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अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
ईश्वरः स गवां मध्ये वृषाङ्क इति चोच्यते ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
वसुहोम उवाच
ईश्वरः सर्वदेहस्तु राजराजो धनाधिपः |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
ईश्वरः सर्वभूतानां देवदेवः प्रतापवान् ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७३
वाय़ुरु उवाच
ईश्वरः सर्वभूतानां धर्मकोशस्य गुप्तय़े ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
ईश्वरः सर्वभूतानां विक्रमेण जितो वलात् ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
श्रीभगवानु उवाच
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति |
६१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
वसुहोम उवाच
ईश्वरः सर्वलोकस्य महादेवः प्रजापतिः ||
५१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
ईश्वरः सुमहातेजाः संवर्तक इवानलः |
११२ क
सभा पर्व
अध्याय ४३
दुर्योधन उवाच
ईश्वरत्वं पृथिव्याश्च वसुमत्तां च तादृशीम् |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
ईश्वरत्वान्महत्त्वाच्च महेश्वर इति स्मृतः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय ३१
द्रौपद्यु उवाच
ईश्वरप्रेरितो गच्छेत्स्वर्गं नरकमेव च ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२१
युधिष्ठिर उवाच
ईश्वरश्च महादण्डो दण्डे सर्वं प्रतिष्ठितम् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय २०७
वैशम्पाय़न उवाच
ईश्वरस्तोषितस्तेन महादेव उमापतिः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
ईश्वरस्त्वां महाराजो महाप्राज्ञ दिदृक्षति ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय ३१
द्रौपद्यु उवाच
ईश्वरस्य वशे तिष्ठन्नान्येषां नात्मनः प्रभुः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय ३१
द्रौपद्यु उवाच
ईश्वरस्य वशे लोकस्तिष्ठते नात्मनो यथा ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
ईश्वरस्य सतस्तस्य इह चैव परत्र च ||
३ ग
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
ईश्वरस्य सदा ह्येतत्प्रणमात्र युधिष्ठिर ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय ३२
युधिष्ठिर उवाच
ईश्वराः कस्य हेतोस्ते चरेय़ुर्धर्ममादृताः ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
ईश्वरान्सर्वलोकस्य हतामित्राञ्श्रिय़ा वृतान् ||
९८ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
ईश्वरार्जुनय़ोर्युद्धं पर्व कैरातसञ्ज्ञितम् ||
४२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
ईश्वरी सर्वकल्याणी द्रौपदी कथमच्युत ||
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
ईश्वरी सर्वकल्याणी भर्त्रा परमपूजिता ||
९१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३२
विदुरो उवाच
ईश्वरी सर्वकल्याणैर्भर्त्रा परमपूजिता ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२
व्यास उवाच
ईश्वरेण निय़ुक्ता हि साध्वसाधु च पार्थिव |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
ईश्वरेण निय़ुक्तोऽय़ं साध्वसाधु च मानवः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
ईश्वरेण प्रय़त्नेन धारणे क्षत्रिय़स्य हि |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
ईश्वरो दण्डमुद्यम्य स्वय़मेव प्रजापतिः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
ईश्वरो मे भवानस्तु शरीरस्य गृहस्य च |
१२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२
व्यास उवाच
ईश्वरो वा भवेत्कर्ता पुरुषो वापि भारत |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
ईश्वरो विक्रमी धन्वी मेधावी विक्रमः क्रमः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय ३१
द्रौपद्यु उवाच
ईश्वरो विदधातीह कल्याणं यच्च पापकम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
ईश्वरो हि जगत्स्रष्टा प्रभुर्नाराय़णो विराट् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
ईश्वरो हि पुरा भूत्वा पितृपैतामहे पदे |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
अग्निरु उवाच
ईश्वरोऽङ्गिरसं चाग्नेरपत्यार्थेऽभ्यकल्पय़त् |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३८
श्रीभगवानु उवाच
ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं वलवान्सुखी ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
पञ्चचूडो उवाच
ईषच्च कुरुते सेवां तमेवेच्छन्ति योषितः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय १५६
वैशम्पाय़न उवाच
ईषच्चपलकर्माणं मनुष्यमिह भारत |
२२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
ईषच्चापि प्रवल्गन्ति ये सत्त्वा रात्रिचारिणः |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
ईषतुर्विरथं चैव कर्तुमन्योन्यमाहवे ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
भगवानु उवाच
ईषत्कार्यो वधस्तस्य यस्य चारित्रमीदृशम् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
ईषदप्यङ्ग दाराणां पुत्राणां वा चराप्रिय़म् |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
ईषदागतसन्त्रासः त्वरय़ोपजगाम ह ||
२ ख
विराट पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
ईषदागलितं चापि क्रोधाच्चलपदं स्थितम् |
५० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १
भीष्म उवाच
ईषदुच्छ्वसमानस्तु कृच्छ्रात्संस्तभ्य पन्नगः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३४
मातो उवाच
ईषदुज्जिहतः किञ्चित्सचिवाः शत्रुकर्शनाः ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
ईषदुत्स्मय़मानश्च भगवान्केशवोऽरिहा |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
ईषदुत्स्मय़मानस्तु कृष्णो राजानमव्रवीत् |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
ईषदुत्स्मय़मानस्तु सहसा प्रससार ह ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०१
युधिष्ठिर उवाच
ईषद्धर्मं प्रपीड्यापि तन्मे व्रूहि पितामह ||
१ ख