आदि पर्व
अध्याय
२१
सूत उवाच
काल आहूय़ वचनं कद्रूरिदमभाषत ||
३ ख
मौसल पर्व
अध्याय
९
व्यास उवाच
काल एव समादत्ते पुनरेव यदृच्छय़ा ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५०
भीष्म उवाच
काल एवात्र कालेन निग्रहानुग्रहौ ददत् |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
कालं कर्ता नरव्याघ्रः सम्प्राप्ते दक्षिणाय़ने ||
८८ ख
मौसल पर्व
अध्याय
७
वसुदेव उवाच
कालं कर्ता सद्य एव रामेण सह धीमता ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
२१९
मार्कण्डेय़ उवाच
कालं त्विमं परं स्कन्द व्रह्मणा सह चिन्तय़ ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४५
व्राह्मण उवाच
कालं परिमिताहारो यथोक्तं परिपालय़न् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
कालं पश्यति सुव्यक्तं पाणावामलकं यथा ||
१०४ ख
वन पर्व
अध्याय
३५
युधिष्ठिर उवाच
कालं प्रतीक्षस्व सुखोदय़स्य; पक्तिं फलानामिव वीजवापः ||
१८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२
विदुर उवाच
कालं प्राप्य महाराज न कश्चिदतिवर्तते ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
कालं प्राप्य महावाहो न कश्चिदतिवर्तते ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२८
भीष्म उवाच
कालं प्राप्यानुगृह्णीय़ादेष धर्मोऽत्र साम्प्रतम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
कालं वर्षसहस्रान्तं सस्मार मनुजाधिपः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
१४८
वैशम्पाय़न उवाच
कालं समनुवर्तन्ते यथा भावा युगे युगे |
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
वसुहोम उवाच
कालं सर्वेशमकरोत्संहारविनय़ात्मकम् |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय
१
महाभारत कथा
कालः कमलपत्राक्ष शंसैतत्पृच्छतो मम ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
कालः कर्ता विकर्ता च सर्वमन्यदकारणम् ||
७२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
कालः काले नय़ति मां त्वां च कालो नय़त्ययम् |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
कालः पचति भूतानि कालः संहरति प्रजाः |
१८८ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
कालः पचति भूतानि सर्वाण्येव महामते |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
व्यास उवाच
कालः पचति भूतानि सर्वाण्येवात्मनात्मनि |
२५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
श्वशुर उवाच
कालः परतरो दानाच्छ्रद्धा चापि ततः परा ||
६८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
कालः पर्याय़धर्मेण प्राणानादत्त देहिनाम् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
कालः प्रथममाय़ान्मां पश्चात्त्वामनुधावति |
६८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
कालः स एव कथितः क्रोधजेति मय़ा तव |
७० क
आदि पर्व
अध्याय
४९
सूत उवाच
कालः स चाय़ं सम्प्राप्तस्तत्कुरुष्व यथातथम् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
कालः सङ्क्षिपते सर्वाः प्रजा विसृजते पुनः |
१८९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
कालः सङ्ग्रसते योधान्धृष्टद्युम्नेन मोहितान् |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९१
भीष्म उवाच
कालः सम्पच्यते तत्र न कालस्तत्र वै प्रभुः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
कालः सर्वं समादत्ते कालः सर्वं प्रय़च्छति |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
कालः सर्वाणि भूतानि निय़च्छति परे विधौ ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
कालः सर्वेषु भूतेषु चरत्यविधृतः समः ||
१८९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
कालः स्थापय़ते सर्वं कालः पचति वै तथा ||
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
कालकण्ठः प्रभासश्च तथा कुम्भाण्डकोऽपरः |
६४ क
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
कालका सुरभिर्देवी सरमा चाथ गौतमी ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
कालकाक्षः सितश्चैव भूतलोन्मथनस्तथा ||
६४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
कालकार्यं न जानीषे कालपक्वोऽस्यसंशय़म् |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
कालकाय़ास्तु ये पुत्रास्तेषामष्टौ नराधिपाः |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
कालकीर्तिरिति ख्यातः पृथिव्यां सोऽभवन्नृपः ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
कालकूटं नवं तीक्ष्णं सम्भृतं लोमहर्षणम् ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
कालकूटं नवं तीक्ष्णं सम्भृतं लोमहर्षणम् ||
७२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
कालकेय़सहस्राणि चतुर्दश महारणे |
३९ क
वन पर्व
अध्याय
९९
लोमश उवाच
कालकेय़ैर्महाकाय़ैः समन्तादभिरक्षितम् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
कालकोपं महात्मानं शक्रसूर्यगुणोदय़म् |
४३ क
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
कालचक्रं च यद्दिव्यं नित्यमक्षय़मव्ययम् ||
२८ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
कालचक्रं च साक्षाच्च भगवान्हव्यवाहनः |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
कालचक्रं जगच्चक्रं युगचक्रं च केशवः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१८७
देव उवाच
कालचक्रं नय़ाम्येको व्रह्मन्नहमरूपि वै |
३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४५
व्रह्मो उवाच
कालचक्रप्रवृत्तिं च निवृत्तिं चैव तत्त्वतः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
कालचक्रमनाद्यन्तं भावाभावस्वलक्षणम् |
११ क