कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
कुरुष्व समरे कर्म व्रह्मवन्धुरसि ध्रुवम् ||
३३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३२
विदुरो उवाच
कुरुष्व स्थानमस्थाने मृतान्सञ्जीवय़स्व नः ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
७
धृतराष्ट्र उवाच
कुरुष्वल्पावशिष्टेषु पाण्डवेषु च संय़ुगे ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
कुरुष्वाद्यात्मनो गुप्तिं कस्ते गोप्ता गते मय़ि |
३६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
कुरुष्वाधिरथे वीर मिषतां सर्वधन्विनाम् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
कुरुष्वानुग्रहं मेऽद्य सत्यमेतद्व्रवीमि ते |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४७
शौनक उवाच
कुरुष्वेह महाशान्तिं व्रह्मा शरणमस्तु ते ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९
इन्द्र उवाच
कुरुष्वैतद्यथोक्तं मे तक्षन्मा त्वं विचारय़ ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
२८४
व्राह्मण उवाच
कुरुष्वैतद्वचो मे त्वमेतच्छ्रेय़ः परं हि ते ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
कुरुष्वैतां पूर्वशीर्षां भव चोदङ्मुखः शुचिः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
कुरुष्वैनं यथान्याय़ं यदि शक्नोषि भारत ||
७८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
कुरुसंवरणादीनां भरतस्य च धीमतः ||
२३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२४
गान्धार्यु उवाच
कुरुसङ्क्रन्दनं घोरं युगान्तमनुपश्यसि ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
कुरुसाम्वन्धिकं कृत्वा प्रमथ्यैनं विशातय़ ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
कुरुसैन्यं ततः सर्वं भीमसेनमुपाद्रवत् |
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
कुरुसैन्याद्विमुक्तो वै सिंहो मध्याद्गवामिव |
२२ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
कुरुस्त्रिय़ः समासाद्य जग्मुराय़ोधनं प्रति ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
कुरुस्त्रिय़श्च ताः सर्वाः कुन्ती कृष्णा च द्रौपदी |
४१ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
कुरुस्त्रिय़ोऽभिगच्छन्ति तेन तेनैव दुःखिताः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
कुरुय़ोधवरा राजंस्तव पुत्रं परीप्सवः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
कुरूंश्च भीष्मप्रमुखान्राज्ञः सर्वांश्च पार्थिवान् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
कुरूंश्च विप्रमुख्यांश्च भोजय़ित्वा सहस्रशः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
कुरूंश्च सहितान्सर्वान्ये चैषां सैनिकाः स्थिताः |
५८ क
विराट पर्व
अध्याय
६४
उत्तर उवाच
कुरूंस्तान्प्रहसन्राजन्वासांस्यपहरद्वली ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
कुरूञ्शक्त्याल्पतरय़ा दुर्योधनमथाव्रवीत् ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां गर्जतां तत्र अविच्छेदकृता गिरः |
५६ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
कुरूणां चरितं कृत्स्नं पाण्डवानां च भारत ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां चापि तत्सैन्यं सागरप्रतिमं महत् ||
८१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां चापि सैन्येषु पाण्डवानां च भारत ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
कुरूणां पश्यतां प्राय़ात्पृथां द्रष्टुं पितृष्वसाम् ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च क्षय़ं घोरं महामतिः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च द्रोणद्यूतमवर्तत ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च परस्परवधैषिणाम् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७६
अर्जुन उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च प्रतिपत्स्व निरामय़म् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
५४
सूत उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च भवान्प्रत्यक्षदर्शिवान् |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४
धृतराष्ट्र उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च मान्यश्चासि पितामहः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च मुख्यशूरविनाशनम् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
५४
सूत उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च यथा भेदोऽभवत्पुरा |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च यथा युद्धमवर्तत ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५०
जनमेजय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च यद्यदासीद्विचेष्टितम् ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च यमराष्ट्रविवर्धनः ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
धृतराष्ट्र उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च युद्धं देवासुरोपमम् ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च लिप्सतां सुमहद्यशः ||
५५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च शमः स्यादिति भारत |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च संहृष्टानां विशां पते ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च सङ्ग्रामे विजिगीषताम् |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च समासाद्य परस्परम् ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च सुमहद्रोमहर्षणम् ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
धृतराष्ट्र उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च हैडिम्वे निहते तदा ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
कुरूणां पाण्डवैः सार्धं तत्सर्वं शृणु तत्त्वतः ||
२३ ख