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वन पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
कालय़ुक्तं महाप्राज्ञे क्रुद्धैस्तेजः सुदुःसहम् ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५०
भीष्म उवाच
कालय़ुक्तोऽप्युभय़विच्छेषमर्थं समाचरेत् ||
४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
कालय़ोगविपर्यासं प्राप्यान्योन्यं विपद्यते ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
कालय़ोगी महानादः सर्ववासश्चतुष्पथः |
४८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
कावेरीं चुलुकां चापि वापीं शतवलामपि ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
काव्यः स्वय़ं वाक्यमिदं जगाद; सुरापानं प्रति वै जातशङ्कः ||
५३ ख
आदि पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
काव्यस्योशनसः शापान्न च तृप्तोऽस्मि यौवने ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय ७९
यय़ातिरु उवाच
काव्यस्योशनसः शापान्न च तृप्तोऽस्मि यौवने ||
२४ ग
उद्योग पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
काव्यां वाचं विदुरो भाषमाणो; न विन्दते धृतराष्ट्रात्प्रशंसाम् ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
काशिकः सुकुमारश्च नीलो यश्चापरो नृपः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७७
राम उवाच
काशिकन्ये पुनर्व्रूहि भीष्मस्ते चरणावुभौ |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
युधिष्ठिर उवाच
काशिभिश्चेदिपाञ्चालैर्मत्स्यैश्च मधुसूदन |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
काशिराज इति ख्यातः पृथिव्यां पृथिवीपतिः ||
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७८
नकुल उवाच
काशिराजं च विक्रान्तं धृष्टकेतुं च चेदिपम् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
काशिराजं हय़श्रेष्ठाः श्लाघनीय़मुदावहन् ||
३१ ख
विराट पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
काशिराजश्च शैव्यश्च प्रीय़माणौ युधिष्ठिरे |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
काशिराजश्च शैव्यश्च रथानामय़ुतैस्त्रिभिः ||
५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
काशिराजश्च शैव्यश्च शिखण्डी च महारथः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७९
भीष्म उवाच
काशिराजसुताय़ाश्च यथा कामः पुरातनः ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
भीष्म उवाच
काशिष्वपि नृपो राजन्दिवोदासपितामहः |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८४
वैशम्पाय़न उवाच
काशीनन्ध्रान्कोसलांश्च किरातानथ तङ्गणान् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय २१४
वैशम्पाय़न उवाच
काश्चित्प्रहृष्टा ननृतुश्चुक्रुशुश्च तथापराः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय ६१
वृहदश्व उवाच
काश्मर्यामलकप्लक्षकदम्वोदुम्वरावृतम् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
काश्मीरकानौरसकान्पिशाचांश्च समन्दरान् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय १३०
लोमश उवाच
काश्मीरमण्डलं चैतत्सर्वपुण्यमरिन्दम |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
अङ्गिरा उवाच
काश्मीरमण्डले नद्यो याः पतन्ति महानदम् |
८ क
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
काश्मीराः कुन्दमानाश्च पौरका हंसकाय़नाः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
काश्मीराः सिन्धुसौवीरा गान्धारा दर्शकास्तथा |
५२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
कश्यप उवाच
काश्यः काशनिकाशत्वादेतन्मे नाम धारय़ ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
काश्यः परमशीघ्रास्त्रः श्लाघनीय़ो रथोत्तमः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
काश्यपं स्थीय़तामत्र यावदागमनं मम ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय ४६
सूत उवाच
काश्यपस्य प्रसादेन मन्त्रिणां सुनय़ेन च ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९९
नारद उवाच
काश्यपिर्ध्वजविष्कम्भो वैनतेय़ोऽथ वामनः |
१० क
वन पर्व
अध्याय २१०
मार्कण्डेय़ उवाच
काश्यपो ह्यथ वासिष्ठः प्राणश्च प्राणपुत्रकः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ३८
सूत उवाच
काश्यपोऽभ्यागमद्विद्वांस्तं राजानं चिकित्सितुम् ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
काश्यस्याभिभुवः पुत्रं पराक्रान्तमवारय़त् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
काश्यस्याभिभुवः पुत्रं सुकुमारं महारथम् ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७७
भीष्म उवाच
काश्ये कामं न गृह्णामि शस्त्रं वै वरवर्णिनि |
२ क
सभा पर्व
अध्याय ६१
भीम उवाच
काश्यो यद्वलिमाहार्षीद्द्रव्यं यच्चान्यदुत्तमम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय २८
युधिष्ठिर उवाच
काश्यो वभ्रुः श्रिय़मुत्तमां गतो; लव्ध्वा कृष्णं भ्रातरमीशितारम् |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५६
धृतराष्ट्र उवाच
काशय़श्चेदय़श्चैव मत्स्याः सर्वे च सृञ्जय़ाः |
३३ क
सभा पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
काषाय़ं सुलभं पश्चान्मुनीनां शममिच्छताम् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
काषाय़धारणं मौण्ड्यं त्रिविष्टव्धः कमण्डलुः |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
काषाय़वसनाश्चान्ये श्मश्रुला ह्रीसुसंवृताः |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९१
भीष्म उवाच
काषाय़वासी कुष्ठी वा पतितो व्रह्महापि वा ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
काषाय़ैरजिनैश्चीरैर्नग्नान्मुण्डाञ्जटाधरान् |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
काष्ठकुण्डेषु वाह्लीका मृण्मय़ेषु च भुञ्जते |
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
काष्ठभूतोऽऽश्रमपदे वसति स्म महातपाः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८७
भीष्म उवाच
काष्ठलोहतुषाङ्गारदारुशृङ्गास्थिवैणवान् |
१३ क