आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
चुक्रोध वलवच्चापि पाण्डवस्तस्य भूपतेः |
११ क
वन पर्व
अध्याय
९४
लोमश उवाच
चुक्रोध सोऽसुरस्तस्य व्राह्मणस्य ततो भृशम् ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
चुक्रोश कन्याभिक्षार्थी तिस्रो वाचः शनैरिव ||
३० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
चुक्रोश कुन्ती दुःखार्ता सर्वाश्च भरतस्त्रिय़ः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
चुक्षुभुश्च महाराज सागरा मकरालय़ाः |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
चुक्षुभे भरतश्रेष्ठ तिमिनेव नदीमुखम् ||
२८ ख
सभा पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
चुक्षुभे सा सभा राजन्राज्ञां सञ्जज्ञिरे कथाः |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
चुक्षोभय़िषुरभ्यागादङ्गो मातङ्गमास्थितः ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
चुचुम्वतुः शङ्खवरौ नृणां वरौ; वराननाभ्यां युगपच्च दध्मतुः ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
चूडामणिषु निष्केषु भूषणेष्वसिचर्मसु |
३५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
चूडामणीन्नरेन्द्राणां विचित्राः काञ्चनस्रजः |
४९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
चूडालाः कर्णिकालाश्च प्रकृशाः पिठरोदराः ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
चूतारामो यथा भग्नः पञ्चवर्षफलोपगः |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
चूर्णितं पातय़ामास मोहय़न्निव माधवम् |
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
चूर्णिताक्षिप्तदग्धानां वज्रानिलहुताशनैः |
१८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
६
युधिष्ठिर उवाच
चूर्णीकृता वलवता स वलार्थी श्रितः स्त्रिय़म् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
चूर्णीकृता विशीर्यन्ती पपात वसुधातले ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
चूर्ण्यमानेऽश्मवर्षे तु पावकः समजाय़त |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५३
सञ्जय़ उवाच
चूर्णय़ामास वेगेन विसृष्टा भीमकर्मणा ||
१४ ख
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
चेकितान उपासङ्गं धनुः काश्य उपाहरत् |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
चेकितानं च तत्रैव युय़ुधानं च सात्यकिम् ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
चेकितानं तथाभूतं दृष्ट्वा समरदुर्मदम् |
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
चेकितानं परं शक्त्या योधय़ामास भारत ||
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
चेकितानं महेष्वासं कस्तं द्रोणादवारय़त् ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
चेकितानं रणे क्रुद्धं भीष्मं प्रति जनेश्वर |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
चेकितानं रणे यत्तं राजन्विव्याध पत्रिभिः ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
चेकितानं हतं दृष्ट्वा पाण्डवानां महारथाः |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
चेकितानः सत्यधृतिः पाण्डवानां महारथौ |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
चेकितानः सोमदत्तं द्वैरथे योद्धुमिच्छति |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
चेकितानरथं दृष्ट्वा विद्रुतं हतसारथिम् |
६७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
चेकितानश्च वलवान्धर्मराजश्च सुव्रतः ||
२६ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
चेकितानश्च विक्रान्तो धृष्टकेतुश्च चेदिपः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
चेकितानश्च सङ्क्रुद्धो युय़ुत्सुश्च महारथः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
चेकितानस्ततः क्रुद्धः पुनश्चिक्षेप तां गदाम् |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
चेकितानस्ततः खड्गं कोशादुद्धृत्य भारत |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
चेकितानस्तु वार्ष्णेय़ो गौतमं रथिनां वरम् |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
चेकितानस्तु समरे कृपमेवान्वय़ोधय़त् |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
चेकितानो धृष्टकेतुर्युय़ुत्सुश्चार्दय़न्द्विपम् ||
४६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
चेकितानो महावाहुः कुन्तिभोजश्च वीर्यवान् |
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
चेकितानोऽनुविन्देन युय़ुधे त्वतिभैरवम् |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
चेकितानोऽपि संरव्धः सुशर्माणं महाहवे |
५९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
चेतनाचेतनस्यास्य जङ्गमस्थावरस्य च |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय
३८
शिशुपाल उवाच
चेतनारहितं काष्ठं यद्यनेन निपातितम् |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१८
व्राह्मण उवाच
चेतनावत्सु चैतन्यं समं भूतेषु पश्यति ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२८
व्यास उवाच
चेतनावन्धुरश्चारुराचारग्रहनेमिवान् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०२
जनक उवाच
चेतनावांस्तथा चैकः क्षेत्रज्ञ इति भाषितः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
चेतनावान्नरो हन्याद्यस्य नासुषिरं शिरः ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
वसिष्ठ उवाच
चेतनेन समेतस्य पञ्चविंशतिकस्य च |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
५८
दमय़न्त्यु उवाच
चेतसा त्वपकृष्टेन मां त्यजेथा महापते ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
चेतसा सर्वकर्माणि मय़ि संन्यस्य मत्परः |
५७ क