उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
जीवितं प्रिय़मत्यर्थमाय़ुष्कामः सदा द्विजः |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
सिद्ध उवाच
जीवितं प्रोच्यमानं तद्यथावदुपधारय़ ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९
युधिष्ठिर उवाच
जीवितं मरणं चैव नाभिनन्दन्न च द्विषन् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
जीवितं मरणं चैव राज्यमैश्वर्यमेव च |
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१३
जनक उवाच
जीवितं मरणं चैव व्रह्म सम्पद्यते तदा ||
३८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
व्राह्मण उवाच
जीवितं मरणं चोभे सुखदुःखे तथैव च |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
भीष्म उवाच
जीवितं मरणाच्छ्रेय़ो जीवन्धर्ममवाप्नुय़ात् ||
६१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३२
भीष्म उवाच
जीवितं यदवक्षिप्तं यथैव मरणं तथा ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
जीवितं यदि रक्षेय़ं लोको मां गर्हय़ेद्ध्रुवम् ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३७
व्यास उवाच
जीवितं यस्य धर्मार्थं धर्मोऽरत्यर्थमेव च |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
जीवितं रक्षत नृपाः शासनं गृह्यतामिति ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
जीवितं वहु मन्येऽहं जीवितं ह्यद्य दुर्लभम् |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
जीवितं वहु मन्येऽहं जीवितं ह्यद्य दुर्लभम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
मुनिरु उवाच
जीवितं सन्त्यजन्त्येके धनलोभपरा नराः |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
जीवितं हि तवेच्छामि श्रेय़ः साधारणं हि नौ ||
४८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११५
भीष्म उवाच
जीवितं हि परित्यज्य वहवः साधवो जनाः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
जीवितं ह्यप्यतिच्छिन्नः सन्त्यजत्येकदा नरः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
जीवितं ह्यातुरस्येव दुःखमन्तरवर्तिनः ||
४३ ख
सभा पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
जीवितप्रिय़तां मह्यं धिगिमां क्लेशभागिनीम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
जीवितस्य प्रदातारं कृतज्ञः को न पूजय़ेत् ||
१२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५८
गन्धर्व उवाच
जीवितस्य प्रदानेन प्रीतो विद्यां ददामि ते ||
५३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
जीवितस्य हि शेषेण तपस्तप्स्यामि दुश्चरम् |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
जीवितस्याद्य शेषेण चरिष्ये धर्ममुत्तमम् ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
जीविताच्चापि राज्याच्च हते कर्णे महारथे ||
३२ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
जीवितान्तकरं घोरं व्यसृजत्त्वरय़ान्वितः ||
७३ ख
वन पर्व
अध्याय
१८८
मार्कण्डेय़ उवाच
जीवितान्तकरा रौद्राः क्रूराः प्राणिविहिंसकाः |
५९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
जीवितान्तकरान्घोरान्समादत्त शिलीमुखान् ||
८ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
जीवितान्तकरैः क्रुद्धः क्रुद्धरूपं परन्तपः ||
१२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०९
मृग उवाच
जीवितान्तकरो भाव एवमेवागमिष्यति ||
२५ ग
आदि पर्व
अध्याय
११०
पाण्डुरु उवाच
जीवितान्तमनुप्राप्तः कामात्मैवेति नः श्रुतम् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
जीवितान्तमभिप्रेप्सुर्मर्मण्याशु जघान ह ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
११६
वैशम्पाय़न उवाच
जीवितान्ताय़ कौरव्यो मन्मथस्य वशं गतः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६९
पुत्र उवाच
जीवितार्थापनय़नैः कर्मभिर्न स वध्यते ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
जीवितार्थी कथं त्वद्य प्रार्थितः शत्रुभिस्त्रिभिः |
४१ क
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
जीवितुं चेच्छसे मूढ हेतुं मे गदतः शृणु ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
जीवितुं नोत्सहेरन्वै भ्रातरोऽस्य सहानुगाः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५१
भीष्म उवाच
जीवितुं यः स्वय़ं चेच्छेत्कथं सोऽन्यं प्रघातय़ेत् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१४५
व्राह्मण उवाच
जीविते परमं दुःखं जीविते परमो ज्वरः |
२१ क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
जीविते मरणान्ते च कस्माच्छोचसि भारत ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४५
व्राह्मण उवाच
जीविते वर्तमानस्य द्वन्द्वानामागमो ध्रुवः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
जीविते शिष्यमाणे च किमुत्थाय़ न धावसि ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१०
व्यास उवाच
जीवितेनापि कौरव्य मेनेऽभ्यधिकमात्मजम् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२८४
कर्ण उवाच
जीवितेनापि मे रक्ष्या कीर्तिस्तद्विद्धि मे व्रतम् ||
३८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
जीवितेऽप्यद्य सामर्थ्यं किमिवास्मासु सञ्जय़ |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
जम्वुक उवाच
जीवितो धर्ममासाद्य रामात्सत्यपराक्रमात् ||
६२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२३
कामन्द उवाच
जीवेच्च यदपध्वस्तस्तच्छुद्धं मरणं भवेत् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६८
व्राह्मण उवाच
जीवेषु परिवर्तन्ते दुःखानि च सुखानि च ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
जीवेषु परिवर्तन्ते दुःखानि च सुखानि च ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
जीवैर्ग्रस्तमिदं सर्वमाकाशं पृथिवी तथा |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
जीवो धर्मसमाय़ुक्तः शीघ्रं रेतस्त्वमागतः |
३२ क