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अनुशासन पर्व
अध्याय २५
भीष्म उवाच
गोकुलस्य तृषार्तस्य जलार्थे वसुधाधिप |
७ क
विराट पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
गोकुलानि महावाहो वीर गोपालकैः सह ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
गोकुले नित्यसंवृद्धा युद्धे परमकोविदाः |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
भीष्म उवाच
गोकोटिं स्पर्शय़ामास हिरण्यस्य तथैव च |
९३ क
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
गोखरोष्ट्रप्रय़ुक्तैश्च यानैश्च वहुभिर्वृतः ||
१९ ग
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
गोखरोष्ट्रमुखाश्चान्ये वृषदंशमुखास्तथा ||
७९ ख
वन पर्व
अध्याय ६२
वृहदश्व उवाच
गोखरोष्ट्राश्ववहुलं पदातिजनसङ्कुलम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५७
भीष्म उवाच
गोग्रहे यज्ञवाटस्य प्रेक्षमाणः स पार्थिवः ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
गोग्रहे यत्र पार्थेन निर्जिताः कुरवो युधि |
१३२ क
सभा पर्व
अध्याय ३८
शिशुपाल उवाच
गोघ्नः स्त्रीघ्नश्च सन्भीष्म कथं संस्तवमर्हति ||
१५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १४५
भीष्म उवाच
गोघ्नेष्वपि भवेदस्मिन्निष्कृतिः पापकर्मणः |
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
गोचरे वर्तते नित्यं निर्गुणो गुणसञ्ज्ञकः ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४२
व्यास उवाच
गोचरेभ्यो निवृत्तानि यदा स्थास्यन्ति वेश्मनि |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
गोचारिणोऽथाश्मकुट्टा दन्तोलूखलिनस्तथा |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
गोजाविमहिषैर्हीना परस्परहराहरा ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
भीष्म उवाच
गोजीविने न दातव्या तथा गौः पुरुषर्षभ ||
४९ ख
विराट पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
गोत्रं च नामापि च शंस तत्त्वतः; किं चापि शिल्पं तव विद्यते कृतम् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
गोत्रनामभिरन्योन्यं क्रन्दन्तो जीवितैषिणः ||
४३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
गोत्रनामभिरन्योन्यमाक्रन्दन्त ततो जनाः ||
९७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
गोत्रनामानि ख्यातानि शशंसुरितरेतरम् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय ७८
देवय़ान्यु उवाच
गोत्रनामाभिजनतो वेत्तुमिच्छामि तं द्विजम् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
गोत्रमात्रविदो राजा निवासं समपृच्छत ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०८
भीष्म उवाच
गोत्रस्य राजन्कुर्वन्ति गणसम्भेदकारिकाम् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
गोत्राणां नामधेय़ानां कुलानां चैव मारिष |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ७६
यय़ातिरु उवाच
गोत्रे च नामनी चैव द्वय़ोः पृच्छामि वामहम् ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७५
भीष्म उवाच
गोदः शीली निर्भय़श्चार्घदाता; न स्याद्दुःखी वसुदाता च कामी |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
गौतम उवाच
गोदमो दमगोऽधूमो दमो दुर्दर्शनश्च ते |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९७
भीष्म उवाच
गोदानानि विवाहाश्च तथा यज्ञसमृद्धय़ः ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
गोदाने विस्तरं धीमान्पप्रच्छ विनय़ान्वितः ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय ९
नारद उवाच
गोदावरी कृष्णवेण्णा कावेरी च सरिद्वरा |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
गोदावरी च वेण्णा च कृष्णवेणा तथाद्रिजा |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
गोदावरीं नर्मदां च वाहुदां च महानदीम् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
गोधनं च विराटस्य मोक्षितं यत्र पाण्डवैः ||
१३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०२
भीष्म उवाच
गोधानिमीलिताः केचिन्मृदुप्रकृतय़ोऽपि च |
११ क
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
गोपतिर्धृतराष्ट्रश्च सूर्यवर्चाश्च सप्तमः ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
गोपतिर्धृतराष्ट्रश्च सूर्यवर्चाश्च सप्तमः ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय १३
अर्जुन उवाच
गोपतिस्तालकेतुश्च त्वय़ा विनिहतावुभौ ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
गोपानां वहुसाहस्रैर्वलैर्गोवासनो वृतः ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
गोपाल इव दण्डेन यथा पशुगणान्वने |
५४ क
विराट पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
गोपालानां तु घोषेषु हन्यतां तैर्महारथैः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
गोपालिर्गोपतिर्ग्रामो गोचर्मवसनो हरः |
११२ क
वन पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
गोपाली सहजन्या च कुम्भय़ोनिः प्रजागरा |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
गोपाय़ति नरश्रेष्ठ प्रजाः सजडपण्डिताः ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय १४०
लोमश उवाच
गोपाय़येमं सुभगे गिरिभ्यः; सर्वाजमीढापचितं नरेन्द्रम् |
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७२
भीष्म उवाच
गोपाय़ितारं दातारं धर्मनित्यमतन्द्रितम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १९८
मार्कण्डेय़ उवाच
गोपुराट्टालकवतीं गृहप्राकारशोभिताम् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
गोपुराट्टालकोपेतं चतुर्द्वारं दुरासदम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय ११३
लोमश उवाच
गोपैश्च तैर्विधिवत्पूज्यमानो; राजेव तां रात्रिमुवास तत्र ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
गोप्ता निषधवंशस्य महाभागो महाद्युतिः ||
७४ ख
आदि पर्व
अध्याय १०५
वैशम्पाय़न उवाच
गोप्ता मगधराष्ट्रस्य दार्वो राजगृहे हतः ||
१० ख