सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
घटजानवोऽतिह्रस्वाश्च नीलकण्ठा विभीषणाः ||
१२९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
घटतापि चिरं कालं निय़न्तुमिति मे मतिः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
घटते च यथाशक्ति भारद्वाजस्य नाशने ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
घटते विनय़स्तात राज्ञामेष नय़ः परः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
घटभासोत्कच इति मातरं सोऽभ्यभाषत |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
घटमानं यथाशक्ति कुर्वाणं च तव प्रिय़म् |
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४८
शौनक उवाच
घटमानः स्वकार्येषु कुरु नैःश्रेय़सं परम् ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
३९
सूत उवाच
घटमानस्य ते विप्र सिद्धिः संशय़िता भवेत् ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
घटमाना मदर्थेऽस्मिन्हताः शूरा जनाधिपाः |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
घटमानान्यथाशक्ति कुर्वाणान्कर्म दुष्करम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
घटस्व परय़ा शक्त्या मुञ्च त्वमपि साय़कान् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
घटाः स्थाल्यः कटाहाश्च पात्र्यश्च पिठरा अपि |
११८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
घटान्पात्रीः कटाहानि कलशान्वर्धमानकान् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६८
सञ्जय़ उवाच
घटामश्च यथाशक्ति त्वं तु नोऽद्य जुगुप्ससे ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कच भवांश्चैव दीर्घवाहुश्च सात्यकिः |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कच विजानीहि यत्त्वां वक्ष्यामि पुत्रक |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२८
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचं च समरे विद्ध्वा सिंह इवानदत् ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचं तथा शूरं राक्षसं क्रूरय़ोधिनम् |
४६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
घटोत्कचं महावाहुं कस्तं द्रोणादवारय़त् ||
६९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५७
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचं महावीर्यं महावुद्धिर्जनार्दनः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचं यदा कर्णो विशेषय़ति नो नृप ||
३० ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१४९
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचं रणे क्रुद्धो मुष्टिनाभ्यहनद्दृढम् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचं रणे यत्तं निघ्नन्तं तव वाहिनीम् |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४९
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचं रणे रोषान्निष्पिपेष महीतले ||
२३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
घटोत्कचं राक्षसेन्द्रं वकभ्रातरमेव च |
३७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
घटोत्कचं राक्षसेन्द्रं शक्रशक्त्याभिजघ्निवान् ||
७१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४९
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचं शरव्रातैर्नानालिङ्गैः समार्दय़त् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचं समाश्रित्य पाण्डवैर्युधि निर्जितः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचं समुत्सृज्य भीमसेनं समाह्वय़त् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१७४
वैशम्पाय़न उवाच
घटोत्कचं सानुचरं विसृज्य; ततोऽभ्ययुर्यामुनमद्रिराजम् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४९
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचः प्रचिच्छेद प्राणदच्चातिदारुणम् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचप्रमुक्तेन सिंहनादेन भीषिताः |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचप्रय़ुक्तेति नातिष्ठन्त विमोहिताः |
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचप्रय़ुक्तेन सिंहनादेन भीषिताः |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचमतिक्रम्य विभेद दशभिः शरैः ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचमभिक्रुद्धं विभेद दशभिः शरैः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचमसम्भ्रान्तं राक्षसैर्वहुभिर्वृतम् ||
७४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचमसम्भ्रान्तं राक्षसैर्वहुभिर्वृतम् ||
७४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचरथं तूर्णं छादय़ामास पत्रिभिः ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४९
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचशरैर्नुन्ना तथैव कुरुवाहिनी |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
घटोत्कचश्च धर्मात्मा स्मृतमात्रः पितुस्तदा |
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचसुतः श्रीमान्भिन्नाञ्जनचय़ोपमः |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचस्ततः कर्णं विद्ध्वा पञ्चभिराशुगैः |
७७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचस्ततस्तूर्णं दृष्ट्वा चक्रं निपातितम् |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचस्ततो माय़ां ससर्जान्तर्हितः पुनः ||
६७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचस्ततो माय़ां ससर्जान्तर्हितः पुनः ||
६६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचस्ततो राजन्भगदत्तं महारणे |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचस्तथा शूरं राक्षसं तमलाय़ुधम् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
घटोत्कचस्तु तद्धत्वा रक्षो वलवतां वरम् |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
वासुदेव उवाच
घटोत्कचस्तु राधेय़ं प्रत्युद्यातु महावलः |
३५ क