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द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
ते तस्य कवचं भित्त्वा हेमचित्रं महाधनम् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
ते तस्य जघ्निरे वाहान्भल्लेनास्याच्छिनद्धनुः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
ते तस्य विविशुस्तूर्णं काय़ं निर्भिद्य मर्मणि |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
ते तस्य वीर्यं च वलं च दृष्ट्वा; विद्यावलं वाहुवलं तथैव |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय ९
नारद उवाच
ते तस्यां वरुणं देवं धर्मपाशस्थिताः सदा |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १०१
वैशम्पाय़न उवाच
ते तस्यावसथे लोप्त्रं निदधुः कुरुसत्तम |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
ते तां सेनामवालोक्य पाण्डुपुत्रस्य सैनिकाः |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय १३१
वैशम्पाय़न उवाच
ते तात यदि मन्यध्वमुत्सवं वारणावते |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५६
दुर्योधन उवाच
ते तानावारय़िष्यन्ति ऐणेय़ानिव तन्तुना ||
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
ते तु कर्णमवच्छाद्य व्यतिष्ठन्त यथा परे ||
७८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
ते तु कृत्वा महत्कर्म श्रान्ताश्च वलवद्रणे |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
ते तु क्रुद्धा महाराज पाण्डवस्य महारथम् |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
ते तु क्रुद्धा महेष्वासा द्रौपदेय़ाः प्रहारिणः |
३५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
ते तु खिन्ना विवादेन ऋषय़स्तत्त्वदर्शिनः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ते तु चापवलोद्धूताः शातकुम्भविभूषिताः |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
ते तु तं पुरुषव्याघ्रं व्याघ्रा इव महारथाः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
ते तु तं रथवंशेन महता पर्यवारय़न् |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
ते तु तं वै समासाद्य परिवव्रुः समन्ततः ||
३० ग
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
ते तु तं समरे राजन्विव्यधुर्निशितैः शरैः ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
ते तु तत्र चिरं कालं विलप्य च महारथाः |
६० क
वन पर्व
अध्याय २२८
धृतराष्ट्र उवाच
ते तु तत्र नरव्याघ्राः समीप इति नः श्रुतम् |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
नारद उवाच
ते तु तत्रैव राजानः सिद्धाश्चाप्सरसस्तथा |
५ क
वन पर्व
अध्याय १८२
वैशम्पाय़न उवाच
ते तु तत्सर्वमखिलमाख्याय़ास्मै यथातथम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५५
तुलाधार उवाच
ते तु तद्व्रह्मणः स्थानं प्राप्नुवन्तीह सात्त्विकाः ||
२३ ख
विराट पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
ते तु दृष्ट्वा तमाविद्धं भीमसेनेन पादपम् |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
ते तु दृष्ट्वा पुरं तच्च स्कन्धावारं च पाण्डवाः |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
ते तु दृष्ट्वा महेष्वासा भूतले पतितं नृपम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
ते तु दृष्ट्वा शिरो राजन्भारद्वाजस्य तावकाः |
५५ क
वन पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
ते तु दृष्ट्वैव कौन्तेय़मजिनैः परिवारितम् |
११ क
वन पर्व
अध्याय १८२
वैशम्पाय़न उवाच
ते तु दृष्ट्वैव तमृषिं विस्मय़ं परमं गताः |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
ते तु दृष्ट्वैव राजानं जरासन्धं नरर्षभाः |
३३ क
स्त्री पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
ते तु दृष्ट्वैव राजानं प्रज्ञाचक्षुषमीश्वरम् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
ते तु देवा भय़ोद्विग्नाः काव्यादुशनसस्तदा |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
ते तु नामाङ्किताः पीताः कालज्वलनसंनिभाः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
ते तु पङ्क्तीकृता द्रौणिं शरा विविशुराशुगाः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
ते तु पाटलपुष्पाणां समवर्णा हय़ोत्तमाः |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
ते तु पाण्डवमासाद्य भीमसेनं महावलम् |
४१ क
मौसल पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
ते तु पानमदाविष्टाश्चोदिताश्चैव मन्युना |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
ते तु भित्त्वा तव सुतं दुःशासनमय़ोमुखाः |
११८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ते तु भीष्मं समासाद्य मुनय़ो हंसरूपिणः |
९२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
ते तु भीष्मं समासाद्य शय़ानं भरतर्षभम् |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
ते तु मां रथमारोप्य कृपस्य सुपरिष्कृतम् |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
ते तु राज्ञा समादिष्टा भीमसेनजिघांसवः |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
ते तु लव्धवराः प्रीताः सम्प्रधार्य परस्परम् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
व्रह्मो उवाच
ते तु लोकाः सहस्राक्ष शृणु यादृग्गुणान्विताः |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
ते तु लोहितदिग्धाङ्गा रक्तवर्माय़ुधाम्वराः |
६४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
ते तु वाणा महाराज हेमपुङ्खाः शिलाशिताः |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
ते तु वीराः समाश्वस्य वाहनान्यवमुच्य च |
३४ क
वन पर्व
अध्याय ९८
लोमश उवाच
ते तु वृत्रं समाश्रित्य नानाप्रहरणोद्यताः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
ते तु वैतस्तिका नाम शरा ह्यासन्नघातिनः |
१५० क