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अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
खादकस्य कृते जन्तुं यो हन्यात्पुरुषाधमः |
४४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
खादकार्थमतो हिंसा मृगादीनां प्रवर्तते ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
खादन्ति हस्तिनं न्यासे क्रव्यादा वहवोऽप्युत |
१८ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
खादन्तो नरमांसानि पिवन्तः शोणितानि च ||
१२७ ख
आदि पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
खादन्त्यो विविधान्भक्ष्यान्विदशन्त्यः फलानि च ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
खादन्नेको जपन्नेकः सर्पन्नेको युधिष्ठिर |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
खादाम पाटय़ामैनां तिलशः प्रविभज्य ताम् |
४७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
खादिरान्विल्वसमितांस्तावतः सर्ववर्णिनः ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९६
भृगुरु उवाच
खादेच्च पृष्ठमांसानि यस्ते हरति पुष्करम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९५
मनुरु उवाच
खाद्वै निवर्तन्ति नभाविनस्ते; ये भाविनस्ते परमाप्नुवन्ति ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
खानय़ामास परिखां केशवस्तत्र भारत |
७४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
खानय़ामास यः कोपात्पृथिवीं सागराङ्किताम् |
१२७ क
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
खिन्नस्तु वलवान्भीमो व्याय़ामाभ्यधिकस्तदा |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
खिलेषु हरिवंशश्च भविष्यच्च प्रकीर्तितम् ||
२३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
खुरशव्दनिनादैश्च कम्पय़न्तो वसुन्धराम् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
खुरशव्दनिपातैश्च तुमुलः सर्वतोऽभवत् ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
खुरशव्दश्च सुमहान्वाजिनां शुश्रुवे तदा |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
खुरशव्देन चाश्वानां नेमिघोषेण तेन च |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
खुराहता धरा राजंश्चकम्पे च ननाद च ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
खुरेषु क्रोशतो गृह्य नद्यां चिक्षेप दुर्वलान् ||
१० ग
शान्ति पर्व
अध्याय २०२
भीष्म उवाच
खुरैः सन्दारय़ामास मांसमेदोस्थिसञ्चय़म् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
तुलाधार उवाच
खे वाचं त्वमथाश्रौषीर्मां प्रति द्विजसत्तम ||
५० ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
खे वाय़ुः प्रलय़ं याति मनस्याकाशमेव च |
२९ क
वन पर्व
अध्याय २१
वासुदेव उवाच
खे विषक्तं हि तत्सौभं क्रोशमात्र इवाभवत् ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय २०२
नारद उवाच
खेचराण्यपि भूतानि जिग्यतुस्तीव्रविक्रमौ ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
खेदं परममाजग्मुस्ततस्तान्मोह आविशत् ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४३
भीष्म उवाच
खेदमास्थाय़ भुञ्जीत धर्ममास्थाय़ चैव हि ||
२४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
खेदितो द्रोणकर्णाभ्यां दौःशासनिवशं गतः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
खोरकः सौरभेय़ाणामूषरं पृथिवीतले |
५१ क
वन पर्व
अध्याय ८७
धौम्य उवाच
ख्यातं च सैन्धवारण्यं पुण्यं द्विजनिषेवितम् ||
१२ ग
आदि पर्व
अध्याय १६८
गन्धर्व उवाच
ख्यातं पुरवरं लोकेष्वय़ोध्यां मनुजेश्वरः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ६७
वृहदश्व उवाच
ख्यातः प्राज्ञः कुलीनश्च सानुक्रोशश्च त्वं सदा |
१४ क
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
ख्यातमद्यापि कौन्तेय़ तद्विद्धि भरतर्षभ ||
४७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
ख्याता दहदहा चैव तथा धमधमा नृप ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
ख्यातावुभौ रत्ननिधी तथा भारतमुच्यते ||
२७ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
ख्यातावुभौ रत्ननिधी तथा भारतमुच्यते ||
५२ ख
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
ख्याताश्चोशनसः पुत्राश्चत्वारोऽसुरय़ाजकाः ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
ख्यातास्त्वन्नामधेय़ाश्च भविष्यन्तीह शाश्वताः ||
५७ ग
वन पर्व
अध्याय ८३
नारद उवाच
ख्यातिं यास्यसि धर्मेण कार्तवीर्यार्जुनो यथा ||
११२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
सिद्ध उवाच
ख्यातिर्यस्याः खं दिवं गां च नित्यं; पुरा दिशो विदिशश्चावतस्थे |
८६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२०
नारद उवाच
ख्यातो दानपतिर्लोके व्याजहार नृपं तदा ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९२
अग्निरु उवाच
ख्यापिता पूर्वनिर्दिष्टा दानं वक्ष्याम्यतः परम् ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८९
भीष्म उवाच
ख्यापय़ामास राजेन्द्र पुत्रो जातो ममेति वै ||
१३ ख