भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
गजानां रुधिराक्तां तां गदां विभ्रद्वृकोदरः |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
गजानां वृंहतां चैव योधानां चाभिगर्जताम् |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
गजानां सृमराणां च शरभाणां च सर्वशः |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
गजानीकं च सम्प्रेक्ष्य मेघवृन्दमिवोद्यतम् |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
गजानीकं महाराज वध्यमानं महात्मभिः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
गजानीकं समासाद्य प्रेषय़ामास मृत्यवे ||
२७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
गजानीकं हतं दृष्ट्वा त्वां च प्राप्तमरिन्दम |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
गजानीकममित्राणामभितो व्यधमच्छरैः ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
गजानीके हते तस्मिन्पाण्डुपुत्रेण भारत |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
गजानीकेन भीमस्य ताववारय़तां दिशः ||
२५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
गजानेतान्हनिष्यामः पदातींश्चेतरांस्तथा ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
गजान्गजप्रय़न्तॄंश्च वैजय़न्त्याय़ुधध्वजान् |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
गजान्गजाः समासाद्य विषाणाग्रैरदारय़न् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
गजान्रथान्समारुह्य परस्यापि हय़ाञ्जनाः |
८३ क
आदि पर्व
अध्याय
१९१
वैशम्पाय़न उवाच
गजान्विनीतान्भद्रांश्च सदश्वांश्च स्वलङ्कृतान् |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
गजाभ्यां सम्प्रय़ुक्ताभ्यामासीन्नडवनं यथा |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
गजाभ्यामिव मत्ताभ्यां यथा नडवनं महत् ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
गजारोहवरैश्चापि तत्र तत्र पदातय़ः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
गजारोहा गजारोहान्नाराचशरतोमरैः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
गजारोहा गजैस्तूर्णं संनिपत्य महामृधे |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
गजारोहा हय़ारोहान्पातय़ां चक्रिरे तदा |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
गजारोहांश्च सगजान्पातय़ामास फाल्गुनिः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
गजारोहान्गजेभ्यश्च परेषां विदधद्भय़म् ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
गजाविव सुसंरव्धौ ज्वलिताविव पावकौ |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
गजाश्च नाराचनिपाततप्ता; महापताकाः शुभरुक्मकक्ष्याः ||
११७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
गजाश्च रथसङ्घाश्च वहुधा रथिभिर्हताः |
१२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
गजाश्च वहुला राजन्नराश्च जय़गृद्धिनः |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
गजाश्च सगजारोहाः पेतुरुर्व्यां महामृधे ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वकाय़प्रभवां नरदेहप्रवाहिनीम् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
गजाश्वदेहास्थिचय़ैः पर्वतैरिव सञ्चितम् |
४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
गजाश्वनरवीराणां निःसत्त्वैरभिसंवृतम् |
७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वमथितैश्चान्यैर्मही कीर्णाभवत्प्रभो ||
७२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वमनुजैर्भिन्नैः शस्त्रैः स्यन्दनभूषणैः ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वममितं हत्वा हताः सप्त महारथाः ||
२१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वरथपत्त्यौघास्तस्थुः शतसहस्रशः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वरथसंय़ुक्तो वृतश्चैव पदातिभिः |
८२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वरथसङ्घानां शरीरौघसमावृता |
५४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वरथसङ्घाश्च परिपेतुः समन्ततः |
१२९ क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वरथिभिर्हीनास्त्यक्तात्मानः पदातय़ः |
३७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
गजाश्वरथय़ोधानामावृतं रुधिराविलैः |
६ क
विराट पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
गजाश्वसादिभिस्तत्र शितवाणात्तजीवितैः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वसादिम्लेच्छानां पतितानां शतैः शरैः |
४६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
गजाश्वसादिवहुलाः पाण्डवं समुपाद्रवन् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
गजास्ते पन्नगाभोगैर्हस्तैर्भूरेणुरूषितैः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३८
सञ्जय़ उवाच
गजे गजे सप्त कृताः प्रदीपा; रथे रथे चैव दश प्रदीपाः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
गजेन पाण्डुपाञ्चालान्व्यधमत्पर्वतेश्वरः ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
गजेनाक्षिप्य वलिना रथः सञ्चूर्णितः क्षितौ ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
गजेनाघ्नन्गजं भीमः सिंहं सिंहेन चाभिभूः |
४७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
गजेन्द्रचर्मवसनास्तथा कृष्णाजिनाम्वराः |
८४ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
गजेन्द्रविक्रमो धीमान्दीर्घवाहुरमर्षणः |
५१ क