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भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं च सप्तत्या पार्थं च नवभिः पुनः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं च सप्तत्या पुनः पार्थं च पञ्चभिः ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं च सप्तत्या वाह्वोरुरसि चाशुगैः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं च सप्तत्या विव्याध परमेषुभिः ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं त्रिभिर्वाणैरविध्यद्दक्षिणे भुजे ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं त्रिभिर्वाणैराजघान स्तनान्तरे ||
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं त्रिभिर्विद्ध्वा पुनः पार्थं च पञ्चभिः |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवं पुरस्कृत्य यदकुर्वत पाण्डवाः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवं पुरस्कृत्य सर्वे ते क्षत्रिय़र्षभाः |
४ क
स्त्री पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवं पुरस्कृत्य हतवन्धुं च पार्थिवम् |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
वासुदेवं महात्मानं लोकानामीश्वरेश्वरम् ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवं महात्मानमभ्यगच्छत्कृताञ्जलिः ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं महात्मानमर्जुनः समभाषत ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवं महावाहुमभ्यभाषत कौरवः ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं महावाहुरर्जुनः प्रत्यभाषत ||
६० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं महावाहुरर्जुनः समचूचुदत् ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं समुद्वीक्ष्य वाक्यमेतदुवाच ह ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवं सराजानं विजेष्यामि महारणे ||
६४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवः कृपश्चैव सात्यकिः सञ्जय़स्तथा ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
व्राह्मण उवाच
वासुदेवः समुद्धर्ता भविता ते जनार्दनः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २९
श्रीभगवानु उवाच
वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०३
गुरुरु उवाच
वासुदेवः सर्वमिदं विश्वस्य व्रह्मणो मुखम् |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवः सहामात्यः प्रत्युद्यातो दिदृक्षय़ा ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २
कर्ण उवाच
वासुदेवः सात्यकिः सृञ्जय़ाश्च; मन्ये वलं तदजय़्यं महीपैः ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
वासुदेवः सुमन्दात्मा वसुदेवसुतो गतः ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवः सृञ्जय़ाः सात्यकिश्च; यमौ च कस्तौ विषहेन्मदन्यः ||
५१ ख
सभा पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवजितामाशां यथासौ व्यजय़त्प्रभुः ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६०
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवद्वितीय़े हि मय़ि क्रुद्धे नराधिप |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवपुरोगास्तु सर्व एवाभ्यवादय़न् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवमतं चैतन्मम चैवार्जुनस्य च |
९९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११८
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवमतं नूनं नैतत्त्वय़्युपपद्यते ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवमथामन्त्र्य वाग्मी वचनमव्रवीत् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवमभिप्रेक्ष्य धर्मराजं च पाण्डवम् |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवमभिप्रेक्ष्य रौहिणेय़ोऽभ्यभाषत ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९५
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवमवेक्ष्येदं वचनं प्रत्यभाषत ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवमिदं वाक्यं धर्मराजोऽभ्यभाषत ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवमिदं वाक्यमव्रवीत्कुरुनन्दनः ||
२ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवमिदं वाक्यमव्रवीत्पुरुषर्षभ ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवमुवाचेदं कौन्तेय़ः श्वेतवाहनः ||
४२ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
वासुदेवमय़ः सोऽहं त्वय़ैवास्मि विनिर्मितः |
६७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
वासुदेववचः श्रुत्वा कुन्तीपुत्रो धनञ्जय़ः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेववचः श्रुत्वा गान्धारी वाक्यमव्रवीत् |
६१ क
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेववचः श्रुत्वा चेदिराजं व्यगर्हय़न् ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
वासुदेववचः श्रुत्वा तदानीं पाण्डवैः सह |
६४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेववचः श्रुत्वा धर्मराजो युधिष्ठिरः |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय २११
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवश्च पार्थश्च सहितौ परिजग्मतुः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवश्च भगवान्पृष्ठतोऽनुजगाम ह |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवश्च भूतानां चक्राणां च सुदर्शनम् ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवश्च वार्ष्णेय़ो धर्मराजश्च पाण्डवः ||
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवश्च वार्ष्णेय़ो यस्य नाथो व्यवस्थितः ||
३१ ख