आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
उपाचरद्घोरतपो जितात्मा; तदा कृशो वल्कलचीरवासाः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
उपाजगाम कौरव्यमक्षौहिण्या विशां पते ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
उपाजगाम भर्तारं भय़ाद्भर्तुः प्रवेपती ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७२
गन्धर्व उवाच
उपाजग्मुरमित्रघ्न रक्षसां जीवितेप्सय़ा ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
उपाजग्मुर्धनं गृह्य रत्नानि विविधानि च ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
उपाजह्रुः सहामात्यं द्रोणाय़ भरतर्षभाः ||
५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
उपाजह्रुर्यथान्याय़ं धृतराष्ट्रस्य पाण्डवाः ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
उपाजह्रुर्विशश्चैव शूद्राः शुश्रूषवोऽपि च |
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
उपाजह्रुश्च सलिलं पुष्पमूलफलं शुचि ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
उपाजह्रुस्तमास्थाय़ कर्णोऽप्यभ्यद्रवद्रिपून् |
८५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
उपाजिघ्रद्यथान्याय़ं सर्वपाप्मापहं तदा ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
उपाजिघ्रन्त च तदा मत्स्यास्तं हृष्टमानसाः |
१० ख
विराट पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
उपातिष्ठत कल्याणी कौरव्यं पतिमन्तिकात् ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
उपातिष्ठत धर्मज्ञो भैक्षकाले स देवलम् ||
९ ख
विराट पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
उपातिष्ठत पाञ्चाली वाशितेव महागजम् ||
६ ग
विराट पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
उपातिष्ठत मेघाभः पर्यङ्के सोपसङ्ग्रहे ||
११ ख
विराट पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
उपातिष्ठत सा सूर्यं मुहूर्तमवला ततः |
१९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
उपातिष्ठन्त ते सर्वे कौरवेन्द्रं यथा पुरा ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
उपातिष्ठन्त पशवः स्वय़ं तं संशितव्रतम् |
११५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
उपातिष्ठन्त राजानं धृतराष्ट्रं यथा पुरा ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
उपातिष्ठन्नथो वैद्याः शल्योद्धरणकोविदाः |
५१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
अर्जुन उवाच
उपात्तमस्त्रं घोरं वै तद्द्रष्टारो नरा युधि ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
विश्वामित्र उवाच
उपादाने खादने वास्य दोषः; कार्यो न्याय़ैर्नित्यमत्रापवादः |
८४ क
आदि पर्व
अध्याय
७
सूत उवाच
उपादानेऽर्चिषो यास्ते सर्वं धक्ष्यन्ति ताः शिखिन् ||
२० ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
उपादाय़ वलिं मुख्यं मामेव समुपस्थितम् ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०९
भीष्म उवाच
उपाध्याय़ं पितरं मातरं च; येऽभिद्रुह्यन्ति मनसा कर्मणा वा |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
उपाध्याय़ं पुरस्कृत्य कश्यपं मुनिसत्तमम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३११
भीष्म उवाच
उपाध्याय़ं महाराज धर्ममेवानुचिन्तय़न् ||
२३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६
वृहस्पतिरु उवाच
उपाध्याय़ं महावाहो यस्ते यज्ञं करिष्यति ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
उपाध्याय़मते युक्ताः स्थित्या धर्मार्थदर्शिनः ||
६५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भरद्वाज उवाच
उपाध्याय़मधः कृत्वा ऋचोऽध्येतु यजूंषि च |
६२ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
उपाध्याय़श्च प्रोषितः |
८९ ग
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
उपाध्याय़स्य ते कार्ष्णाय़सा दन्ताः |
७५ ग
वन पर्व
अध्याय
२८२
शिष्य उवाच
उपाध्याय़स्य मे वक्त्राद्यथा वाक्यं विनिःसृतम् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
उपाध्याय़स्य यः पापं शिष्यः कुर्यादवुद्धिमान् |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
उपाध्याय़ांश्च भृत्यांश्च भक्तांश्च भरतर्षभ |
७६ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
उपाध्याय़िनी च स्नाता केशानावपय़न्त्युपविष्टोत्तङ्को नागच्छतीति शापाय़ास्य मनो दधे ||
१६२ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
उपाध्याय़िनी ते ऋतुमती |
८९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७३
भीष्म उवाच
उपाध्याय़ेन गदितं मम चेदं युधिष्ठिर ||
१३ ग
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
उपाध्याय़ेनापि ते भक्षितं पूर्वमिति ||
१०४ घ
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
उपाध्याय़ेनापि ते भक्षितमिति |
१७१ 5
अनुशासन पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
उपानच्छत्रमेतद्वै सूर्येणेह प्रवर्तितम् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
उपानहौ च वस्त्रं च धृतमन्यैर्न धारय़ेत् |
५३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
उपानहौ प्रय़च्छेद्यो व्राह्मणेभ्यः समाहितः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
उपानृत्यञ्जगुश्चैव वृद्धं कुरुपितामहम् ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३८
वासुदेव उवाच
उपान्वारोहतु रथं कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
उपानय़न्ति पण्यानि उपधाभिरवञ्चिताः ||
१०४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
उपारमत तत्सैन्यं सरथाश्वनरद्विपम् |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
उपारमत पाण्डूनां विरता हि वरूथिनी ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
उपारमत पाण्डूनां सेना तव च भारत ||
२८ ख