर्धर्षो विनिःश्वस्य पुनः पुनः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२६
वासुदेव उवाच
कथय़ामास देवर्षिः पूर्ववृत्तां कथां शुभाम् ||
५० ख
आदि पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास देशान्स तीर्थानि विविधानि च |
६ क
सभा पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास दैतेय़ः पाण्डुपुत्रेषु भारत ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास धर्मज्ञो धर्मराज्ञे द्विजोत्तमः ||
५९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
धृतराष्ट्र उवाच
कथय़ामास भगवान्देवेन्द्राय़ कुरूद्वह ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय १०४
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामास माहात्म्यं सगरस्य महात्मनः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ामासतुश्चित्राः कथाः कुरुय़दुक्षिताम् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय २०७
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ित्वा तु तत्सर्वं व्राह्मणेभ्यः स भारत |
१ क
विराट पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ित्वा तु तत्सर्वं व्राह्मणेभ्यो युधिष्ठिरः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय २
व्यास उवाच
कथय़िष्यति ते युद्धं सर्वज्ञश्च भविष्यति ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
कथय़िष्यन्ति भूतानि यावद्भूमिर्धरिष्यति ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
कथय़िष्यन्ति लोकास्त्वां यावद्भूमिर्धरिष्यति ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़िष्यामि ते तात कथामेतां महात्मनः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़िष्यामि ते सर्वं पुराणं वेदसंमितम् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२६
वासुदेव उवाच
कथय़िष्याम्यहरहर्वुद्धिदीपकरं नृणाम् ||
४४ ख
सभा पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़िष्ये तथेन्द्रस्य कैलासनिलय़स्य च ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
कथय़िष्ये सभां दिव्यां युधिष्ठिर निवोध ताम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
कथय़ेद्देवलोकं यो देवराजसमीपतः |
५ क
वन पर्व
अध्याय २२०
मार्कण्डेय़ उवाच
कदम्वतरुषण्डैश्च दिव्यैर्मृगगणैरपि |
२४ क
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
कदम्वैश्चक्रवाकैश्च कुररैर्जलकुक्कुटैः |
५० क
उद्योग पर्व
अध्याय १०३
वैशम्पाय़न उवाच
कदर्थीकृत्य तद्वाक्यमृषेः कण्वस्य दुर्मतिः |
३७ क
वन पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
कदर्थीकृत्य तु स तान्राक्षसान्भीमविक्रमः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
कदर्थीकृत्य ते पुत्रः प्रत्यमित्रमवारय़त् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
कदर्थीकृत्य नः सर्वान्पश्यतः सव्यसाचिनः |
३८ क