द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
शरैः सहस्रशो विद्धा द्विपाः प्रस्रुतशोणिताः |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
शरैः सहस्रशो विद्धा विधिवत्कल्पिता द्विपाः |
५१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
शरैः सुकवचैश्छिन्नैः पट्टिशैश्च विशां पते ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
शरैः सुतीक्ष्णैः शतशोऽभ्यविध्य; त्सुदर्शनः सात्वतमुख्यमाजौ |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
शरैः सुनिशितैः पार्थं यथा वृत्रः पुरन्दरम् |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
शरैः सुनिशितैस्तीक्ष्णैः कम्पय़न्वै मुहुर्मुहुः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
शरैः सुनिशितैस्तीक्ष्णैर्वाह्वोरुरसि चार्पितः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
शरैः सुवहुसाहस्रैः समन्तादभ्यवारय़न् ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
शरैः सौभद्रमाय़स्तं दहन्तमिव वाहिनीम् |
७१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
शरैरग्निशिखाकारैः क्रुद्धाशीविषसंनिभैः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
शरैरग्निशिखाकारैराजघान स्तनान्तरे |
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
शरैरग्निशिखाकारैर्वाह्वोरुरसि चार्दय़त् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
शरैरतिरथो युद्धे पातय़न्रथय़ूथपान् ||
१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
शरैरतिरथो युद्धे पीडय़न्वाहिनीं तव ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रै राजन्निन्ये यमक्षय़म् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैः कृतहस्तो जितक्लमः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैः पाण्डवेय़ान्व्यमोहय़त् ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैः पीडय़ामास भारत ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैः पुरय़ामास सर्वतः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैः समवाकिरदाशुगैः ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैरच्छिनत्सूतनन्दनः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैरन्योन्यमभिजघ्नतुः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैर्भारद्वाजो न्यपातय़त् ||
३१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैर्मामेवाभ्यसते रणे ||
५१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैर्वारय़ामास गौतमः ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैर्वारय़ामास संय़ुगे ||
४२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैर्हार्दिक्यो व्यधमद्युधि ||
३८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
शरैरनेकसाहस्रैश्छादय़ामास भारत ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
शरैरन्यैश्च वहुभिः शस्त्रैर्नानाविधैर्युधि |
६९ ख
वन पर्व
अध्याय
२३
वासुदेव उवाच
शरैरपातय़ं सौभाच्छिरांसि विवुधद्विषाम् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
शरैरपातय़द्राजन्गिरीन्वज्रैरिवोत्तमैः ||
४९ ख
विराट पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
शरैरभिप्रणुन्नानां भग्नानां गहने वने |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
२१७
वैशम्पाय़न उवाच
शरैरभ्याहतानां च दह्यतां च वनौकसाम् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
शरैरभ्याहनद्गाढं ततो युद्धमभूत्तय़ोः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
शरैरवचकर्तोग्रैः क्रुद्धोऽन्तक इव प्रजाः ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२८
सञ्जय़ उवाच
शरैरवचकर्तोग्रैः क्रुद्धोऽन्तक इव प्रजाः ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
शरैरवचकर्तोग्रैः प्रेषय़िष्यन्यमक्षय़म् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
शरैरवचकर्तोग्रैर्द्रौणिं वज्राशनिस्वनैः ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
शरैरवर्षन्द्रुपदस्य पुत्रं; यथाम्वुदा भूधरं वारिजालैः |
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
शरैरवाकिरत्कर्णं दीप्यमानैः सहस्रशः ||
५४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
शरैरवारय़द्राजन्सर्वसैन्यस्य पश्यतः ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
शरैरशनिसंस्पर्शैस्तथा सर्पविषोपमैः ||
९८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
शरैराचितसर्वाङ्गः शोणितौघपरिप्लुतः |
३० क
वन पर्व
अध्याय
२३
वासुदेव उवाच
शरैरादित्यसङ्काशैर्ज्वलितैः शव्दसाधनैः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
शरैराशीविषस्पर्शैर्निर्भिन्नाः सव्यसाचिना ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
शरैराशीविषाकारैः पाण्डवाः समवाकिरन् ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
शरैराशीविषाकारैः पुनरेवार्दय़द्वली ||
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
शरैराशीविषाकारैर्जघान स्वनवद्धसन् ||
३० ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
शरैराशीविषाकारैर्ज्वलज्ज्वलनसंनिभैः ||
९ ग
विराट पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
शरैराशीविषाकारैर्ज्वलद्भिरिव पन्नगैः ||
१२ ख