कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
करं करेणाभिपीड्य प्रेक्षमाणस्तवात्मजम् ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
करकर्षेण सहितस्ताभ्यां वस्तेऽभ्ययुञ्जत ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
करजैरतुदंश्चान्ये विहाय़ भय़मुत्तमम् ||
२ ग
वन पर्व
अध्याय
२१९
मार्कण्डेय़ उवाच
करञ्जे तां नमस्यन्ति तस्मात्पुत्रार्थिनो नराः ||
३४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२५
व्राह्मण उवाच
करणं कर्म कर्ता च मोक्ष इत्येव भामिनि |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
करणं कर्म कर्तेति त्रिविधः कर्मसङ्ग्रहः ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
करणं कारणं कर्ता विकर्ता गहनो गुहः ||
५४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०२
वैशम्पाय़न उवाच
करणत्वाच्च विदुरः पाण्डुरासीन्महीपतिः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
१७८
सर्प उवाच
करणाधिष्ठितं भोगानुपभुङ्क्ते यथाविधि ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
करणानां विय़ोगाच्च तेन मेऽर्धरथो मतः |
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१५
वैशम्पाय़न उवाच
करणानि समर्थानि भगवन्दातुमर्हसि ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६६
भीष्म उवाच
करणे घटस्य या वुद्धिर्घटोत्पत्तौ न सानघ |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१०
गुरुरु उवाच
करणैः कर्मनिर्वृत्तैः कर्ता यद्यद्विचेष्टते |
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
करतोय़ां कुरङ्गेषु त्रिरात्रोपोषितो नरः |
११ ख
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
करतोय़ां समासाद्य त्रिरात्रोपोषितो नरः |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
करदान्पार्थिवान्कृत्वा प्रत्यागच्छदरिन्दमः ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
करन्धमस्य पुत्रस्तु मरुत्तो नृपतिस्तथा |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
करन्धमो नरश्रेष्ठः कध्मोरश्च नराधिपः ||
४५ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
करन्धमो वाह्लिकश्च सुद्युम्नो वलवान्मधुः ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
करभाणां सहस्राणि कोशं तस्य महात्मनः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
करभारभय़ात्पुंसो गृहस्थाः परिमोषकाः |
४० क
वन पर्व
अध्याय
१८८
मार्कण्डेय़ उवाच
करभारभय़ाद्विप्रा भजिष्यन्ति दिशो दश ||
७० ख
वन पर्व
अध्याय
२६८
मार्कण्डेय़ उवाच
करभारुणगात्राणां हरीणां युद्धशालिनाम् |
२५ क
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
करमाहारय़ामास रत्नानि विविधानि च ||
२५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३
युधिष्ठिर उवाच
करमाहारय़िष्यामि कथं शोकपराय़णान् ||
१४ ख
सभा पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
करमाहारय़िष्यामि राज्ञः सर्वान्नृपोत्तम ||
३ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
करम्भवालुकास्तप्ता आय़सीश्च शिलाः पृथक् |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
करवाणि किं ते कल्याणि प्रिय़ं यत्तेऽभिकाङ्क्षितम् ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
द्रोण उवाच
करवाणि च ते कामं व्रूहि यत्तेऽभिकाङ्क्षितम् |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५३
तुलाधार उवाच
करवाणि प्रिय़ं किं ते तद्व्रूहि द्विजसत्तम ||
५१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
नहुष उवाच
करवाणि प्रिय़ं किं ते तन्मे व्याख्यातुमर्हसि |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
करवाणि सदा चाहं नमस्तस्मै महात्मने ||
१४६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२४८
भीष्म उवाच
करवाण्यद्य कं कामं वरार्होऽसि मतो मम |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
निषादा ऊचुः
करवाम प्रिय़ं किं ते तन्नो व्रूहि महामुने ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
नारद उवाच
करवीरः पीठरकः संवृत्तो वृत्त एव च |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
३१
सूत उवाच
करवीरः पुष्पदंष्ट्र एळको विल्वपाण्डुकः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
करवीरवनैः फुल्लैः सहस्रावर्तसंवृतैः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
वैशम्पाय़न उवाच
करवीरैः पारिजातैरन्यैश्च विविधैर्द्रुमैः ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
करस्थेनैव गोविन्द लवणस्येह रक्षसः ||
१३४ ख
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
करांस्तेभ्य उपादाय़ रत्नानि विविधानि च |
९ क
सभा पर्व
अध्याय
३४
शिशुपाल उवाच
करानस्मै प्रय़च्छामः सोऽय़मस्मान्न मन्यते ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१७८
सर्प उवाच
करान्मम प्रय़च्छन्ति सर्वे त्रैलोक्यवासिनः ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
कराभ्यां किणजाताभ्यां शनकैः संववाहतुः ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
कराभ्यां तेन विप्रेण स्पृष्टा भर्तृव्रता सती ||
५९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
कराभ्यामाददानस्य सन्दधानस्य चाशुगान् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
वसिष्ठ उवाच
कराल मा ते भय़मस्तु किं चि; देतच्छ्रुतं व्रह्म परं त्वय़ाद्य |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
करालः कृष्णवर्णश्च रक्तवासास्तथैव च ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
भीष्म उवाच
करालदशना भीमा विकृता कृष्णपिङ्गला |
११ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
करालाः पिङ्गला रौद्राः शैलदन्ता रजस्वलाः |
१२८ क
मौसल पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
करालो विकटो मुण्डः पुरुषः कृष्णपिङ्गलः |
२ क