आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
धृतराष्ट्र उवाच
कच्चिद्यजसि राजेन्द्र श्रद्धावान्पितृदेवताः |
६ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्रक्ताम्वरधराः खड्गहस्ताः स्वलङ्कृताः |
७७ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्राजगुणैः षड्भिः सप्तोपाय़ांस्तथानघ |
११ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्राजन्कृतान्येव कृतप्राय़ाणि वा पुनः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
कच्चिद्राजन्न निर्वेदादापन्नः क्लीवजीविकाम् ||
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
धृतराष्ट्र उवाच
कच्चिद्राजर्षिवंशोऽय़ं त्वामासाद्य महीपतिम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
कच्चिद्राजर्षिय़ातेन पथा गच्छसि पाण्डव ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
कच्चिद्राजा धृतराष्ट्रः सपुत्र; उपेक्षते व्राह्मणातिक्रमान्वै |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
कच्चिद्राजा धृतराष्ट्रः सपुत्रो; वुभूषते वृत्तिममात्यवर्गे |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
कच्चिद्राजा धृतराष्ट्रः सपुत्रो; वैचित्रवीर्यः कुशली महात्मा |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
कच्चिद्राजा व्राह्मणानां यथाव; त्प्रवर्तते पूर्ववत्तात वृत्तिम् |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्राष्ट्रे तडागानि पूर्णानि च महान्ति च |
६७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
कच्चिद्रोचेज्जनपदे कच्चिद्राष्ट्रे च मे यशः ||
१५ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
कच्चिद्वधूश्च गान्धारी न शोकेनाभिभूय़ते ||
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
धृतराष्ट्र उवाच
कच्चिद्वर्तसि पौराणीं वृत्तिं राजर्षिसेविताम् |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्वलस्य ते मुख्याः सर्वे युद्धविशारदाः |
३७ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्वलस्य भक्तं च वेतनं च यथोचितम् |
३८ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्वलेनानुगताः समानि विषमाणि च |
७२ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्विदित्वा पुरुषानुत्तमाधममध्यमान् |
६४ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्विद्याविनीतांश्च नराञ्ज्ञानविशारदान् |
४३ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्विनय़सम्पन्नः कुलपुत्रो वहुश्रुतः |
२९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
कच्चिद्विशुद्धभावोऽसि जातज्ञानो नराधिप ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्वीजं च भक्तं च कर्षकाय़ावसीदते |
६८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
कच्चिद्वुद्धिं दृढां कृत्वा चरस्यारण्यकं विधिम् |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
कच्चिद्वृत्तिं श्वशुरेषु भद्राः; कल्याणीं वर्तध्वमनृशंसरूपाम् |
३३ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्वृत्तिमुदासीने मध्यमे चानुवर्तसे ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
कच्चिद्वृत्तिर्वर्तते वै पुराणी; कच्चिद्भोगान्धार्तराष्ट्रो ददाति |
३८ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्वैद्याश्चिकित्साय़ामष्टाङ्गाय़ां विशारदाः |
८० क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिद्व्यसनिनं शत्रुं निशम्य भरतर्षभ |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
कच्चिन्न कुरवो भीतास्तत्यजुः सञ्जय़ाच्युतम् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
कच्चिन्न कुरुषे भावं पार्थ पापेषु कर्मसु ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिन्न तर्कैर्दूतैर्वा ये चाप्यपरिशङ्किताः |
१४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
कच्चिन्न तैरवाप्तोऽय़ं नृपैर्लोकोऽक्षय़ः शुभः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
१५०
युधिष्ठिर उवाच
कच्चिन्न दुःखैर्वुद्धिस्ते विप्लुता गतचेतसः ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
कच्चिन्न निहतः शूरो यथा न क्षत्रिय़ा हताः ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
कच्चिन्न निहतः शेते सौभद्रः परवीरहा ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
कच्चिन्न निहतः सूत पुत्रो दुःशासनो मम ||
४६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
कच्चिन्न नीचाचरितं कृतवांस्तात संय़ुगे |
४७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
कच्चिन्न परवित्तेषु गृध्यन्विपरितप्यसे ||
१४ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिन्न पाने द्यूते वा क्रीडासु प्रमदासु च |
५९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
कच्चिन्न पापं कथय़न्ति तात; ते पाण्डवानां कुरवः सर्व एव |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
२५३
वैशम्पाय़न उवाच
कच्चिन्न पापैः सुनृशंसकृद्भिः; प्रमाथिता द्रौपदी राजपुत्री |
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
कच्चिन्न भीमः पाञ्चालि किञ्चित्कृत्यं चिकीर्षति |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
कच्चिन्न भेदेन जिजीविषन्ति; सुहृद्रूपा दुर्हृदश्चैकमित्राः ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिन्न मानान्मोहाद्वा कामाद्वापि विशां पते |
८१ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिन्न मुच्यते स्तेनो द्रव्यलोभान्नरर्षभ ||
९४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
धृतराष्ट्र उवाच
कच्चिन्न रथभङ्गोऽस्य धनुर्वाशीर्यतास्यतः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
कच्चिन्न रैभ्यं पुत्रो मे गतवानल्पचेतनः |
५ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिन्न लुव्धाश्चौरा वा वैरिणो वा विशां पते |
६५ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कच्चिन्न लुव्धैश्चौरैर्वा कुमारैः स्त्रीवलेन वा |
६६ क