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सभा पर्व
अध्याय ४१
भीष्म उवाच
गर्जत्यतीव दुर्वुद्धिः सर्वानस्मानचिन्तय़न् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१७
वलिरु उवाच
गर्जन्तं प्रतपन्तं च कमन्यं नागमिष्यति ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय २९४
वैशम्पाय़न उवाच
गर्जन्तं प्रतपन्तं च मामेवैष्यति सूतज ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय २९४
कर्ण उवाच
गर्जन्तं प्रतपन्तं च यतो मम भय़ं भवेत् ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
गर्जन्ति भेरीनिनदोन्मुखानि; मेघैर्यथा मेघगणास्तपान्ते ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय १२६
लोमश उवाच
गर्जन्निव महामेघः प्रमथ्य निहतः शरैः ||
४० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
गर्जन्निव महामेघो रथघोषेण वीर्यवान् |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
गर्जन्समय़वर्षीव गगने पाकशासनः ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
गर्जामि यद्यहं विप्र तव किं तत्र नश्यति ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय १६८
अर्जुन उवाच
गर्जितेन च दैत्यानां न प्राज्ञाय़त किञ्चन ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १४१
हिडिम्व उवाच
गर्जितेन वृथा किं ते कत्थितेन च मानुष |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
गर्जितोत्क्रुष्टसंनादाः शङ्खदुन्दुभिनिस्वनाः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
गर्जित्वा सूतपुत्र त्वं शारदाभ्रमिवाजलम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय ९४
लोमश उवाच
गर्तमेतमनुप्राप्ता लम्वामः प्रसवार्थिनः ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय ५८
शकुनिरु उवाच
गर्ते मत्तः प्रपतति प्रमत्तः स्थाणुमृच्छति |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
गर्दभः पञ्च वर्षाणि पञ्च वर्षाणि सूकरः |
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४
द्रुपद उवाच
गर्दभे मार्दवं कुर्याद्गोषु तीक्ष्णं समाचरेत् |
५ क
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
गर्भं सुषाव वामोरुः कुमारममितौजसम् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
गर्भमाहितवान्दिव्यं भास्करोपमतेजसम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
नारद उवाच
गर्भमूत्रपुरीषाणां स्वभावनिय़ता गतिः |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
गर्भवासेषु पच्यन्ते क्षाराम्लकटुकै रसैः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७४
भीष्म उवाच
गर्भशय़्यामुपादाय़ भुज्यते पौर्वदेहिकम् ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १७
सिद्ध उवाच
गर्भसङ्क्रमणे चापि मर्मणामतिसर्पणे |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
गर्भस्थस्यास्य वालस्य व्रह्मास्त्रेण निपातनम् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३८
वाय़ुरु उवाच
गर्भस्थान्व्राह्मणान्सम्यङ्नमस्यति किल प्रभुः ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
गर्भस्थाश्च म्रिय़न्तेऽत्र तथा जाता म्रिय़न्ति च ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १६९
गन्धर्व उवाच
गर्भस्थेन ततो लोके पराशर इति स्मृतः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
गर्भस्थैस्तु मही व्याप्ता पुनरेवाभवत्तदा ||
५४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ३
विदुर उवाच
गर्भस्थो वा प्रसूतो वाप्यथ वा दिवसान्तरः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५६
भीष्म उवाच
गर्भस्य हितमाधत्ते तथा राज्ञाप्यसंशय़म् ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
नारद उवाच
गर्भाच्चोद्विजमानानां क्रुद्धादाशीविषादिव |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८७
पराशर उवाच
गर्भात्सम्प्रतिपद्यते तदुभय़ं यत्तेन पूर्वं कृतम् |
४३ क
वन पर्व
अध्याय २००
व्याध उवाच
गर्भाधानसमाय़ुक्तं कर्मेदं सम्प्रदृश्यते |
३० क
आदि पर्व
अध्याय १७०
व्राह्मण्यु उवाच
गर्भानपि यदा यूय़ं भृगूणां घ्नत पुत्रकाः |
३ क
वन पर्व
अध्याय २१९
मार्कण्डेय़ उवाच
गर्भान्सा मानुषीणां तु हरते घोरदर्शना ||
२७ ग
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
गर्भिणी लभते पुत्रं कन्यां वा वहुभागिनीम् ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
गर्भिण्यो राजपुत्र्यश्च जनय़न्ति विभीषणान् |
२ क
वन पर्व
अध्याय २९९
वैशम्पाय़न उवाच
गर्भे वधार्थं दैत्यानामज्ञातेनोषितं चिरम् ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३६
सोम उवाच
गर्भेण दुष्यते कन्या गृहवासेन च द्विजः ||
१७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १५
व्यास उवाच
गर्भेषु पाण्डवेय़ानां विसृज्यैतदुपारम ||
३२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १५
द्रौणिरु उवाच
गर्भेषु पाण्डवेय़ानाममोघं चैतदुद्यतम् ||
३१ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
गर्भो मत्तेजसा युक्तो महागुणफलोदय़ः ||
६२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
गर्हितं निन्दितं चैव परिविष्टं समन्युना |
९ क
आदि पर्व
अध्याय २२१
शार्ङ्गका ऊचुः
गर्हितं मरणं नः स्यादाखुना खादता विले |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
गर्हितं महतामर्थे साङ्ख्यानां विदितात्मनाम् ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४७
भीष्म उवाच
गर्ह्यं भवान्गर्हय़ति निन्द्यं निन्दति मा भवान् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
गर्हय़न्ति नरान्सर्वान्वलस्थान्नृपतीनपि ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
गर्हय़न्तो धार्तराष्ट्रान्किं कुर्म इति चाव्रुवन् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
गर्हय़न्तोऽसकृद्भीष्मविदुरद्रोणगौतमान् |
११ ख
वन पर्व
अध्याय २६३
मार्कण्डेय़ उवाच
गर्हय़न्नेव रामस्तु त्वरितस्तं समासदत् |
१३ क