शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
चेतो भवत्यविश्वस्तं पूर्वं त्रासय़ते वलात् ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९१
वसिष्ठ उवाच
चेतय़ंश्चेतनो नित्यः सर्वमूर्तिरमूर्तिमान् ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
२३८
दुर्योधन उवाच
चेतय़ानो हि को जीवेत्कृच्छ्राच्छत्रुभिरुद्धृतः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११८
कीट उवाच
चेतय़ामि महाप्राज्ञ तस्मादिच्छामि जीवितुम् ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
चेदिकानवधीद्वीरः शतशोऽथ सहस्रशः ||
३४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
चेदिकारूषमत्स्यानां केकय़ानां च यद्वलम् |
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
चेदिकाशिकरूषांश्च कुरुलक्ष्म सुधास्यति ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९७
वैशम्पाय़न उवाच
चेदिकाशिकरूषाणां नेतारं दृढविक्रमम् |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
चेदिकाशिकरूषाणां सहस्राणि चतुर्दश |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
चेदिकाशिकरूषाणां सहस्राणि चतुर्दश |
७३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
चेदिकाशिकरूषेषु पाञ्चालेषु च भारत |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
चेदिकाशिकरूषैश्च पौरवैश्चाभिसंवृतः ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
चेदिकेकय़पाञ्चाला यमौ मत्स्याश्च दंशिताः |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
चेदिपश्चित्रकेतुश्च सङ्क्रुद्धाः सर्व एव ते ||
३९ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
चेदिपाञ्चालपाण्डूनामकरोत्कदनं महत् ||
३९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
चेदिपाण्डवपाञ्चालाः सात्यकिश्च महारथः |
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
चेदिपो धृष्टकेतुश्च माद्रीपुत्रौ घटोत्कचः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
चेदिपो वसुदानश्च दशार्णाधिपतिस्तथा |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
चेदिभिश्च सपाञ्चालैः सहितो वानरध्वजः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
चेदिमत्स्यकरूषाश्च भीमसेनपुरोगमाः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
चेदिराजं च विक्रान्तं राजसेनापतिं वली |
१३ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
चेदिराजं हृषीकेश हतं सवलवान्धवम् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
चेदिराजः शरानस्यन्क्रुद्धो द्रोणादवारय़त् ||
४७ ख
सभा पर्व
अध्याय
४०
भीष्म उवाच
चेदिराजकुले जातस्त्र्यक्ष एष चतुर्भुजः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५६
वासुदेव उवाच
चेदिराजश्च विक्रान्तः प्रत्यक्षं निहतस्तव ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
चेदिराजस्तु सङ्क्रुद्धो वाह्लीकं नवभिः शरैः |
३७ क
सभा पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
चेदिराजस्य कौन्तेय़ सर्वेषां च महीक्षिताम् ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
चेदिराजोऽपि तच्छ्रुत्वा पाण्डवस्य चिकीर्षितम् |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
चेदिराजोऽपि समरे पौरवं पुरुषर्षभम् |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
चेदिराट्समरे राजन्नुलूकं समभिद्रवत् |
७५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
चेदिवत्साः करूषाश्च भोजाः सिन्धुपुलिन्दकाः |
३९ क
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
चेदींश्च नृपशार्दूल द्रौपदेय़ांश्च संय़ुगे |
२३ क
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
चेदीनामाधिपत्ये च पुत्रमस्य महीपतिम् |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
चेदय़श्च महाभागा धर्मं जानन्ति शाश्वतम् |
६१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
चेदय़श्च महाराज सृञ्जय़ाः सोमकास्तथा |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
चेदय़श्च महेष्वासा द्रोणमेवाभ्ययुर्युधि ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२३
धृतराष्ट्र उवाच
चेदय़श्चापरे वङ्गा मामेव समुपाश्रिताः ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
चेदय़श्चैव मत्स्याश्च दृष्टपूर्वास्तथैव नः |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
चेरतुः कदनं सङ्ख्ये कुर्वन्तौ सुमहावलौ ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
चेरतुर्दर्शय़न्तौ च प्रार्थय़न्तौ परस्परम् ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
चेरतुर्निर्मलगदौ समदाविव गोवृषौ ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
चेरुरुच्चावचाकारान्देशान्विषमसङ्कटान् |
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
चेरुर्भैक्षं तदा ते तु सर्व एव विशां पते |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
चेलकम्वलवेश्मानि विचित्राणि महान्ति च ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
चेलमन्नं सुखं शय़्यां निवातं चोपभुञ्जते ||
१४ ख
सभा पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
चेलावेधांश्चापि चक्रुर्नदन्तो; हा हेत्यासीदपि चैवात्र नादः |
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
चेलावेधांस्ततश्चक्रुर्हाहाकारांश्च सर्वशः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
भीष्म उवाच
चेलुः क्षरन्तो रुधिरं नागा इव च ते शराः ||
२९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
चेष्टन्ते विविधाश्चेष्टा हितमित्येव जानते ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
चेष्टन्तो विविधाश्चेष्टा व्यदृश्यन्त महाहवे ||
४ ख