शान्ति पर्व
अध्याय
३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
खण्डाभासं दक्षिणतस्तेऽपि संवत्सराय़ुषः ||
९ ग
वन पर्व
अध्याय
१२२
लोमश उवाच
खद्योतवदभिज्ञातं तन्मय़ा विद्धमन्तिकात् ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
खद्योतसङ्घैरिव खं दर्शनीय़ं व्यरोचत ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
खद्योतानां गणैरेव सम्पतद्भिर्यथा नभः ||
६८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
खद्योतैरावृतस्येव पर्वतस्य दिनक्षय़े ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
खद्योतैरावृतौ राजन्प्रावृषीव वनस्पती ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
खद्योतैरिव संय़ुक्तमन्तरिक्षं व्यराजत ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३७
वैशम्पाय़न उवाच
खनकेन तु तेनैव वेश्म शोधय़ता विलम् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
१६९
वसिष्ठ उवाच
खनताधिगतं वित्तं केनचिद्भृगुवेश्मनि |
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
खनीनेत्रस्तु विक्रान्तो जित्वा राज्यमकण्टकम् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
खमावृत्योदपानस्य कृकलासः स्थितो महान् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
खमुत्पपातोत्तमवेगय़ुक्त; स्ततोऽधिमेरौ सहसा निलिल्ये ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
खमुत्पेतुः सनगरा माय़ामास्थाय़ दानवीम् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
खमुल्लिखद्भिरेतैर्हि त्वय़ा शृङ्गशतैर्नृपः |
५० क
वन पर्व
अध्याय
२५९
मार्कण्डेय़ उवाच
खरः शूर्पणखा चैव तेषां वै तप्यतां तपः |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
खरकर्णी महाकर्णी भेरीस्वनमहास्वना ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
खरचर्मवासाः षण्मासं तथा मुच्येत किल्विषात् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
खरदूषणसंय़ुक्तं राक्षसानां पराभवम् ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय
२७२
मार्कण्डेय़ उवाच
खरस्यापचितिः सङ्ख्ये तां गच्छस्व महाभुज ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
खरा गोषु प्रजाय़न्ते रमन्ते मातृभिः सुताः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
खराणां पुरुषाणां च परिसङ्ख्या न विद्यते ||
१६ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१३३
मातो उवाच
खरीवात्सल्यमाहुस्तन्निःसामर्थ्यमहेतुकम् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
खरेणासीन्महद्वैरं जनस्थाननिवासिना ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
खरो जीवति मासांस्तु दश श्वा च चतुर्दश |
५२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
खरो जीवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
खरो जीवति वर्षे द्वे ततः शस्त्रेण वध्यते |
८७ क
वन पर्व
अध्याय
२५९
मार्कण्डेय़ उवाच
खरो धनुषि विक्रान्तो व्रह्मद्विट्पिशिताशनः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
खरो मृतो वलीवर्दः सप्त वर्षाणि जीवति ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
खरोष्ट्रमहिषांश्चैव यच्च किञ्चिदजाविकम् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
खरोष्ट्रमहिषाः सिंहा व्याघ्राः सृमरचिल्लिकाः |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
खरोष्ट्रवदनाश्चैव वराहवदनास्तथा ||
७४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
खरोष्ट्राश्वतरैश्चैव मत्ता यास्यामहे सुखम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१६
शक्र उवाच
खरय़ोनिमनुप्राप्तस्तुषभक्षोऽसि दानव |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
खलात्क्षेत्रात्तथागाराद्यतो वाप्युपपद्यते ||
११ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
खलीनान्यथ योक्त्राणि कशाश्च कनकोज्ज्वलाः |
५३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
खलोपहारं कुर्वाणास्ताडय़िष्याम भूय़सः ||
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
खशा एकाशनाज्योहाः प्रदरा दीर्घवेणवः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
खशिकाश्च तुखाराश्च पल्लवा गिरिगह्वराः ||
६६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
खशय़ा चुर्व्युटिर्वामा क्रोशनाथ तडित्प्रभा ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय
४५
धृतराष्ट्र उवाच
खाण्डवप्रस्थमद्यैव समानय़ युधिष्ठिरम् ||
५६ ख
सभा पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
खाण्डवप्रस्थमध्यास्ते धर्मराजो युधिष्ठिरः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
खाण्डवप्रस्थवासश्च तथा राज्यार्धशासनम् ||
८९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१७
वैशम्पाय़न उवाच
खाण्डवस्य विमोक्षार्थं प्रय़यौ हरिवाहनः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२०
वैशम्पाय़न उवाच
खाण्डवे तेन कालेन प्रजज्वाल दिधक्षय़ा ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१७
वैशम्पाय़न उवाच
खाण्डवे दह्यमाने तु भूतान्यथ सहस्रशः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
खाण्डवे पार्थसहितस्तोषय़ित्वा हुताशनम् |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
खाण्डवे युध्यमानस्य कः सहाय़स्तदाभवत् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
खाण्डवे येन भगवान्प्रत्युद्यातः सुरेश्वरः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
खाण्डवे सत्यसन्धेन भ्रात्रा तव नरेश्वर |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
११८
भीष्म उवाच
खातकव्यूहतत्त्वज्ञं वलहर्षणकोविदम् |
११ क