कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
चकार समरे भूमिं शोणितौघतरङ्गिणीम् ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
वासुदेव उवाच
चकार सर्वं कौन्तेय़ ततो मोक्षमवाप्तवान् ||
४२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
चकार सर्वं राजेन्द्र यथोक्तं व्रह्मवादिना |
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
धृतराष्ट्र उवाच
चकार सर्वभावेन यद्वत्स मनसेच्छति ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८९
भीष्म उवाच
चकार सर्वय़त्नेन व्रुवाणा पुत्र इत्युत |
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
चकार सात्यकी राजंस्तत्र कर्मातिमानुषम् |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
चकार साहाय़्यमथार्जुनस्य; विष्णुर्यथा वृत्रनिषूदनस्य ||
७७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
चकाराङ्गिरसां श्रेष्ठे धनुर्वेदं गुरौ तव ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
चकाराचार्यकं तत्र कुन्तीपुत्रो धनञ्जय़ः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
चकाराभिप्रवेशाय़ मतिं स नृपतिस्तदा ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७८
वैशम्पाय़न उवाच
चकाशिरे पर्वतराजकन्या; मुमां यथा देवगणाः समेताः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
चकोरनेत्रस्ताम्राक्षो द्विषतामघवर्धनः ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
चकोराः शतपत्राश्च मत्तकोकिलशारिकाः |
७३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५४
भीष्म उवाच
चकोरान्वानरान्हंसान्सारसांश्चक्रसाह्वय़ान् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
चकोरैः शतपत्रैश्च भृङ्गराजैस्तथा शुकैः |
४७ क
वन पर्व
अध्याय
१०७
लोमश उवाच
चकोरैरसितापाङ्गैस्तथा पुत्रप्रिय़ैरपि ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१७५
वैशम्पाय़न उवाच
चकोरैश्चक्रवाकैश्च पक्षिभिर्जीवजीवकैः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
चक्रं चापश्यत्षड्भिः कुमारैः परिवर्त्यमानम् |
१४८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
चक्रं तद्वासुदेवस्य माय़या वर्तते विभो ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
चक्रं दिव्यं सहस्रारमगृह्णाद्व्यथितो भृशम् ||
४२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
विशोक उवाच
चक्रं यशो वर्धय़त्केशवस्य; सदार्चितं यदुभिः पश्य वीर ||
२८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
चक्रं विक्रमकं चैव सङ्क्रमं च महावलम् |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
चक्रं शतसहस्रारमगृह्णाद्व्यथितो भृशम् ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
चक्रकूर्मां गदानक्रां शरक्षुद्रझषाकुलाम् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
चक्रको मारुतन्तव्यो वातघ्नोऽथाश्वलाय़नः ||
५३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
चक्रचक्रावलीजुष्टा त्रिवेणूदण्डकावृता ||
३१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
चक्रतुः कुरुवीरस्य गान्धार्याश्चाविदूरतः ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
चक्रतुः सुमहद्युद्धं शरशक्तिसमाकुलम् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
भीष्म उवाच
चक्रतुर्वेदसम्वद्धास्तच्छेषकृतलक्षणाः ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९८
वैशम्पाय़न उवाच
चक्रतुश्च यथान्याय़ं कुशलप्रश्नसंविदम् ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
२६२
मार्कण्डेय़ उवाच
चक्रतुस्तत्तथा सर्वमुभौ यत्पूर्वमन्त्रितम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
चक्रतुस्तौ कथाशीलौ शुचिसंहृष्टमानसौ |
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
चक्रनेमिप्रणुन्ना च कम्पते कर्ण मेदिनी |
४० क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
चक्रप्रभृतिभिर्घोरैर्दिव्यैः पुरुषविग्रहैः |
३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
चक्रमप्रतिचक्रेण भुवि नान्योऽभिपद्यते ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१६
अर्जुन उवाच
चक्रमस्त्रं च वार्ष्णेय़ो विसृजन्युधि वीर्यवान् |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षं जघानाशु मद्रराजस्य पार्थिव ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षः कुमारस्तु पाञ्चालानां यशस्करः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षमपामृद्नात्कुमारं द्विजसत्तमः ||
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
चक्ररक्षश्च शूरश्च शोणाश्वो नाम विश्रुतः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षावपि तदा युधामन्यूत्तमौजसौ |
४७ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षाविमौ शूरौ मम माद्रवतीसुतौ |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षे हते शल्यः पाण्डवेन महात्मना |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
धृतराष्ट्र उवाच
चक्ररक्षौ च पाञ्चाल्यौ तन्ममाचक्ष्व सञ्जय़ ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षौ ततस्तस्य प्राणुदन्निशितैः शरैः ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षौ ततस्तस्य भीमसेनधनञ्जय़ौ |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षौ तु कर्णस्य पुत्रौ मारिष दुर्जय़ौ |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षौ तु पाञ्चाल्यावर्जुनस्य पदानुगौ |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०५
द्रोण उवाच
चक्ररक्षौ तु पाञ्चाल्यौ युधामन्यूत्तमौजसौ |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
चक्ररक्षौ तु पाञ्चाल्यौ युधामन्यूत्तमौजसौ |
३० क