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शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
कुक्षौ चाप्यदधद्दृष्ट्वा तद्रेतः पुरुषर्षभ |
१० क
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
कुक्षौ तस्य नरव्याघ्र प्रविष्टः सञ्चरन्दिशः |
१०७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६७
भीष्म उवाच
कुक्षौ पुनर्भ्वां भार्याय़ां जनय़ित्वा चिरात्सुतान् |
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
कुक्षौ समुद्राश्चत्वारस्तस्मै तोय़ात्मने नमः ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
कुङ्कुण्यां चैव मनसा शनैर्धारय़तः स्म तौ ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
कुचरः पञ्च वर्षाणि चरेद्भैक्षं मुनिव्रतः ||
६२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६२
विदुर उवाच
कुञ्जभूतं गिरिं सर्वमभितो गन्धमादनम् |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जरं गिरिसङ्काशं राक्षसं प्रत्यचोदय़त् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७
युधिष्ठिर उवाच
कुञ्जरं चान्तरं कृत्वा मिथ्योपचरितं मय़ा |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ३१
सूत उवाच
कुञ्जरः कुररश्चैव तथा नागः प्रभाकरः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
कुञ्जरद्वीपिमहिषशार्दूलर्क्षमृगानपि |
१२३ क
आदि पर्व
अध्याय १४१
वैशम्पाय़न उवाच
कुञ्जरस्येव पादेन विनिष्पिष्टं वलीय़सः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
कुञ्जरस्येव सङ्ग्रामेऽपरिगृह्याङ्कुशग्रहम् |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
कुञ्जरांश्च रथांश्चैव खरोष्ट्रं वाहनानि च |
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जरांश्च हय़ांश्चैव पादातांश्च परन्तप |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जराः कुञ्जराञ्जघ्नुः पदातींश्च पदातय़ः ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जराः संन्यवर्तन्त युय़ुधानरथं प्रथि ||
४३ ख
विराट पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
कुञ्जराणां च नदतां व्यूढानीकेषु तिष्ठताम् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जराणां च नदतां सैन्यानां च प्रहृष्यताम् ||
२२ ख
विराट पर्व
अध्याय ४१
उत्तर उवाच
कुञ्जराणां च निनदा व्यूढानीकेषु तिष्ठताम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जराणां च पततां हय़ौघानां च भारत |
८२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जराणां च सङ्घातैर्युद्धमासीत्सुदारुणम् ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
कुञ्जराणां सहस्रे द्वे मत्तानां समुपाहृते ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९९
इन्द्र उवाच
कुञ्जराणां हय़ानां च वर्मिणां च समुच्चय़ः |
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जरान्कुञ्जरारोहानश्वानश्वप्रय़ाय़िनः |
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जराश्च हता राजन्प्राद्रवंस्ते समन्ततः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जराश्वनरान्सङ्ख्ये पातय़न्तः पतत्रिभिः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जराश्वमनुष्याणां प्राणान्तकरणी तदा ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जरेण प्रभिन्नेन सप्तधा स्रवता मदम् |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जरेणेव मत्तेन वीर सङ्ग्राममूर्धनि |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जरैर्दशसाहस्रैर्वङ्गानामधिपः स्वय़म् ||
१० ख
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
कुञ्जरैश्च गजारोहा यय़ुः शैलनिभैस्तथा |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
कुञ्जरैश्च सदा मत्तैः षट्सहस्रैः प्रहारिभिः |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
व्रह्मो उवाच
कुञ्जरो वाहनानां च सिंहश्चारण्यवासिनाम् ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
नकुल उवाच
कुटीं प्रवेशय़ामासुः क्षुधार्तमतिथिं तदा ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय १८२
वैशम्पाय़न उवाच
कुटीगता सा त्वनवेक्ष्य पुत्रा; नुवाच भुङ्क्तेति समेत्य सर्वे |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
नारद उवाच
कुटुम्वं पीडय़ित्वापि व्राह्मणाय़ महात्मने |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
कुटुम्वं पुत्रदारं च शरीरं द्रव्यसञ्चय़ाः |
३२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
कुटुम्वतन्त्रं विधिवत्सर्वमेव महाय़शाः ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७१
युधिष्ठिर उवाच
कुटुम्वतन्त्रे च तथा सहदेवं युधां पतिम् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
कुटुम्वमास्थिते त्यागं न पश्यामि नराधिप ||
२५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ११
शकुनिरु उवाच
कुटुम्वविधिनानेन यस्मिन्सर्वं प्रतिष्ठितम् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
कुटुम्वात्तस्य तद्द्रव्यं यज्ञार्थं पार्थिवो हरेत् ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
कुटुम्वानां च दातारस्ते नराः स्वर्गगामिनः ||
८९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
कुटुम्वार्थे समानीतं यत्किञ्चित्कार्यमेव तु |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६२
भीष्म उवाच
कुटुम्वार्थेषु दस्योः स साहाय़्यं चाप्यथाकरोत् |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१४
भीष्म उवाच
कुटुम्विको धर्मकामः सदास्वप्नश्च भारत |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९३
भीष्म उवाच
कुटुम्विको धर्मकामः सदास्वप्नश्च भारत ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७६
नारद उवाच
कुटुम्विनामग्रभुजस्त्यजेत्तद्राष्ट्रमात्मवान् ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
कुट्टापरान्ता द्वैधेय़ाः काक्षाः सामुद्रनिष्कुटाः ||
४७ ख