chevron_left  गात्रैश्चarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय १११
लोमश उवाच
गात्रैश्च गात्राणि निषेवमाणा; समाश्लिषच्चासकृदृश्यशृङ्गम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ८८
धौम्य उवाच
गाथा चरति लोकेऽस्मिन्गीय़माना द्विजातिभिः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
गाथा वा गीतिका वापि तस्य सम्पद्यते नृप ||
२७ ग
सभा पर्व
अध्याय ३८
शिशुपाल उवाच
गाथामप्यत्र गाय़न्ति ये पुराणविदो जनाः |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८८
भीष्म उवाच
गाथाश्चाप्यत्र गाय़न्ति पितृगीता युधिष्ठिर |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
गाथाश्चाप्यव्रवीद्विद्वान्गौतमो मुनिसत्तमः |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
गाधिः सदारः सम्प्राप्त ऋचीकस्याश्रमं प्रति ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
गाधिर्नाम महानासीत्क्षत्रिय़ः प्रथितो भुवि |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
गाधिर्नामाभवत्पुत्रः कौशिकः पाकशासनः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय ११५
अकृतव्रण उवाच
गाधीति विश्रुतो लोके वनवासं जगाम सः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
गाधीति विश्रुतो लोके सत्यधर्मपराय़णः ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
गाधेन च प्लवन्तश्च निमज्ज्योन्मज्ज्य चापरे ||
६३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५६
च्यवन उवाच
गाधेर्दुहितरं प्राप्य पौत्रीं तव महातपाः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
पुत्र उवाच
गाधोदके मत्स्य इव सुखं विन्देत कस्तदा |
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०३
गुरुरु उवाच
गान्धर्वं नारदो वेदं भरद्वाजो धनुर्ग्रहम् |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
गान्धर्वमस्त्रमाय़च्छद्रथमाय़ां च योजय़त् ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४४
भीष्म उवाच
गान्धर्वमिति तं धर्मं प्राहुर्धर्मविदो जनाः ||
५ ग
आदि पर्व
अध्याय ६७
दुःषन्त उवाच
गान्धर्वराक्षसौ क्षत्रे धर्म्यौ तौ मा विशङ्किथाः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ६७
दुःषन्त उवाच
गान्धर्वेण च मां भीरु विवाहेनैहि सुन्दरि |
४ क
आदि पर्व
अध्याय १६१
गन्धर्व उवाच
गान्धर्वेण च मां भीरु विवाहेनैहि सुन्दरि |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ६७
दुःषन्त उवाच
गान्धर्वेण विवाहेन भार्या भवितुमर्हसि ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय ६७
दुःषन्त उवाच
गान्धर्वो राक्षसश्चैव पैशाचश्चाष्टमः स्मृतः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १५८
गन्धर्व उवाच
गान्धर्व्या माय़या योद्धुमिच्छामि वय़सा वरम् ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
गान्धारकैः सप्तशतैश्चापशक्तिशरासिभिः ||
४२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
गान्धारमुख्यौ तरुणौ दर्शनीय़ौ महावलौ ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
गान्धारराजं सहदेवः क्षुधार्तो; महर्षभं सिंह इवाभ्यधावत् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
गान्धारराजः कितवः शल्यो भूरिश्रवास्तथा |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
गान्धारराजः शकुनिः पार्वतीय़ो; निकर्तने योऽद्वितीय़ोऽक्षदेवी |
२७ क
वन पर्व
अध्याय २२७
वैशम्पाय़न उवाच
गान्धारराजः शकुनिः प्रत्युवाच हसन्निव ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
गान्धारराजः शकुनिः प्राच्योदीच्याश्च सर्वशः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
गान्धारराजः शकुनिर्गान्धारैरभिरक्षितः |
४९ क
उद्योग पर्व
अध्याय २९
वासुदेव उवाच
गान्धारराजः शकुनिर्निकृत्या; यदव्रवीद्द्यूतकाले स पार्थान् |
३९ क
स्त्री पर्व
अध्याय २४
गान्धार्यु उवाच
गान्धारराजः शकुनिर्वलवान्सत्यविक्रमः |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय ५२
विदुर उवाच
गान्धारराजः शकुनिर्विशां पते; राजातिदेवी कृतहस्तो मताक्षः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
गान्धारराजः शकुनिस्त्रस्तस्त्रस्ततरैः सह |
७५ क
सभा पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
गान्धारराजः सुवलः शकुनिश्च महावलः ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय ६०
दुर्योधन उवाच
गान्धारराजः सुवलस्य पुत्र; स्तथैव दुःशासनमभ्यनन्दत् ||
३८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
गान्धारराजः स्ववलेन युक्तो; व्यवस्थितो योद्धुकामस्त्वदर्थे ||
९६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
गान्धारराजपुत्रस्तु पलाय़नकृतक्षणः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
गान्धारराजपुत्रोऽभूच्छकुनिः सौवलस्तथा |
९४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
गान्धारराजमाश्रित्य क्व ते धर्मस्तदा गतः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय २९७
वैशम्पाय़न उवाच
गान्धारराजरचितं सततं जिह्मवुद्धिना ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
गान्धारराजसहितश्छद्मद्यूतममन्त्रय़त् ||
१०० ग
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
गान्धारराजस्तु पुनर्वाक्यमाह ततो वली |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय २
वलदेव उवाच
गान्धारराजस्य सुतं मताक्षं; समाह्वय़ेद्देवितुमाजमीढः ||
९ ख
सभा पर्व
अध्याय ६८
भीमसेन उवाच
गान्धारविद्यया हि त्वं राजमध्ये विकत्थसे ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
गान्धारा मद्रकाश्चैव वाह्लीकाः केऽप्यचेतसः ||
५५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
गान्धाराः शकुनिप्राग्याः पार्वतीय़ा वसातय़ः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
गान्धाराः समरे शूरा रुरुधुः सहसौवलाः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०२
भीष्म उवाच
गान्धाराः सिन्धुसौवीरा नखरप्रासय़ोधिनः |
३ क