अनुशासन पर्व
अध्याय
१३१
महेश्वर उवाच
कर्मणा दुष्कृतेनेह स्थानाद्भ्रश्यति वै द्विजः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
कर्मणा नीय़तेऽन्यत्र स्वकृतेन वलीय़सा ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४४
भीष्म उवाच
कर्मणा पूजितस्तेन रेमे तत्र स भार्यया ||
१२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
३
विदुर उवाच
कर्मणा प्राप्यते स्वर्गं सुखं दुःखं च भारत |
८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
कर्मणा मनसा वाचा चक्षुषा चापि ते नृप |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
कर्मणा मनसा वाचा तस्मात्तप्स्ये महत्तपः ||
१८ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
उमो उवाच
कर्मणा मनसा वाचा त्रिविधं हि नरः सदा |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
कर्मणा मनसा वाचा दमेन प्रशमेन च |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४४
सनत्सुजात उवाच
कर्मणा मनसा वाचा द्वितीय़ः पाद उच्यते ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३७
अर्जुन उवाच
कर्मणा मनसा वाचा न मत्तोऽस्ति वरो द्विजः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३९
विदुर उवाच
कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
६२
वृहदश्व उवाच
कर्मणा मनसा वाचा यदिदं दुःखमागतम् ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
महेश्वर उवाच
कर्मणा मनसा वाचा ये न हिंसन्ति किञ्चन |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३४
वैशम्पाय़न उवाच
कर्मणा मनसा वाचा यो द्विष्याद्विष्णुमव्ययम् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३३
नरनाराय़णावू ऊचतुः
कर्मणा मनसा वाचा विष्णुमेव यजन्ति ते ||
२४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२१
देवस्थान उवाच
कर्मणा मनसा वाचा व्रह्म सम्पद्यते तदा ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१३
जनक उवाच
कर्मणा मनसा वाचा व्रह्म सम्पद्यते तदा ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६८
व्राह्मण उवाच
कर्मणा मनसा वाचा व्रह्म सम्पद्यते तदा ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४३
व्यास उवाच
कर्मणा मनसा वाचा व्रह्म सम्पद्यते तदा ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
कर्मणा मनसा वाचा व्रह्म सम्पद्यते तदा ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
कर्मणा मनसा वाचा शुभं वा यदि वाशुभम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
कर्मणा मनसा वाचा स धर्मं वेद जाजले ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
कर्मणा मनसा वाचा समः सर्वेषु जन्तुषु ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
१८९
मार्कण्डेय़ उवाच
कर्मणा मनसा वाचा सर्वमेतत्समाचर ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८
भीष्म उवाच
कर्मणा मनसा वापि वाचा वापि परन्तप |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११५
वैशम्पाय़न उवाच
कर्मणा मनुजः कुर्वन्हिंसां पार्थिवसत्तम |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
कर्मणा यत्र पापेन वर्तन्ते जीवितेस्पवः |
४६ क
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
कर्मणा येन तेनेह पापाद्द्विजवरोत्तम |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
कर्मणा येन तेनेह मृदुना दारुणेन वा |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
कर्मणा येन तेनेह मृदुना दारुणेन वा |
२९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
कर्मणा येन मुच्येय़मस्मात्क्रूरादरिन्दम |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
कर्मणा येन येनेह यस्यां योनौ प्रजाय़ते |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११५
भीष्म उवाच
कर्मणा लिप्यते जन्तुर्वाचा च मनसैव च |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३३
भीष्म उवाच
कर्मणा वध्यते जन्तुर्विद्यया तु प्रमुच्यते |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९८
नारद उवाच
कर्मणा विधिय़ुक्तेन युक्तान्युपगतानि च ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०६
गुरुरु उवाच
कर्मणा वीजभूतेन चोद्यते यद्यदिन्द्रिय़म् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२८
भीष्म उवाच
कर्मणा वुद्धिपूर्वेण भवत्याढ्यो न वा पुनः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६४
इन्द्र उवाच
कर्मणा वै पुरा देवा ऋषय़श्चामितौजसः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६५
इन्द्र उवाच
कर्मणा व्यज्यते धर्मो यथैव श्वा तथैव सः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
कर्मणा व्याप्यते पूर्वं कर्मणा चोपपद्यते |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
कर्मणा श्रुतसम्पन्नं सतां मार्गमनुत्तमम् |
९२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
कर्मणा सुनृशंसेन तस्य नाथो व्यवस्थितः ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९२
वैशम्पाय़न उवाच
कर्मणा सुनृशंसेन पुरोचनकृतेन वै ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
कर्मणा स्वेन रक्तानि विरक्तानि च दानव |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८९
धृतराष्ट्र उवाच
कर्मणा ह्यनुरूपेण लभ्यते भक्तवेतनम् ||
२२ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
कर्मणां तात पुण्यानां जितानां तपसा स्वय़म् |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३८
विदुर उवाच
कर्मणां तु प्रशस्तानामनुष्ठानं सुखावहम् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
कर्मणां पार्थ पापानां स फलं विन्दते ध्रुवम् |
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
२००
मार्कण्डेय़ उवाच
कर्मणां प्राकृतानां वै इह सिद्धिः प्रदृश्यते ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
३२
युधिष्ठिर उवाच
कर्मणां फलमस्तीति तथैतद्धर्म शाश्वतम् |
३७ क