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आदि पर्व
अध्याय १७७
धृष्टद्युम्न उवाच
कर्णेन सहिता वीरास्त्वदर्थं समुपागताः |
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
कर्णेन सहितो धीमानुपवासेन कर्शितः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय २४०
वैशम्पाय़न उवाच
कर्णेन सार्धं राजेन्द्र सौवलेन च देविना ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
कर्णेनाभ्याहता राजन्पाञ्चालाः परमेषुभिः |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
कर्णो जघान सङ्क्रुद्धो भीमसेनस्य पश्यतः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
कर्णो जाम्वूनदैर्जालैः सञ्छन्नान्वातरंहसः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १०६
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णो जेष्यति सङ्ग्रामे सहितान्पाण्डवानिति ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
कर्णो दुःशासनं त्वाह कृष्णां दासीं गृहान्नय़ ||
८१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११०
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णो दुःशासनोऽहं च जेष्यामो युधि पाण्डवान् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
कर्णो द्वात्रिंशता चैव वृषसेनश्च पञ्चभिः |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
कर्णो द्वादशधा राजंश्चिच्छेद कृतहस्तवत् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
कर्णो द्वादशभिर्वाणैरश्वत्थामा च सप्तभिः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
कर्णो द्वाविंशतिं भल्लान्कृतवर्मा चतुर्दश |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
कर्णो निष्कासय़ामास कौरवाणां वरूथिनीम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
कर्णो भीमादपाय़ासीद्रथेन महता द्रुतम् ||
८४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
कर्णो भूरिश्रवा द्रौणिर्वृषसेनश्च दुर्जय़ः |
२६ क
विराट पर्व
अध्याय ४६
भीष्म उवाच
कर्णो यदभ्यवोचन्नस्तेजःसञ्जननाय़ तत् |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
कर्णो राजन्महावाहुर्न्यवधीत्पाण्डवीं चमूम् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णो राजानमभ्यर्च्छत्तन्ममाचक्ष्व सञ्जय़ ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
कर्णो लोकानय़ं मुख्यान्प्राप्नोतु पुरुषर्षभः |
५५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णो वा जय़तां श्रेष्ठो योधा वा मामका युधि |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५३
भीष्म उवाच
कर्णो वा युध्यतां पूर्वमहं वा पृथिवीपते |
२४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
कर्णो वा सत्यवाक्षूरो नरकार्हाश्चिरं नृप ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९४
सञ्जय़ उवाच
कर्णो वा समरश्लाघी द्रौणिर्वा द्विजसत्तमः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०७
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णो वा समरे तात किमकार्षीदतः परम् ||
१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णो वैकर्तनः सूत किमुत्तरमपद्यत ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णो वैकर्तनः सूत प्रत्यपद्यत्किमुत्तरम् ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय २४१
जनमेजय़ उवाच
कर्णो वैकर्तनश्चापि शकुनिश्च महावलः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
कर्णो वैकर्तनो युद्धे भीमसेनं महारथम् ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४९
सञ्जय़ उवाच
कर्णो वैकर्तनो युद्धे राक्षसेन युय़ुत्सति |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
कर्णो वैकर्तनो युद्धे वारय़ामास भारत ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
कर्णो वैकर्तनो युद्धे वारय़ामास भारत ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय २३०
वैशम्पाय़न उवाच
कर्णो वैकर्तनो राजंस्तस्थौ गिरिरिवाचलः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
कर्णो वैकर्तनो राजन्वारय़ामास पाण्डवम् ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
कर्णो वैकर्तनो राजन्वारय़ामास वै तदा ||
४८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
कर्णो हि भाषते नित्यमहं पार्थान्समागतान् |
६४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११०
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णो हि वलवाञ्शूरो दृढधन्वा जितक्लमः |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
कर्णो हि वलवान्धृष्टः कृतास्त्रश्च महारथः |
५८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
कर्णो हि समरे शक्तो जेतुं देवान्सवासवान् |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
कर्णो ह्यभ्यधिकः पार्थादस्त्रैरेव नरर्षभ |
४९ क
कर्ण पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
कर्णो ह्येको महावाहुरस्मत्प्रिय़हिते रतः |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय २२
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णो ह्येको महावाहुर्हन्यात्पार्थान्ससोमकान् |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णो ह्येको रणे हन्ता सृञ्जय़ान्पाण्डवैः सह |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३४
सञ्जय़ उवाच
कर्णोऽपि दृष्ट्वा द्रवतो धार्तराष्ट्रान्पराङ्मुखान् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
कर्णोऽपि द्विषतां हन्ता छादय़ामास फल्गुनम् |
६८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
कर्णोऽपि निशितैर्वाणैर्विनिहत्य महाचमूम् |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
कर्णोऽपि नोत्तरं प्राह शल्योऽप्यभिमुखः परान् |
८८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
कर्णोऽपि रथिनां श्रेष्ठश्चापमुद्यम्य वीर्यवान् |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
कर्णोऽपि राजन्सम्प्राप्य सेनापत्यमरिन्दमः |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
कर्णोऽपि विवभौ शूरः शरैश्चित्रोऽसृगाप्लुतः ||
३ ख