शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
कार्याणां गुरुतां वुद्ध्वा नानृतं किञ्चिदाचरेत् ||
२०३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०४
गुरुरु उवाच
कार्याणां तूपकरणे कालो भवति हेतुमान् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
कार्याणां सम्प्रसिद्ध्यर्थं तानुपाय़ान्निवोध मे ||
३ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
कार्याणामक्रिय़ाणां च स पार्थ पुरुषाधमः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
कार्यापेक्षा हि वर्तन्ते भावाः स्निग्धास्तु दुर्लभाः ||
८२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१
सर्प उवाच
कार्याभावे क्रिय़ा न स्यात्सत्यसत्यपि कारणे |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
कार्यार्थं कृतसन्धी तौ दृष्ट्वा मार्जारमूषकौ |
११४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
कार्यार्थं भोजनार्थेषु व्रतेषु कृतवाञ्श्रमम् ||
५३ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
कार्यार्थमभिनिर्याय़ यय़ौ भागीरथीं प्रति ||
२६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
कार्यार्थमुपसम्प्राप्ता देवतानां समीपतः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२४
भीष्म उवाच
कार्यार्थे निर्गतं चापि भर्तारं गृहमागतम् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५०
भीष्म उवाच
कार्यावेतौ हि कालेन धर्मो हि विजय़ावहः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
कार्ये खलु विपन्ने त्वां सोऽधर्मस्तांश्च पीडय़ेत् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
९७
वैशम्पाय़न उवाच
कार्ये त्वां विनिय़ोक्ष्यामि तच्छ्रुत्वा कर्तुमर्हसि ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९४
वामदेव उवाच
कार्ये महति यो युञ्ज्याद्धीय़ते स नृपः श्रिय़ः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
कार्ये विवदमानानां शक्तमर्थेष्वलोलुपम् ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
२७८
अश्वपतिरु उवाच
कार्येण खल्वनेनैव प्रेषिताद्यैव चागता |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
भीष्म उवाच
कार्येण तेन नभसो नागच्छत च मध्यतः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
कार्येणात्यर्थगाढेन वाह्लीकेषूषितं मय़ा |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
कार्येष्वखेदः कोशस्य तथैव च विवर्धनम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
कार्येष्वधिकृताः सम्यगकुर्वन्तो नृपानुगाः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
रुद्र उवाच
कार्येष्वहं त्वय़ा पुत्र सन्द्रष्टव्यः सदैव हि |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१०
गुरुरु उवाच
कार्यैरव्याहतमतिर्वैराग्यात्प्रकृतौ स्थितः |
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
कार्योपसेवी मित्रेषु मित्रद्वेषी नराधिप ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
कार्ष्णं वेदमिमं विद्वाञ्श्रावय़ित्वार्थमश्नुते |
२०५ क
आदि पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
कार्ष्णं वेदमिमं विद्वाञ्श्रावय़ित्वार्थमश्नुते ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
कार्ष्णाय़समय़ं घोरमृक्षचर्मावृतं महत् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
कार्ष्णाय़समय़ं घोरमृक्षचर्मावृतं महत् ||
३५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
कार्ष्णिश्चापि मुदा युक्तः प्रगृहीतशरासनः |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़न्तः कृषिं गोभिस्तथा वैश्याः क्षिताविह |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
कारय़न्ति कुमारांश्च योधमुख्यांश्च सर्वशः ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३७
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़न्तु च कुल्यानि शुभ्राणि च महान्ति च |
१३ क
विराट पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ामास कुशलैरन्नपानं सुशोभनम् ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९६
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ामास कौरव्यः शतशोऽथ सहस्रशः ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ामास चेन्द्रत्वमभिभूय़ दिवौकसः |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ामास दिव्यानि नानाप्रहरणान्युत |
३० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८६
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ामास धर्मात्मा तत्र तत्र यथाविधि ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ामास पूजार्थं तस्य दुर्योधनः सभाः |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८६
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ामास भीमः स विविधानि ह्यनेकशः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
नारद उवाच
कारय़ामास राज्यं स पितरि स्वर्गते विभुः |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ामास विधिवत्कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ||
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८६
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ामास विधिवन्मणिहेमविभूषितम् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१२४
लोमश उवाच
कारय़ामास शर्यातिर्यज्ञाय़तनमुत्तमम् ||
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
कारय़ामास शुभ्राणि भाजनानि सहस्रशः ||
२४ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
कारय़ामास सर्वाश्च क्रिय़ास्तस्य महात्मनः ||
१४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ित्वा क्रिय़ास्तेषां कुरुराजो युधिष्ठिरः |
४४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ित्वा स राजेन्द्रो व्राह्मणानिदमव्रवीत् ||
११ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़ित्वान्नपानानि यानान्याच्छादनानि च |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
कारय़िष्यन्ति च मुदा यथा चेदिपतिर्नृपः ||
२३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
कारय़ेथाश्च कर्माणि युक्ताय़ुक्तैरधिष्ठितैः ||
११ ख