शल्य पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
गर्हय़न्पाण्डवं ज्येष्ठं निःश्वस्येदमथाव्रवीत् ||
६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
गर्हय़न्स्वानि कर्माणि द्विजं दृष्ट्वा तथागतम् ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
गर्हय़ामास तं चापि शशंस पुरुषर्षभम् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
गर्हय़ामास विद्वांसं पुरोहितमरिन्दमः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
गर्हय़ित्वा स काकुत्स्थं पपात भुवि मूर्छितः |
३८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
गर्हय़ित्वात्मनो वुद्धिं शकुनेः सौवलस्य च |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
गर्हय़िष्यन्ति नो नूनं विधवाः शोककर्शिताः ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७१
भगवानु उवाच
गर्हय़िष्यामि चैवैनं पौरजानपदेष्वपि |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
गर्हय़े पाण्डवांस्त्वेव युधि श्रेष्ठान्महावलान् |
५८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
गले गृहीत्वा क्षिप्तोऽस्मि वरुणेन महामुने |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२५६
वैशम्पाय़न उवाच
गले गृहीत्वा राजानं ताडय़ामास चैव ह ||
३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
गवां गोवृषभश्चैव स्त्रीणां पुरुष एव च ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
गवां च पतय़े नित्यं यज्ञानां पतय़े नमः ||
५० ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
गवां च व्राह्मणानां च श्रीमतां पुण्यकर्मणाम् ||
५२ ख
वन पर्व
अध्याय
९७
अगस्त्य उवाच
गवां दश सहस्राणि राज्ञामेकैकशोऽसुर |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
गवां देवोपरिष्टाद्धि समाख्यातं शतक्रतो ||
२१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
गवां निपानान्यन्यच्च विविधं पुण्यकर्म यत् ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
गवां निर्हारनिर्मुक्ताद्यावकात्तद्विशिष्यते ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय
३६
सूत उवाच
गवां प्रचारेष्वासीनं वत्सानां मुखनिःसृतम् |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
गवां प्रभावं परमं माहात्म्यं च सुरर्षभ ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
च्यवन उवाच
गवां प्रशस्यते वीर सर्वपापहरं शिवम् ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३०
व्यास उवाच
गवां भूमेश्च ये चापामोषधीनां च ये रसाः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
गवां मध्ये शुचिर्भूत्वा गोमतीं मनसा जपेत् |
४० क
वन पर्व
अध्याय
१०
व्यास उवाच
गवां मात पुरा तात तामिन्द्रोऽन्वकृपाय़त ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
गवां माता च गा देवी ददौ शतसहस्रशः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
२१९
मार्कण्डेय़ उवाच
गवां माता तु या प्राज्ञैः कथ्यते सुरभिर्नृप |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७७
भीष्म उवाच
गवां मूत्रपुरीषस्य नोद्विजेत कदाचन |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७०
नाचिकेत उवाच
गवां रसात्परमं नास्ति किं चि; द्गवां दानं सुमहत्तद्वदन्ति ||
५० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
गवां लोकं तथा पुण्यमाप्नुवन्ति च तेऽनघ ||
१७ ग
वन पर्व
अध्याय
१८४
सरस्वत्यु उवाच
गवां लोकं प्राप्य ते पुण्यगन्धं; पश्यन्ति देवं परमं चापि सत्यम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
गवां शतसहस्रं तु पात्रेभ्यः प्रतिपादय़न् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७९
वसिष्ठ उवाच
गवां शतसहस्रं तु यः प्रय़च्छेद्यथाविधि |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
गवां शतसहस्रं वै तत्कृते गृह्यतामिति ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
गवां शतसहस्रस्य फलं चैवाप्नुय़ान्महत् ||
१०१ ख
विराट पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
गवां शतसहस्राणि त्रिगर्ताः कालय़न्ति ते |
७ ख
विराट पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
गवां शतसहस्राणि श्रीमन्ति गुणवन्ति च |
२६ क
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
गवां शतसहस्राणि शय़नानां च भारत |
५१ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
गवां शतसहस्रेण राजसूय़शतेन च |
१०७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
गवां शतानामय़ुतमददं न च तेन वै ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
६५
वृहदश्व उवाच
गवां सहस्रं दास्यामि यो वस्तावानय़िष्यति |
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०५
धृतराष्ट्र उवाच
गवां सहस्रं भवते ददामि; दासीशतं निष्कशतानि पञ्च |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
गवां सहस्रदः प्रेत्य नरकं न प्रपश्यति |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
गवां सहस्रमश्वेऽश्वे सहस्रं गव्यजाविकम् ||
६० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
गवां सहस्रानुचरं दक्षिणामत्यकालय़त् ||
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
गवां सहस्रे सङ्ख्याता तदा सा पशुपैर्मम |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
गवां सहस्रेणैकैकं वाचय़ामास माधवः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
गवाढ्यः शाकदीक्षाभिः स्वर्गमाहुस्तृणाशनात् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७
भीष्म उवाच
गवाढ्यः शाकदीक्षाय़ां स्वर्गगामी तृणाशनः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
गवाढ्यो वहुपुत्रश्च दीर्घाय़ुश्च स जाय़ते ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
१७८
सर्प उवाच
गवादिभ्यस्तथाश्वेभ्यो देवत्वमपि दृश्यते ||
१३ ख